नारी डेस्क: प्रेग्नेंसी की खबर सामने आने पर अक्सर महिलाओं के मन में कई सवाल उठते हैं। खासकर तब, जब उन्हें प्रेग्नेंसी से पहले या उसके शुरुआती दौर में ब्लीडिंग होती रहे। ऐसी ही एक महिला को जब जांच के दौरान पता चला कि वह 12 हफ्ते की प्रेग्नेंट है, तो उसके लिए यह किसी हैरानी से कम नहीं था। महिला का कहना था कि उसे तो हर महीने पीरियड्स आते रहे हैं, फिर वह प्रेग्नेंट कैसे हो सकती है? दरअसल, महिला हर महीने होने वाली हल्की ब्लीडिंग को पीरियड्स समझ रही थी। जब उसने अपनी परेशानी गाइनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर गरिमा सिंह को बताई, तो उन्होंने समझाया कि प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली हर ब्लीडिंग को पीरियड्स समझना सही नहीं है।
'बधाई हो, आप 12 हफ्ते की प्रेग्नेंट हैं'
डॉक्टर गरिमा सिंह ने एक वीडियो में इस मामले को समझाते हुए बताया कि जांच के बाद जब उन्होंने महिला को बताया, 'बधाई हो, जांच में 12 सप्ताह की प्रेग्नेंसी दिख रही है,' तो महिला हैरान रह गई। महिला ने तुरंत डॉक्टर से सवाल किया कि ऐसा कैसे हो सकता है। उसने बताया कि उसे हर महीने ब्लीडिंग होती रही है और वह इसे पीरियड्स ही मान रही थी। ऐसे में उसे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि वह प्रेग्नेंट हो सकती है।
पहले जैसे पीरियड्स नहीं, सिर्फ हल्की ब्लीडिंग थी
महिला की बात सुनने के बाद डॉक्टर ने उससे ब्लीडिंग के बारे में विस्तार से पूछा। उन्होंने जानना चाहा कि क्या ब्लीडिंग पहले की तरह सामान्य और ज्यादा होती थी या सिर्फ कुछ बूंदों तक सीमित थी। महिला ने बताया कि पहले की तरह तेज ब्लीडिंग नहीं हो रही थी। इस बार सिर्फ हल्की-हल्की ब्लीडिंग होती थी, वह भी बूंद-बूंद करके। यहीं से डॉक्टर ने उसे समझाया कि यह सामान्य पीरियड्स नहीं थे।
डॉक्टर ने बताया- इसे सबकोरियोनिक हेमरेज कहते हैं
डॉक्टर गरिमा सिंह के मुताबिक, प्रेग्नेंसी के दौरान बच्चे के पीछे मौजूद झिल्ली के पास कभी-कभी खून जमा हो सकता है। इस स्थिति को सबकोरियोनिक हेमरेज (Subchorionic Hemorrhage) कहा जाता है। इसमें जमा हुआ खून धीरे-धीरे बाहर निकल सकता है और इसकी वजह से महिला को स्पॉटिंग या हल्की ब्लीडिंग हो सकती है। यही वजह थी कि महिला को ऐसा लग रहा था कि हर महीने उसके पीरियड्स आ रहे हैं। डॉक्टर ने साफ किया कि यह ब्लीडिंग पीरियड्स नहीं थी, बल्कि प्रेग्नेंसी के दौरान हुई स्पॉटिंग थी।
हर ब्लीडिंग को पीरियड्स समझना ठीक नहीं
आमतौर पर प्रेग्नेंसी के दौरान पीरियड्स नहीं आते। लेकिन प्रेग्नेंसी में किसी तरह की ब्लीडिंग या स्पॉटिंग को अपने आप पीरियड्स मान लेना भी सही नहीं है। खासकर तब, जब ब्लीडिंग का पैटर्न पहले से अलग हो। इस मामले में भी महिला को पहले चार-पांच दिन तक सामान्य पीरियड्स होते थे, जबकि प्रेग्नेंसी के दौरान सिर्फ हल्की और रुक-रुककर ब्लीडिंग हुई। इसी अंतर को वह समझ नहीं पाईं और प्रेग्नेंसी का पता चलने में देर हो गई।
थकान, मतली और कमजोरी भी थे संकेत
डॉक्टर ने यह भी बताया कि महिला को थकान, मतली और कमजोरी जैसे लक्षण महसूस हो रहे थे। ये लक्षण भी प्रेग्नेंसी के दौरान आम तौर पर देखे जा सकते हैं। ऐसे में अगर पीरियड्स का पैटर्न बदल जाए, ब्लीडिंग सामान्य से काफी कम हो या उसके साथ प्रेग्नेंसी से जुड़े दूसरे लक्षण भी दिखाई दें, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ऐसी स्थिति में जांच कराना जरूरी
इस मामले से यह समझा जा सकता है कि सिर्फ ब्लीडिंग होने के आधार पर यह मान लेना सही नहीं है कि पीरियड्स ही आए हैं। अगर ब्लीडिंग सामान्य से अलग हो रही है या प्रेग्नेंसी के संभावित लक्षण भी मौजूद हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेकर जांच कराना बेहतर है। वहीं, प्रेग्नेंसी के दौरान किसी भी तरह की ब्लीडिंग को हल्के में नहीं लेना चाहिए। इसके कई कारण हो सकते हैं, इसलिए सही वजह जानने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी होती है।