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पीठ और सर्वाइकल के दर्द में राहत दे सकता है ये योगासन, जानें करने का सही तरीका

  • Edited By Monika,
  • Updated: 07 Sep, 2026 11:17 AM
पीठ और सर्वाइकल के दर्द में राहत दे सकता है ये योगासन, जानें करने का सही तरीका

नारी डेस्क : आज के समय में ज्यादातर लोगों की लाइफस्टाइल काफी व्यस्त हो गई है। ऑफिस में घंटों कुर्सी पर बैठकर काम करना, लगातार स्क्रीन की तरफ देखते रहना और काम के दौरान शरीर का पोश्चर सही न रखना धीरे-धीरे गर्दन, कंधे और पीठ में दर्द की समस्या को बढ़ा सकता है। खासकर जो लोग लंबे समय तक कंप्यूटर या लैपटॉप पर काम करते हैं, उन्हें सर्वाइकल और बैक पेन की शिकायत अक्सर देखने को मिलती है। ऐसे में शरीर को स्ट्रेच करने और मांसपेशियों को रिलैक्स करने के लिए योग को अपनी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है। इन्हीं योगासनों में से एक है उत्तानमंडूकासन (Uttana Mandukasana)। आयुष मंत्रालय की जानकारी के अनुसार, यह आसन पीठ और ग्रीवा यानी गर्दन के क्षेत्र की तकलीफ में राहत देने में सहायक माना जाता है। आइए जानते हैं इसके फायदे, करने का सही तरीका और किन लोगों को इसे करने से बचना चाहिए।

क्या है उत्तानमंडूकासन?

उत्तानमंडूकासन को अंग्रेजी में Stretched Up Frog Pose कहा जाता है। यह एक योग मुद्रा है जिसमें शरीर को विशेष तरीके से स्ट्रेच किया जाता है। इस आसन में घुटनों को मोड़कर और पैरों की स्थिति को व्यवस्थित रखते हुए हाथों को ऊपर ले जाकर कंधों पर क्रॉस किया जाता है। इस दौरान रीढ़ को सीधा रखने पर जोर दिया जाता है।

उत्तानमंडूकासन करने के क्या फायदे हैं?

आयुष मंत्रालय की जानकारी के अनुसार, उत्तानमंडूकासन का अभ्यास शरीर के लिए कई तरह से लाभकारी माना जाता है।

पीठ और गर्दन की तकलीफ में राहत

इस आसन में शरीर के ऊपरी हिस्से को स्ट्रेच किया जाता है। नियमित और सही तरीके से अभ्यास करने पर यह पीठ और ग्रीवा क्षेत्र की तकलीफ में राहत देने में मदद कर सकता है।

शरीर की उदरीय गतिविधियों के लिए लाभकारी

उत्तानमंडूकासन को शरीर की उदरीय गतिविधियों के लिए भी उपयोगी माना जाता है। हालांकि, किसी पाचन संबंधी समस्या के इलाज के लिए केवल योग पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

फेफड़ों की कार्यक्षमता के लिए उपयोगी

इस आसन के दौरान सांस लेने और छोड़ने पर ध्यान दिया जाता है। आयुष मंत्रालय की जानकारी में इसे फेफड़ों की कार्यक्षमता के लिए लाभकारी बताया गया है।

शरीर में स्फूर्ति बनाए रखने में मदद

योग का नियमित अभ्यास शरीर को एक्टिव रखने और स्फूर्ति महसूस करने में मदद कर सकता है। उत्तानमंडूकासन भी इसी तरह शरीर को स्ट्रेच करने वाला आसन है।

उत्तानमंडूकासन कैसे करें?

इस आसन को करते समय जल्दबाजी न करें और अपनी क्षमता के अनुसार ही शरीर को स्ट्रेच करें।
स्टेप 1: सबसे पहले जमीन पर वज्रासन की मुद्रा में बैठ जाएं। दोनों पैरों को मोड़कर बैठें और एड़ियों को नितंबों के पास रखें।
स्टेप 2: अब धीरे-धीरे दोनों घुटनों को एक-दूसरे से दूर फैलाएं। अपने नितंबों को दोनों एड़ियों के बीच जमीन पर टिकाने की कोशिश करें।
स्टेप 3: दोनों हाथों को सिर के ऊपर की तरफ ले जाएं और गहरी सांस लें।
स्टेप 4: अब दोनों हाथों को मोड़ें। दाईं हथेली को बाएं कंधे पर और बाईं हथेली को दाएं कंधे पर रखें। इस तरह दोनों हाथ क्रॉस की स्थिति में होंगे।
स्टेप 5: इस दौरान अपनी रीढ़ और कमर को सीधा रखने की कोशिश करें। कोहनियां बाहर की ओर रहें।
स्टेप 6: अपनी क्षमता के अनुसार कुछ समय तक इसी मुद्रा में रहें और सामान्य रूप से सांस लेते रहें। शुरुआत में शरीर पर ज्यादा दबाव न डालें।
स्टेप 7: आसन से बाहर आने के लिए धीरे-धीरे हाथों को नीचे लाएं। इसके बाद घुटनों को पास लाकर वापस वज्रासन की स्थिति में आ जाएं।

किन लोगों को नहीं करना चाहिए उत्तानमंडूकासन?

हर योगासन हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है। आयुष मंत्रालय की जानकारी के अनुसार, जिन लोगों को घुटनों में दर्द या परेशानी रहती है, उन्हें उत्तानमंडूकासन करने से बचना चाहिए। इसके अलावा अगर आपको घुटने, कूल्हे, गर्दन या रीढ़ की हड्डी से जुड़ी चोट या गंभीर समस्या है, तो इस आसन को करने से पहले योग विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।

पीठ और सर्वाइकल के दर्द में इन बातों का भी रखें ध्यान

सिर्फ योग करने से ही गर्दन और पीठ के दर्द की समस्या पूरी तरह खत्म हो जाए, यह जरूरी नहीं है। अगर आपका काम लंबे समय तक बैठने का है तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें।
बैठते समय पीठ को सीधा रखें।
लैपटॉप या कंप्यूटर की स्क्रीन को बहुत नीचे रखकर काम न करें।
लंबे समय तक एक ही पॉजीशन में न बैठें।
बीच-बीच में उठकर हल्की स्ट्रेचिंग करें।
मोबाइल का इस्तेमाल करते समय गर्दन को लगातार नीचे झुकाकर न रखें।
दर्द लगातार बना रहे तो डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लें।

नोट : उत्तानमंडूकासन को पीठ और ग्रीवा क्षेत्र के लिए लाभकारी माना जाता है, लेकिन इसे सर्वाइकल या पीठ दर्द का इलाज नहीं समझना चाहिए। अगर दर्द बहुत ज्यादा है, लगातार बना हुआ है या इसके साथ हाथ-पैर में सुन्नपन, कमजोरी या झनझनाहट जैसी समस्या हो रही है, तो योग करने के बजाय पहले विशेषज्ञ से जांच और सलाह लेना जरूरी है।

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