नारी डेस्क : बारिश के मौसम में मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है और इनके काटने से डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। डेंगू होने पर घबराने के बजाय मरीज की सही देखभाल, पर्याप्त आराम, हाइड्रेशन और डॉक्टर की सलाह का पालन करना बेहद जरूरी है। इस दौरान खान-पान पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि शरीर में कमजोरी और पानी की कमी न हो। अगर आपके आसपास कोई व्यक्ति डेंगू से जूझ रहा है, तो उसकी देखभाल करते समय इन जरूरी बातों का ध्यान रखें, ताकि वह सुरक्षित तरीके से जल्द रिकवर कर सके।
शरीर को हाइड्रेटेड रखें
डेंगू में बुखार, उल्टी या कम खाना-पीना शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी कर सकता है। इसलिए पर्याप्त मात्रा में तरल लेना जरूरी है। पानी के साथ ORS, नारियल पानी, सूप और अन्य इलेक्ट्रोलाइट युक्त तरल लिए जा सकते हैं। WHO की गाइडलाइन में भी डेंगू के दौरान पर्याप्त तरल और ORS लेने की सलाह दी गई है। हालांकि, कितनी मात्रा में तरल लेना है यह मरीज की उम्र, वजन, उल्टी, पेशाब और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं पर निर्भर करता है। किडनी या हृदय की बीमारी वाले मरीज डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही तरल की मात्रा तय करें।

प्लेटलेट्स (Platelets) को लेकर न करें ये गलती
डेंगू के दौरान प्लेटलेट्स कम हो सकते हैं, लेकिन सिर्फ प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए किसी एक घरेलू नुस्खे पर निर्भर रहना सही नहीं है। पपीते के पत्ते का रस, गिलोय, कीवी या अनार को प्लेटलेट्स तेजी से बढ़ाने का प्रमाणित इलाज मानने के पर्याप्त सबूत नहीं हैं। डेंगू में डॉक्टर मरीज की स्थिति, प्लेटलेट्स, हेमाटोक्रिट और दूसरे जरूरी पैरामीटर की निगरानी करते हैं। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के किसी हर्बल जूस या सप्लीमेंट को इलाज का विकल्प न बनाएं।
हल्का और पौष्टिक खाना लें
डेंगू के दौरान भूख कम लग सकती है और पाचन तंत्र भी संवेदनशील हो सकता है। ऐसे में आसानी से पचने वाला भोजन लेना बेहतर रहता है।
जैसे की मूंग दाल की खिचड़ी
दलिया, दाल और चावल
हल्की पकी सब्जियां और सूप
केला और अन्य आसानी से पचने वाले फल
डॉक्टर की सलाह के अनुसार पर्याप्त तरल पदार्थ
भोजन की मात्रा कम हो तो दिन में कई बार थोड़ा-थोड़ा खाना लिया जा सकता है।

दवाओं में बरतें खास सावधानी
डेंगू में बुखार और बदन दर्द के लिए पैरासिटामोल का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के अनुसार किया जा सकता है। लेकिन एस्पिरिन, आइबुप्रोफेन और अन्य NSAIDs से बचना चाहिए, क्योंकि इनसे ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक, स्टेरॉयड या दूसरी दर्द निवारक दवाएं न लें।
सिर्फ प्लेटलेट्स (Platelets) नहीं, इन लक्षणों पर भी रखें नजर
डेंगू में बीमारी के 3 से 7वें दिन के आसपास, बुखार कम होने के समय भी गंभीर लक्षण सामने आ सकते हैं।
इसलिए बुखार उतरना हमेशा पूरी तरह ठीक होने का संकेत नहीं होता।
इन संकेतों को नजरअंदाज न करें
पेट में तेज दर्द या लगातार दर्द
बार-बार उल्टी
नाक या मसूड़ों से खून आना
उल्टी या मल में खून आना
तेज या मुश्किल से सांस लेना
अत्यधिक कमजोरी, बेचैनी या सुस्ती
त्वचा का पीला, ठंडा या चिपचिपा होना
बहुत ज्यादा प्यास लगना या पेशाब कम होना
इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर या नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें।

भरपूर आराम करें और मच्छरों से बचें
डेंगू के दौरान पर्याप्त आराम करना जरूरी है। साथ ही मरीज को मच्छरों से बचाना भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि संक्रमित व्यक्ति को काटने के बाद मच्छर दूसरे लोगों तक वायरस पहुंचा सकता है। मच्छरदानी, रिपेलेंट और घर के आसपास जमा पानी को हटाने जैसे उपाय अपनाएं।
नोट : डेंगू में प्लेटलेट्स की संख्या अकेले बीमारी की गंभीरता तय नहीं करती। मरीज की पूरी स्थिति और डॉक्टर की जांच ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसलिए घरेलू नुस्खों के भरोसे इलाज में देरी न करें और डॉक्टर द्वारा बताई गई जांच व निगरानी का पालन करें।