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मां का दूध क्यों है शिशु के लिए अमृत? जानिए 6 महीने तक Breastfeeding के फायदे

  • Edited By Monika,
  • Updated: 02 Aug, 2026 12:23 PM
मां का दूध क्यों है शिशु के लिए अमृत? जानिए 6 महीने तक Breastfeeding के फायदे

नारी डेस्क : हर साल 1 से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह (World Breastfeeding Week) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य माताओं को स्तनपान के महत्व के प्रति जागरूक करना, उनसे जुड़े भ्रम दूर करना और उन्हें सही जानकारी उपलब्ध कराना है। मां बनना हर महिला के जीवन का सबसे खूबसूरत अनुभव होता है। बच्चे के जन्म के साथ नई जिम्मेदारियां भी शुरू हो जाती हैं। ऐसे में लगभग हर नई मां के मन में एक सवाल जरूर आता है—क्या मैं अपने बच्चे को पर्याप्त दूध पिला पाऊंगी? क्या मेरा दूध ही उसके लिए पर्याप्त होगा? विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मां सही पोषण ले, मानसिक रूप से शांत रहे और परिवार का सहयोग मिले, तो अधिकांश महिलाएं सफलतापूर्वक अपने बच्चे को स्तनपान करा सकती हैं।

पहले 6 महीने सिर्फ मां का दूध ही क्यों जरूरी है?

डॉक्टरों के अनुसार, जन्म के बाद पहले 6 महीने तक शिशु को केवल मां का दूध (Exclusive Breastfeeding) ही देना चाहिए। इस दौरान बच्चे को पानी, शहद, घुट्टी या कोई अन्य खाद्य पदार्थ देने की आवश्यकता नहीं होती। मां का दूध शिशु के लिए संपूर्ण आहार होता है। इसमें मौजूद पोषक तत्व, एंटीबॉडी और आवश्यक विटामिन बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने के साथ उसके शारीरिक और मानसिक विकास में अहम भूमिका निभाते हैं।

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सिजेरियन डिलीवरी के बाद भी स्तनपान कराया जा सकता है

कई महिलाओं को यह चिंता रहती है कि यदि उनकी सिजेरियन (सी-सेक्शन) डिलीवरी हुई है तो क्या वे स्तनपान करा पाएंगी। विशेषज्ञ बताते हैं कि नॉर्मल डिलीवरी के बाद जन्म के पहले घंटे में ही स्तनपान शुरू कराने की सलाह दी जाती है। वहीं, सिजेरियन डिलीवरी के बाद भी अधिकतर मामलों में सहायक की मदद से पहले घंटे के भीतर ही स्तनपान शुरू कराया जा सकता है। दो से तीन दिनों के भीतर दूध पर्याप्त मात्रा में आने लगता है और शिशु भी आसानी से दूध पीना सीख जाता है।
इसलिए सिजेरियन डिलीवरी को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।

कामकाजी महिलाएं कैसे जारी रखें स्तनपान?

कामकाजी महिलाओं के लिए भी स्तनपान पूरी तरह संभव है। मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) के दौरान वे नियमित रूप से बच्चे को दूध पिला सकती हैं। इसके अलावा मां का दूध निकालकर स्वच्छ तरीके से स्टोर किया जा सकता है, जिसे बाद में शिशु को सुरक्षित रूप से दिया जा सकता है। जिन शहरों में ब्रेस्ट मिल्क बैंक (Breast Milk Bank) की सुविधा उपलब्ध है, वहां महिलाएं जरूरतमंद नवजातों के लिए दूध दान भी कर सकती हैं।

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स्तनपान से शिशु को मिलने वाले फायदे

शिशु को संपूर्ण और संतुलित पोषण मिलता है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।
संक्रमण और कई गंभीर बीमारियों का खतरा कम होता है।
मस्तिष्क और शारीरिक विकास बेहतर होता है।
पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है।
मां और बच्चे के बीच भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होता है।

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स्तनपान से मां को भी मिलते हैं कई स्वास्थ्य लाभ

स्तनपान सिर्फ बच्चे के लिए ही नहीं, बल्कि मां के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद है।
विशेषज्ञों के अनुसार नियमित स्तनपान कराने से
स्तन कैंसर का खतरा कम हो सकता है।
अंडाशय (ओवरी) के कैंसर का जोखिम घट सकता है।
टाइप-2 डायबिटीज का खतरा कम हो सकता है।
उच्च रक्तचाप और हृदय रोग का जोखिम घट सकता है।
हड्डियों के स्वास्थ्य को लाभ मिल सकता है।
प्रसव के बाद शरीर को सामान्य स्थिति में लौटने में मदद मिलती है।
मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य बेहतर होता है।

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क्या मातृत्व अवसाद (Postpartum Depression) में भी स्तनपान कराया जा सकता है?

हां। यदि किसी महिला को प्रसव के बाद मातृत्व अवसाद (पोस्टपार्टम डिप्रेशन) हो, तब भी अधिकांश मामलों में वह स्तनपान जारी रख सकती है। हालांकि, इस दौरान परिवार का सहयोग, भावनात्मक समर्थन और डॉक्टर की सलाह बेहद जरूरी होती है। स्तनपान मां और शिशु के बीच भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाने में भी मदद करता है, जिससे मां को मानसिक रूप से मजबूती मिल सकती है।

स्तनपान क्यों है सबसे जरूरी?

विशेषज्ञों का मानना है कि मां का दूध हर नवजात का अधिकार है। यह शिशु के लिए सबसे सुरक्षित, प्राकृतिक और संपूर्ण आहार है। स्तनपान केवल बच्चे का पेट भरने का माध्यम नहीं, बल्कि मां और बच्चे के बीच जीवनभर के रिश्ते की मजबूत शुरुआत भी है। इसलिए हर मां को जन्म के पहले घंटे से ही स्तनपान शुरू करने और पहले छह महीने तक केवल मां का दूध पिलाने का प्रयास करना चाहिए।

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भारत में स्तनपान की स्थिति (NFHS-5 के अनुसार)

करीब 48% शिशुओं को जन्म से लेकर पहले 6 महीने तक केवल मां का दूध मिल पाता है।
करीब 42% नवजातों को जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान कराया जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक माताएं पहले छह महीने तक केवल स्तनपान कराएं, ताकि बच्चों का बेहतर विकास सुनिश्चित किया जा सके।

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सिर्फ छह महीने तक केवल स्तनपान कराने का संकल्प आपके बच्चे को जीवनभर बेहतर स्वास्थ्य की मजबूत नींव दे सकता है। वहीं, इससे मां को भी कई गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है। सही जानकारी, परिवार का सहयोग और विशेषज्ञों की सलाह के साथ हर मां अपने बच्चे को स्वस्थ शुरुआत दे सकती है।

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