नारी डेस्क : महिलाओं में योनि और यूरिनरी ट्रैक्ट से जुड़ी कई तरह की समस्याएं देखने को मिलती हैं। खुजली, जलन, असामान्य डिस्चार्ज या पेशाब करते समय दर्द जैसे लक्षणों के कारण कई बार महिलाएं यीस्ट इंफेक्शन, UTI और ब्लैडर इंफेक्शन को एक ही समस्या समझ लेती हैं। हालांकि ये तीनों अलग-अलग स्थितियां हैं और इनके कारण व इलाज भी अलग हो सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर खुद से दवा लेना सही नहीं है। पहले यह समझना जरूरी है कि समस्या किस हिस्से में है और उसका संभावित कारण क्या है।
यीस्ट इंफेक्शन और UTI में क्या अंतर है?
यीस्ट इंफेक्शन
वजाइनल यीस्ट इंफेक्शन आमतौर पर Candida नामक फंगस के जरूरत से ज्यादा बढ़ने के कारण होता है। इसमें योनि के आसपास तेज खुजली, जलन, लालिमा और सफेद, गाढ़ा या असामान्य डिस्चार्ज हो सकता है। इसे वजाइनल कैंडिडायसिस भी कहा जाता है। यीस्ट इंफेक्शन का इलाज उसके लक्षणों और जांच के आधार पर किया जाता है। यह आमतौर पर कोई ऐसी बीमारी नहीं है जो पूरे शरीर में फैलती रहे, लेकिन कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में Candida का गंभीर संक्रमण शरीर के दूसरे हिस्सों को प्रभावित कर सकता है।

UTI यानी यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन
UTI यूरिनरी सिस्टम के किसी हिस्से में होने वाला संक्रमण है। यह अक्सर बैक्टीरिया के कारण होता है। यूरिनरी ट्रैक्ट में किडनी, यूरेटर, ब्लैडर और यूरेथ्रा शामिल होते हैं। UTI में बार-बार पेशाब लगना, पेशाब करते समय जलन या दर्द, अचानक पेशाब की तेज इच्छा और कभी-कभी पेशाब में खून जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। अगर संक्रमण किडनी तक पहुंच जाए तो बुखार, ठंड लगना और कमर या पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द भी हो सकता है।
क्या ब्लैडर इंफेक्शन और UTI अलग हैं?
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। ब्लैडर इंफेक्शन, UTI का ही एक प्रकार है। जब संक्रमण मुख्य रूप से ब्लैडर में होता है, तो इसे सिस्टाइटिस (Cystitis) कहा जाता है। वहीं UTI एक व्यापक शब्द है, जिसका इस्तेमाल यूरिनरी ट्रैक्ट के किसी भी हिस्से के संक्रमण के लिए किया जाता है। इसलिए यह कहना सही नहीं है कि ब्लैडर इंफेक्शन और UTI पूरी तरह अलग बीमारियां हैं। ब्लैडर इंफेक्शन को UTI की एक खास स्थिति माना जाता है।
तीनों में लक्षण कैसे अलग हो सकते हैं?
कुछ लक्षण एक-दूसरे से मिलते-जुलते हो सकते हैं, लेकिन कुछ संकेत अंतर समझने में मदद कर सकते हैं।
यीस्ट इंफेक्शन में योनि में तेज खुजली
जलन या लालिमा
सफेद और गाढ़ा डिस्चार्ज
योनि के आसपास सूजन या असहजता

UTI या ब्लैडर इंफेक्शन में
पेशाब करते समय जलन या दर्द
बार-बार पेशाब आने की इच्छा
पेशाब की तेज और अचानक इच्छा
पेशाब का धुंधला या बदबूदार होना
ब्लैडर इंफेक्शन में पेट के निचले हिस्से में दर्द या दबाव
ध्यान रखें कि केवल लक्षणों से हमेशा सही पहचान नहीं हो सकती। कुछ महिलाओं में एक से अधिक संक्रमण एक साथ भी हो सकते हैं।
किन महिलाओं को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है?
UTI और यीस्ट इंफेक्शन किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ स्थितियों में इनका जोखिम बढ़ सकता है।
प्रेग्नेंसी: गर्भावस्था में UTI को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर गर्भवती महिला को पेशाब में जलन, बार-बार पेशाब आना, बुखार या अन्य असामान्य लक्षण हों तो डॉक्टर से जल्द संपर्क करना चाहिए।
एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल: लंबे समय या बार-बार एंटीबायोटिक लेने से योनि में सामान्य माइक्रोबायोम का संतुलन बदल सकता है, जिससे कुछ महिलाओं में यीस्ट इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है।
डायबिटीज: ब्लड शुगर नियंत्रित न रहने पर यीस्ट इंफेक्शन का जोखिम बढ़ सकता है।
इसके अलावा कमजोर इम्यूनिटी और कुछ अन्य स्वास्थ्य स्थितियां भी संक्रमण की संभावना को प्रभावित कर सकती हैं।

आखिर क्यों होता है यीस्ट इंफेक्शन?
योनि में सामान्य रूप से अलग-अलग सूक्ष्मजीव मौजूद रहते हैं। इनमें संतुलन बिगड़ने पर Candida की अधिक वृद्धि हो सकती है और यीस्ट इंफेक्शन हो सकता है। एंटीबायोटिक का इस्तेमाल, गर्भावस्था, डायबिटीज और कमजोर इम्यून सिस्टम जैसी कुछ स्थितियां इसके जोखिम को बढ़ा सकती हैं।
UTI क्यों होता है?
UTI अक्सर त्वचा या मलद्वार के आसपास मौजूद बैक्टीरिया के यूरिनरी ट्रैक्ट में पहुंचने के कारण होता है। महिलाओं में यूरेथ्रा छोटी होने के कारण बैक्टीरिया के ब्लैडर तक पहुंचने की संभावना अधिक रहती है। यौन गतिविधि, गर्भावस्था, मेनोपॉज और यूरिनरी ट्रैक्ट से जुड़ी कुछ समस्याएं UTI के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। एक जरूरी बात यह भी है कि योनि को तेज पानी के प्रेशर से धोने या अंदर से साफ करने की जरूरत नहीं होती। डूशिंग या अत्यधिक सफाई से प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है और जलन या संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
संक्रमण से बचने के लिए क्या करें?
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
पेशाब को लंबे समय तक रोककर न रखें।
टॉयलेट के बाद आगे से पीछे की ओर सफाई करें।
योनि के अंदर साबुन, परफ्यूम या डूशिंग प्रोडक्ट का इस्तेमाल न करें।
बहुत टाइट या लंबे समय तक नमी बनाए रखने वाले अंडरगारमेंट से बचें।
संबंध बनाने के बाद पेशाब करने से कुछ महिलाओं में UTI के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या एंटीफंगल दवा न लें।

नोट: अगर पेशाब में खून आए, तेज बुखार हो, कमर या पीठ में तेज दर्द हो, गर्भावस्था के दौरान UTI के लक्षण दिखाई दें या योनि में खुजली और असामान्य डिस्चार्ज बार-बार हो रहा हो, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।