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मसूड़ों की बीमारी से हो सकता है अल्जाइमर!रिसर्च में सामने आया चौंकाने वाला दावा

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 07 Sep, 2026 02:38 PM
मसूड़ों की बीमारी से हो सकता है अल्जाइमर!रिसर्च में सामने आया चौंकाने वाला दावा

 नारी डेस्क: दांतों और मसूड़ों की सेहत को अक्सर सिर्फ ओरल हेल्थ तक सीमित माना जाता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में वैज्ञानिकों का ध्यान इसके शरीर और दिमाग पर पड़ने वाले संभावित असर की तरफ भी गया है। इसी कड़ी में एक रिसर्च ने मसूड़ों की गंभीर बीमारी और अल्जाइमर के बीच संभावित संबंध को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। वैज्ञानिकों की नजर खास तौर पर Porphyromonas gingivalis (P. gingivalis) नाम के बैक्टीरिया पर है। यह बैक्टीरिया गंभीर और लंबे समय तक रहने वाली मसूड़ों की बीमारी, यानी पीरियडोंटाइटिस से जुड़ा हुआ है। 2019 में Science Advances में प्रकाशित एक अध्ययन में अल्जाइमर से प्रभावित ब्रेन टिश्यू में इस बैक्टीरिया के डीएनए और इससे जुड़े जहरीले एंजाइमों की मौजूदगी के सबूत मिले थे। 

अल्जाइमर के दिमाग में मिला मसूड़ों से जुड़ा बैक्टीरिया

रिसर्च में वैज्ञानिकों ने अल्जाइमर से प्रभावित लोगों के ब्रेन टिश्यू की जांच की। इसमें P. gingivalis से जुड़े gingipain नाम के एंजाइमों की मौजूदगी देखी गई। अध्ययन में शामिल कुछ मरीजों के ब्रेन टिश्यू में इस बैक्टीरिया के संकेत भी मिले। इस खोज ने वैज्ञानिकों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा किया क्या मुंह में मौजूद यह बैक्टीरिया किसी तरह दिमाग तक पहुंच सकता है और वहां सूजन या दूसरी प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकता है? हालांकि, इस सवाल का जवाब अभी पूरी तरह तय नहीं हुआ है। 

मुंह से दिमाग तक कैसे पहुंच सकता है बैक्टीरिया

गंभीर पीरियडोंटाइटिस में मसूड़ों में लगातार सूजन और संक्रमण बना रह सकता है। ऐसी स्थिति में मुंह के बैक्टीरिया और उनके घटक शरीर के दूसरे हिस्सों तक पहुंचने की संभावना पर वैज्ञानिक लंबे समय से अध्ययन कर रहे हैं। रिसर्च में यह संभावना जताई गई है कि P. gingivalis या उसके बैक्टीरियल घटक रक्तप्रवाह के जरिए शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंच सकते हैं। दिमाग तक पहुंचने के बाद इनसे जुड़ी सूजन और इम्यून प्रतिक्रिया न्यूरॉन्स को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, इंसानों में यह प्रक्रिया अल्जाइमर की बीमारी को किस हद तक प्रभावित करती है, इसे लेकर अभी और पुख्ता शोध की जरूरत है। 

चूहों पर प्रयोग में क्या सामने आया

इस संबंध को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने जानवरों पर भी प्रयोग किए हैं। 2019 की रिसर्च में चूहों को लंबे समय तक P. gingivalis के संपर्क में रखा गया। इसके बाद वैज्ञानिकों ने उनके दिमाग में बैक्टीरिया से जुड़े बदलावों के साथ-साथ amyloid-beta से संबंधित प्रक्रियाओं को भी देखा।  बाद की 2026 की एक स्टडी में भी चूहों में P. gingivalis के संपर्क के बाद मस्तिष्क में सूजन, न्यूरॉन्स को नुकसान और cognitive impairment जैसे बदलावों की जांच की गई। इस रिसर्च ने खास तौर पर microglia, mitochondrial dysfunction और neuroinflammation के बीच संभावित कनेक्शन पर ध्यान दिया। 

क्या मसूड़ों की बीमारी से हो जाता है अल्जाइमर

यहां सबसे जरूरी बात समझना बेहद जरूरी है। रिसर्च में मसूड़ों की बीमारी और अल्जाइमर के बीच association यानी संबंध के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि पीरियडोंटाइटिस होने पर किसी व्यक्ति को अल्जाइमर जरूर होगा। अल्जाइमर एक जटिल न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है। इसके पीछे उम्र, आनुवंशिक कारणों, मस्तिष्क में होने वाले बदलावों और कई अन्य जोखिम कारकों की भूमिका हो सकती है। इसलिए केवल ओरल हेल्थ को अल्जाइमर की एकमात्र वजह मानना वैज्ञानिक तौर पर सही नहीं होगा।

फिर क्यों अहम है यह रिसर्च

इस रिसर्च की अहमियत इसलिए है क्योंकि इससे वैज्ञानिकों को यह समझने का एक नया रास्ता मिल रहा है कि शरीर में लंबे समय तक रहने वाले संक्रमण और सूजन का दिमाग की सेहत से किस तरह संबंध हो सकता है। अगर भविष्य की रिसर्च इंसानों में इस कनेक्शन को और मजबूती से साबित करती है, तो ओरल हेल्थ को बेहतर रखना दिमागी सेहत के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है। फिलहाल वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि P. gingivalis और उससे जुड़ी सूजन अल्जाइमर जैसी बीमारियों में वास्तव में कितनी भूमिका निभाती है। 

मसूड़ों की सेहत को नजरअंदाज न करें

अल्जाइमर से सीधे संबंध को लेकर अभी शोध जारी है, लेकिन मसूड़ों की सफाई और ओरल हेल्थ का ध्यान रखना वैसे भी जरूरी है। नियमित ब्रशिंग, दांतों के बीच की सफाई और जरूरत पड़ने पर डेंटिस्ट से जांच कराना मसूड़ों की बीमारी से बचाव में मदद कर सकता है। अगर मसूड़ों से बार-बार खून आता है, उनमें सूजन रहती है, दर्द होता है या सांसों से लगातार बदबू आती है, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में डेंटिस्ट से सलाह लेना बेहतर है।
  

 

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