
नारी डेस्क : बॉलीवुड एक्ट्रेस करीना कपूर अपने दोनों बेटों तैमूर और जेह की परवरिश को लेकर काफी सजग रहती हैं। वह चाहती हैं कि उनके बच्चे सिर्फ पढ़ाई और करियर में ही आगे न बढ़ें, बल्कि एक संवेदनशील और जिम्मेदार इंसान भी बनें। हाल ही में फिल्म ‘दायरा’ के ट्रेलर लॉन्च के दौरान करीना ने अपने पैरेंटिंग अप्रोच के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि वह अपने बेटों को बचपन से ही भावनाओं को समझना और उन्हें खुलकर जाहिर करना सिखा रही हैं।
बेटों को दयालु बनाना चाहती हैं करीना
करीना ने बताया कि दो बेटों की मां होने के नाते वह उनकी सुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंतित रहती हैं। वह चाहती हैं कि उनके बेटे जिम्मेदार बनने के साथ-साथ दयालु और संवेदनशील इंसान बनें। करीना का मानना है कि लड़कों को भी अपनी भावनाओं को समझने और व्यक्त करने की पूरी आजादी मिलनी चाहिए। उनके मुताबिक, पुरुषों के लिए भी संवेदनशील होना उतना ही जरूरी है, जितना किसी और के लिए।

रोना आए तो रो सकते हो
करीना ने यह भी कहा कि वह अपने बेटों से कहती हैं कि अगर उन्हें रोना आता है तो वे खुलकर रो सकते हैं। उनका मानना है कि लड़कों को यह सिखाना जरूरी है कि रोना कमजोरी की निशानी नहीं है। अक्सर बच्चों को बचपन से ही यह सुनने को मिलता है कि 'मर्द रोते नहीं', लेकिन ऐसी सोच उन्हें अपनी भावनाओं को दबाने की आदत डाल सकती है। करीना इसके बजाय अपने बेटों को अपनी भावनाओं को स्वीकार करने और उन्हें जाहिर करने की सीख देना चाहती हैं।
बेटों को इमोशंस जाहिर करना सिखाना क्यों जरूरी?
बच्चे जब अपनी भावनाओं को पहचानना और उन्हें सही तरीके से व्यक्त करना सीखते हैं, तो उनके लिए अपनी परेशानियों और जरूरतों के बारे में बात करना आसान हो जाता है। इससे वे खुद को बेहतर तरीके से समझने के साथ-साथ दूसरे लोगों की भावनाओं को भी समझना सीखते हैं। अगर बच्चा दुखी है, डर रहा है, परेशान है या किसी बात से आहत है, तो उसे अपनी भावना व्यक्त करने का मौका मिलना चाहिए। माता-पिता का काम उसकी भावनाओं को तुरंत खारिज करने के बजाय उसे सुनना और समझना है।

मर्द रोते नहीं' वाली सोच से बाहर निकलना जरूरी
समाज में लंबे समय से लड़कों को मजबूत दिखने और अपनी भावनाएं छिपाने की सीख दी जाती रही है। लेकिन मजबूत होने का मतलब अपनी भावनाओं को दबाना नहीं है। लड़कों को भी दुख, डर, प्यार, गुस्सा और असुरक्षा जैसी भावनाएं महसूस होती हैं। उन्हें इन भावनाओं को समझना और स्वस्थ तरीके से व्यक्त करना सिखाना उनकी भावनात्मक समझ को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
करीना की पैरेंटिंग से हर बॉय पैरेंट क्या सीख सकता है?
करीना की बात से पैरेंट्स के लिए एक अहम सीख मिलती है कि बेटों की परवरिश सिर्फ उन्हें मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्हें दयालु, संवेदनशील, जिम्मेदार और भावनात्मक रूप से समझदार बनाना भी उतना ही जरूरी है। बच्चे को यह भरोसा देना कि वह अपनी भावनाओं के बारे में माता-पिता से खुलकर बात कर सकता है, उसकी परवरिश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। आखिरकार, एक अच्छा इंसान बनने के लिए भावनाओं को समझना भी उतना ही जरूरी है जितना दुनिया का सामना करना।