नारी डेस्क : फिल्म 'गजनी' और 'लगान' जैसी सुपरहिट फिल्मों में अपने दमदार अभिनय से पहचान बनाने वाले अभिनेता प्रदीप रावत का 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके बिजनेस मैनेजर के मुताबिक, वह पिछले करीब पांच वर्षों से ब्लड कैंसर (Blood Cancer) से जूझ रहे थे। कुछ समय पहले उनकी हालत में सुधार हुआ था, लेकिन कैंसर दोबारा लौट आया और लंबे इलाज के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन के बाद एक बार फिर ब्लड कैंसर को लेकर लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं। आइए जानते हैं कि ब्लड कैंसर क्या है, इसके लक्षण, कारण और इलाज क्या हैं।
क्या है ब्लड कैंसर (Blood Cancer) ?
ब्लड कैंसर एक गंभीर बीमारी है, जिसमें शरीर में खून बनाने वाली कोशिकाओं (Blood Cells) की सामान्य प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है। यह बीमारी मुख्य रूप से बोन मैरो (Bone Marrow) यानी हड्डियों के अंदर मौजूद स्पंजी ऊतक से शुरू होती है, जहां नई रक्त कोशिकाएं बनती हैं। स्वस्थ शरीर में बोन मैरो से बनने वाली स्टेम सेल्स आगे चलकर तीन प्रकार की कोशिकाओं में बदलती हैं।

रेड ब्लड सेल्स (RBC): शरीर के विभिन्न अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाती हैं।
व्हाइट ब्लड सेल्स (WBC): संक्रमण और बीमारियों से शरीर की रक्षा करती हैं।
प्लेटलेट्स: खून का बहाव रोकने और घाव भरने में मदद करती हैं।
ब्लड कैंसर होने पर असामान्य कोशिकाएं तेजी से बढ़ने लगती हैं और स्वस्थ रक्त कोशिकाओं की जगह ले लेती हैं। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और अन्य जरूरी कार्य प्रभावित होने लगते हैं।
ब्लड कैंसर कितने प्रकार का होता है?
विशेषज्ञों के अनुसार ब्लड कैंसर मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है।
ल्यूकेमिया (Leukemia): यह बोन मैरो में शुरू होता है। इसमें असामान्य व्हाइट ब्लड सेल्स तेजी से बनने लगते हैं और सामान्य कोशिकाओं के काम में बाधा डालते हैं।
लिम्फोमा (Lymphoma): यह शरीर के लिम्फेटिक सिस्टम को प्रभावित करता है। इसकी शुरुआत लिम्फोसाइट्स नामक व्हाइट ब्लड सेल्स से होती है। इसके दो प्रमुख प्रकार हैं। हॉजकिन लिम्फोमा और नॉन-हॉजकिन लिम्फोमा।
मल्टीपल मायलोमा (Multiple Myeloma): यह बोन मैरो में मौजूद प्लाज्मा सेल्स को प्रभावित करता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं।
ब्लड कैंसर के शुरुआती लक्षण
ब्लड कैंसर के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ सामान्य संकेत इस प्रकार हैं
लगातार थकान और कमजोरी
बार-बार बुखार या संक्रमण होना
रात में अत्यधिक पसीना आना
बिना वजह तेजी से वजन घटना
सांस फूलना, गर्दन, बगल या जांघ में लिम्फ नोड्स में सूजन
हड्डियों और जोड़ों में दर्द
त्वचा पर आसानी से नीले निशान पड़ना
बार-बार या असामान्य ब्लीडिंग होना
त्वचा पर लाल या बैंगनी रंग के छोटे-छोटे धब्बे दिखाई देना
लिवर या स्प्लीन का बढ़ जाना।

ब्लड कैंसर क्यों होता है?
ब्लड कैंसर तब शुरू होता है जब रक्त कोशिकाओं के डीएनए (DNA) में बदलाव (Mutation) होने लगता है। इसके कारण असामान्य कोशिकाएं तेजी से बढ़ने लगती हैं और स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं।
जोखिम बढ़ाने वाले कारण
बढ़ती उम्र, धूम्रपान या सेकेंड हैंड स्मोक
बेंजीन और फॉर्मल्डिहाइड जैसे रसायनों के लंबे समय तक संपर्क में रहना
पहले कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी लेना
कुछ आनुवंशिक (Genetic) बीमारियां
कुछ मामलों में पारिवारिक इतिहास भी होता है।
ब्लड कैंसर की जांच कैसे होती है?
ब्लड कैंसर की पुष्टि के लिए डॉक्टर कई तरह की जांच कर सकते हैं।
CBC (Complete Blood Count)
ब्लड केमिस्ट्री टेस्ट
बोन मैरो बायोप्सी
CT Scan
MRI Scan
PET Scan
जेनेटिक और मॉलिक्यूलर टेस्ट
इन जांचों से कैंसर के प्रकार और उसकी गंभीरता का पता लगाया जाता है।

ब्लड कैंसर का इलाज
इलाज मरीज की उम्र, कैंसर के प्रकार और उसकी स्टेज पर निर्भर करता है। प्रमुख उपचारों में शामिल हैं
कीमोथेरेपी (Chemotherapy)
रेडिएशन थेरेपी (Radiation Therapy)
इम्यूनोथेरेपी (Immunotherapy)
टारगेटेड थेरेपी (Targeted Therapy)
CAR-T Cell Therapy (कुछ विशेष मामलों में)
स्टेम सेल या बोन मैरो ट्रांसप्लांट
समय पर पहचान और सही इलाज से कई मरीज लंबे समय तक सामान्य जीवन जी सकते हैं।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
यदि लगातार कई सप्ताह तक थकान, बुखार, रात में अत्यधिक पसीना, वजन घटना, बार-बार संक्रमण, शरीर पर नीले निशान या असामान्य ब्लीडिंग जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इन्हें नजरअंदाज न करें। शुरुआती जांच और समय पर इलाज से बेहतर परिणाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
नोट: ये लक्षण अन्य बीमारियों में भी हो सकते हैं। यदि ये समस्याएं लगातार कई सप्ताह तक बनी रहें, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।