
नारी डेस्क: नवरात्रि ईश्वरत्व के स्त्री गुण यानी -दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती की कृपा से जुड़ने का एक अवसर है। ये तीन देवियां अस्तित्व के तीन मूल गुणों - तमस, रजस और सत्व की प्रतीक हैं। तमस का अर्थ है जड़ता। रजस का गुण सक्रियता और जोश से जुड़ा है। और सत्व गुण, ज्ञान और बोध का गुण है। सभी नवरात्रि देवी को समर्पित होते हैं, और दसवां दिन दशहरा तीनों मूल गुणों से परे जाने से जुड़ा होता है। महाकाली (क्रिया शक्ति), अगले तीन दिन मां लक्ष्मी (धन व समृद्धि) और अंतिम तीन दिन मां सरस्वती (ज्ञान) की आराधना की जाती है।

नौ रातों का महत्व
इस साल नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होगी और इसमें देवी दुर्गा और शक्ति के विभिन्न रूपों को समर्पित नौ रातें शामिल होंगी। इस बार दुर्गा अष्टमी और महा नवमी 19 अक्टूबर को और विजयादशमी 20 अक्टूबर, 2026 को मनाई जाएगी। हालांकि, आध्यात्मिक खोज करने वालों के लिए नवरात्रि का मतलब पूजा और जश्न से कहीं ज़्यादा हो सकता है। आध्यात्मिक विशेषज्ञों ने हाल ही में समझाया कि ये नौ रातें आपके भीतर मौजूद शक्तियों के साथ काम करने की एक यात्रा हैं।
नवरात्रि आपके भीतर क्या जगाती है?
आध्यात्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि 'देवी महात्म्य' में बताए गए असुर, अहंकार, लालसा, शर्म, नफ़रत, सुस्ती और मन में गहराई से बैठी आदतों जैसे आंतरिक संघर्षों का भी प्रतीक हो सकते हैं। इस तरह ये नौ रातें इन आदतों को आप पर हावी होने देने के बजाय, उनका सामना करने का समय बन जाती हैं। पहली तीन रातें मां काली से जुड़ी होती हैं। वह उस शक्ति का प्रतीक हैं जो आपको नकारात्मकता और उन भावनाओं का सामना करने में मदद करती है जो आपको आगे बढ़ने से रोकती हैं। आप इस समय का इस्तेमाल उन आदतों, डरों या लगाव को समझने के लिए कर सकते हैं जिन्हें आप और साफ़ तौर पर जानना चाहते हैं।

आखिरी तीन रातें मां सरस्वती को समर्पित
आध्यात्मिक विशेषज्ञों के अनुसार बीच की तीन रातें मां लक्ष्मी से जुड़ी हाेती हैं। आप इस चरण को मुश्किल भावनाओं को दबाने की कोशिश करने के बजाय अपनी ऊर्जा के साथ काम करने के तौर पर देख सकते हैं। आखिरी तीन रातें मां सरस्वती को समर्पित हैं। वह ज्ञान और शाश्वत (हमेशा रहने वाले) सत्य की गहरी समझ का प्रतीक हैं। यह चरण आपको ज़्यादा स्पष्टता, जागरूकता और अंदरूनी शांति की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। आप इन नौ रातों का इस्तेमाल प्रार्थना, ध्यान, मौन या आत्म-चिंतन के लिए ज़्यादा समय निकालने में कर सकते हैं। सिर्फ़ यह सोचने के बजाय कि आपको क्या पाना है, खुद से पूछें कि आपको क्या छोड़ने, बदलने और समझने की ज़रूरत है।