नारी डेस्क: ताजमहल में लगातार बढ़ रही पर्यटकों की भीड़ को देखते हुए अब प्रवेश और निकास व्यवस्था को नए सिरे से व्यवस्थित करने की तैयारी है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने एक समय में ताजमहल परिसर में कितने पर्यटकों को प्रवेश दिया जा सकता है, इसका वैज्ञानिक आकलन कराने की जिम्मेदारी आईआईटी दिल्ली को सौंपी है। आईआईटी दिल्ली की टीम ताजमहल में पर्यटकों की आवाजाही से लेकर प्रवेश-निकास, टिकटिंग और सुरक्षा जांच तक पूरी व्यवस्था का अध्ययन करेगी। इसी अध्ययन के आधार पर स्मारक की कैरिंग कैपेसिटी तय की जाएगी, यानी एक समय में कितने पर्यटक ताजमहल परिसर और मुख्य मकबरे में सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से रह सकते हैं।
छह माह में लागू हो सकती है नई व्यवस्था
एएसआई के मुताबिक, आईआईटी दिल्ली से कैरिंग कैपेसिटी का अध्ययन कराने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसके लिए बजट भी आवंटन के लिए भेजा जा चुका है। जल्द ही आईआईटी की टीम ताजमहल पहुंचकर अध्ययन शुरू करेगी। अध्ययन पूरा होने के बाद इसकी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी को सौंपी जाएगी। रिपोर्ट और कमेटी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद एएसआई करीब छह माह के भीतर नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी करेगा। ताजमहल की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए कैरिंग कैपेसिटी का नए सिरे से आकलन कराया जा रहा है। अध्ययन के आधार पर पर्यटकों की संख्या और आवाजाही को लेकर व्यावहारिक मानक तय किए जाएंगे।

मुख्य मकबरे से लेकर टिकटिंग तक का होगा अध्ययन
आईआईटी दिल्ली की टीम यह देखेगी कि मुख्य मकबरे में एक समय में कितने पर्यटकों को प्रवेश दिया जाना सुरक्षित होगा। इसके साथ ही प्रति घंटे अधिकतम कितने पर्यटकों को प्रवेश दिया जा सकता है और पर्यटक अंदर कितनी देर तक रुकें, इसका भी आकलन किया जाएगा। पीक सीजन, रविवार और अवकाश के दिनों में भीड़ का दबाव सामान्य दिनों से अलग रहता है। ऐसे में इन दिनों के लिए अलग व्यवस्था की जरूरत है या नहीं, इसका भी अध्ययन किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर टाइम स्लॉट या स्टेप टिकटिंग जैसी व्यवस्था लागू करने की संभावना पर भी विचार होगा।
प्रवेश-निकास और सुरक्षा जांच पर भी नजर
अध्ययन में टिकट खरीदने और सुरक्षा जांच में लगने वाले समय को भी शामिल किया जाएगा। प्रवेश और निकास के दौरान किस स्थान पर सबसे ज्यादा भीड़ का दबाव बनता है, इसे चिह्नित कर उसके समाधान का सुझाव दिया जाएगा। इसका उद्देश्य केवल पर्यटकों की भीड़ कम करना नहीं, बल्कि पूरे परिसर में आवाजाही को इस तरह व्यवस्थित करना है कि पर्यटकों को अनावश्यक परेशानी न हो और स्मारक की सुरक्षा भी बनी रहे।
भीड़ का स्मारक पर असर भी जांचेगी टीम
ताजमहल में बढ़ती भीड़ का असर स्मारक के संगमरमर, पत्थर और पच्चीकारी पर कितना पड़ रहा है, इसका भी आकलन किया जाएगा। इसके अलावा पर्यटकों की अधिक संख्या से आर्द्रता और पर्यावरणीय परिस्थितियों में होने वाले बदलाव का स्मारक पर क्या प्रभाव पड़ रहा है, इसे भी अध्ययन में शामिल किया जाएगा। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ताजमहल के लिए ऐसी क्षमता निर्धारित की जाएगी, जिससे पर्यटन और स्मारक संरक्षण के बीच संतुलन बनाया जा सके।

2015 में नीरी भी कर चुका है अध्ययन
ताजमहल की कैरिंग कैपेसिटी और भीड़ प्रबंधन को लेकर इससे पहले वर्ष 2015 में नेशनल एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) ने भी अध्ययन किया था। उस समय की सिफारिशों में ताजमहल परिसर में एक समय में करीब 9,000 पर्यटकों की सीमा रखने और प्रति घंटे अधिकतम 6,000 पर्यटकों को प्रवेश देने का सुझाव दिया गया था। नीरी ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए डिजिटल डिस्प्ले और स्टेप टिकटिंग जैसी व्यवस्थाओं की सिफारिश भी की थी। हालांकि, अब करीब एक दशक बाद पर्यटकों की संख्या, प्रवेश व्यवस्था और स्मारक की मौजूदा स्थिति में बदलाव को देखते हुए नए सिरे से मानक तय किए जाएंगे।
मौजूदा हालात के हिसाब से तय होंगे नए मानक
आईआईटी दिल्ली की रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि वर्तमान समय में ताजमहल की सुरक्षित कैरिंग कैपेसिटी कितनी होनी चाहिए। इसके आधार पर प्रवेश की संख्या, समय और टिकटिंग व्यवस्था में बदलाव किए जा सकते हैं। एएसआई की कोशिश है कि नई व्यवस्था में पर्यटकों की सुविधा के साथ ताजमहल की ऐतिहासिक और स्थापत्य विरासत का संरक्षण भी सुनिश्चित हो। रिपोर्ट के आधार पर लागू होने वाली व्यवस्था आने वाले वर्षों में ताजमहल में बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अहम मानी जा रही है।
