
नारी डेस्क : अगर आपको अक्सर एसिडिटी या सीने में जलन की शिकायत रहती है और आप बिना डॉक्टर की सलाह के दवा खरीद लेते हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है। एसिडिटी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली वोनोप्राजान दवा को लेकर केंद्रीय औषधि नियामक की ओर से डॉक्टर की पर्ची से जुड़ी शर्त रखी गई है। उपलब्ध CDSCO दस्तावेजों के मुताबिक 10 और 20 मिलीग्राम की वोनोप्राजान गोलियों की बिक्री पंजीकृत चिकित्सक की पर्ची पर करने की शर्त पर चर्चा हुई है।
क्यों जरूरी हुई डॉक्टर की सलाह?
बार-बार होने वाली एसिडिटी को केवल सामान्य गैस या अपच समझकर लंबे समय तक दवा लेते रहना सही नहीं माना जाता। लगातार एसिडिटी के पीछे गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफ्लक्स, पेट में अल्सर या दूसरी पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए अगर आपको बार-बार दवा लेने की जरूरत पड़ रही है, तो समस्या की वजह जानने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। वोनोप्राजान का इस्तेमाल रिफ्लक्स से जुड़ी समस्या, गैस्ट्रिक और ड्यूओडिनल अल्सर जैसी स्थितियों में किया जाता है। CDSCO के रिकॉर्ड में इसकी 10 और 20 मिलीग्राम की दवाएं इन उपयोगों के लिए दर्ज हैं।

लंबे समय तक दवा लेने पर क्यों सावधानी जरूरी?
एसिडिटी की दवा लंबे समय तक लेने की जरूरत पड़ रही हो तो बिना चिकित्सकीय सलाह के इसे जारी नहीं रखना चाहिए। कुछ अम्ल कम करने वाली दवाओं के लंबे समय तक इस्तेमाल से कुछ लोगों में पोषक तत्वों की कमी या अन्य दुष्प्रभावों का जोखिम हो सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि दवा लेने वाले हर व्यक्ति को ऐसी समस्या होगी। इसलिए बार-बार एसिडिटी होने पर केवल दवा से लक्षण दबाने के बजाय इसके पीछे की वजह की जांच कराना ज्यादा जरूरी है।
फैटी लिवर के इलाज में नई दवाओं पर चल रहे परीक्षण
फैटी लिवर से जुड़ी बीमारी के इलाज के लिए कुछ नई दवाओं पर भी चिकित्सकीय परीक्षण जारी हैं। इनमें एफ्रुक्सिफर्मिन और रेसमेटिरोम जैसी दवाएं शामिल हैं। CDSCO के रिकॉर्ड में एफ्रुक्सिफर्मिन के तीसरे चरण के परीक्षणों से जुड़ी मंजूरियां दर्ज हैं, जबकि रेसमेटिरोम के 60, 80 और 100 मिलीग्राम वाले रूपों के परीक्षणों को भी मंजूरी मिली है। इन परीक्षणों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि दवाएं संबंधित मरीजों में कितनी सुरक्षित और प्रभावी हैं। जब तक किसी दवा को संबंधित बीमारी के लिए मंजूरी नहीं मिलती, तब तक उसे सामान्य इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

लंबे समय की कब्ज और पेट दर्द के लिए दवा पर भी नजर
लंबे समय तक कब्ज के साथ पेट दर्द और दूसरी आंतों से जुड़ी परेशानियां होने पर इसे IBS-C यानी कब्ज प्रमुख इरिटेबल बाउल सिंड्रोम कहा जाता है। इसके इलाज में लिनाक्लोटाइड का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी अलग-अलग मात्रा अलग परिस्थितियों में इस्तेमाल की जाती है और दवा की सही मात्रा मरीज की स्थिति के अनुसार डॉक्टर तय करते हैं। इसलिए कब्ज या पेट दर्द लंबे समय से बना हुआ है तो खुद से दवा शुरू करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
सिकल सेल बीमारी में बच्चों पर भी दवा का परीक्षण
सिकल सेल बीमारी के इलाज से जुड़ी एटावोपिवाट दवा पर भी चिकित्सकीय परीक्षण किए जा रहे हैं। CDSCO के रिकॉर्ड में इस दवा से जुड़े परीक्षण दर्ज हैं। बच्चों में किसी नई दवा का परीक्षण करने का उद्देश्य उसकी सुरक्षा और प्रभाव को समझना होता है। इसलिए परीक्षण में शामिल होने और सामान्य इलाज के तौर पर दवा इस्तेमाल करने में अंतर समझना जरूरी है। बच्चों को ऐसी दवा केवल डॉक्टर की सलाह और निगरानी में ही दी जानी चाहिए।

क्या करें अगर आपको बार-बार एसिडिटी होती है?
अगर कभी-कभार एसिडिटी होती है तो खान-पान और जीवनशैली में बदलाव से राहत मिल सकती है। लेकिन अगर रोजाना या बार-बार दवा लेने की जरूरत पड़ रही है, रात में सीने में जलन होती है, निगलने में परेशानी होती है, लगातार पेट दर्द रहता है या वजन बिना वजह कम हो रहा है, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
ध्यान रखें: किसी भी दवा को अपनी मर्जी से शुरू या लंबे समय तक जारी न रखें। डॉक्टर आपकी समस्या और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर सही दवा और उसकी अवधि तय कर सकते हैं।