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दालचीनी खरीदते वक्त न करें गलती, 2 तरह की होती है ये, जान लें कौन सी खानी चाहिए

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 07 Sep, 2026 11:54 AM
दालचीनी खरीदते वक्त न करें गलती, 2 तरह की होती है ये, जान लें कौन सी खानी चाहिए

नारी डेस्क: दालचीनी भारतीय रसोई का ऐसा मसाला है, जिसका इस्तेमाल चाय से लेकर पुलाव, सब्जियों और मिठाइयों तक में किया जाता है। इसकी खुशबू और हल्का मीठा स्वाद खाने का जायका बढ़ा देता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बाजार में मिलने वाली हर दालचीनी एक जैसी नहीं होती आमतौर पर बाजार में दालचीनी की दो प्रमुख किस्में देखने को मिलती हैं सीलोन दालचीनी (Ceylon Cinnamon) और कैसिया (Cassia Cinnamon)। दोनों दिखने में काफी हद तक एक जैसी लग सकती हैं, लेकिन उनकी बनावट, स्वाद और खास तौर पर कूमारिन (Coumarin) की मात्रा में अंतर होता है। इसलिए दालचीनी खरीदते समय इन दोनों के बीच फर्क जानना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।

क्या कैसिया नकली दालचीनी है

अक्सर लोग कैसिया को ‘नकली दालचीनी’ कहते हैं, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। कैसिया भी दालचीनी से संबंधित पेड़ों की छाल से मिलने वाला मसाला है और इसे अलग किस्म की दालचीनी माना जाता है। वहीं Ceylon Cinnamon को आमतौर पर ‘असली’ या ‘ट्रू सिनेमन’ कहा जाता है। सीलोन दालचीनी का स्वाद अपेक्षाकृत हल्का और मीठा होता है, जबकि कैसिया का स्वाद ज्यादा तेज और तीखा हो सकता है। कीमत की बात करें तो सीलोन दालचीनी आमतौर पर कैसिया से महंगी मिलती है।

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सीलोन और कैसिया में ऐसे करें पहचान

अगर आप दालचीनी की स्टिक खरीद रहे हैं तो उसकी बनावट देखकर काफी हद तक दोनों में अंतर किया जा सकता है। सीलोन दालचीनी की स्टिक में कई पतली परतें एक-दूसरे के अंदर रोल हुई दिखाई देती हैं। इसकी छाल अपेक्षाकृत पतली और नाजुक होती है, इसलिए इसे आसानी से तोड़ा जा सकता है।
दूसरी तरफ कैसिया की छाल मोटी और ज्यादा सख्त होती है। आमतौर पर इसमें एक मोटी परत दिखाई देती है और इसे तोड़ना भी सीलोन दालचीनी की तुलना में मुश्किल होता है।

खुशबू और स्वाद से भी पहचानें

दालचीनी खरीदते समय सिर्फ उसका रंग ही नहीं, बल्कि उसकी खुशबू पर भी ध्यान दिया जा सकता है। कैसिया की महक आमतौर पर तेज और ज्यादा तीखी होती है। इसके मुकाबले सीलोन दालचीनी की खुशबू हल्की और ज्यादा नाजुक होती है। स्वाद में भी दोनों के बीच फर्क महसूस किया जा सकता है। सीलोन दालचीनी में हल्की मिठास और सॉफ्ट फ्लेवर होता है, जबकि कैसिया का स्वाद ज्यादा तीखा और स्ट्रॉन्ग लगता है।

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कैसिया में ज्यादा होता है कूमारिन

दोनों किस्मों के बीच सबसे अहम अंतर कूमारिन नाम के प्राकृतिक यौगिक की मात्रा को लेकर है। कैसिया में कूमारिन की मात्रा सीलोन दालचीनी की तुलना में काफी ज्यादा होती है। कूमारिन का लंबे समय तक अधिक मात्रा में सेवन कुछ लोगों में खासकर लिवर से जुड़ी समस्या का जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए जो लोग दालचीनी का नियमित रूप से या अपेक्षाकृत ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, उनके लिए कम-कूमारिन वाली सीलोन दालचीनी बेहतर विकल्प मानी जाती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि थोड़ी मात्रा में कैसिया खाना हर व्यक्ति के लिए नुकसानदायक है। सामान्य खाना पकाने में इस्तेमाल की जाने वाली छोटी मात्रा और लंबे समय तक ज्यादा मात्रा में सेवन के बीच अंतर समझना जरूरी है।

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सीलोन दालचीनी में क्या खास है

सीलोन दालचीनी में सिनामाल्डिहाइड (Cinnamaldehyde) समेत कई प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं। इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से जुड़े यौगिक भी मौजूद होते हैं। इसके अलावा दालचीनी में कैल्शियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे खनिज भी पाए जाते हैं। हालांकि, दालचीनी को किसी बीमारी का इलाज मानना सही नहीं है। इसे संतुलित डाइट का हिस्सा भर माना जाना चाहिए।

तो कौन सी दालचीनी खरीदें

अगर आप दालचीनी का इस्तेमाल नियमित रूप से करते हैं और दोनों विकल्प आसानी से उपलब्ध हैं, तो सीलोन दालचीनी एक बेहतर विकल्प हो सकती है, खासकर कूमारिन की कम मात्रा के कारण। लेकिन खरीदते समय सिर्फ ‘दालचीनी’ लिखे होने के बजाय पैकेट पर किस्म का नाम जरूर देखें। स्टिक वाली दालचीनी खरीद रहे हैं तो उसकी परतों पर भी गौर करें। कई पतली परतों में रोल हुई नाजुक स्टिक सीलोन दालचीनी की पहचान हो सकती है, जबकि मोटी और सख्त एकल छाल कैसिया की ओर इशारा करती है।

कुल मिलाकर, कैसिया को पूरी तरह ‘नकली’ कहना सही नहीं है। दोनों ही अलग किस्म के मसाले हैं, लेकिन अगर आप दालचीनी को रोजाना इस्तेमाल करने के लिए चुन रहे हैं तो उसकी किस्म और मात्रा, दोनों पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।
 

 
 
 
 

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