नारी डेस्क: अक्सर लोग सोचते हैं कि शुगर की बीमारी का मतलब सिर्फ ब्लड शुगर का बढ़ जाना है, लेकिन शुगर का बहुत कम हो जाना भी उतना ही खतरनाक हो सकता है। जब खून में ग्लूकोज का स्तर 70 mg/dL से नीचे चला जाता है, तो इसे लो ब्लड शुगर या हाइपोग्लाइसीमिया कहा जाता है। अगर यह स्तर 40–50 mg/dL तक गिर जाए, तो यह आपातकालीन स्थिति बन सकती है। ग्लूकोज हमारे शरीर और खासकर दिमाग के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत है, इसलिए इसकी कमी का सीधा असर दिमाग पर पड़ता है।
दिमाग पर क्या असर पड़ता है?
दिमाग को लगातार काम करने के लिए ग्लूकोज की जरूरत होती है। जब शरीर में शुगर कम हो जाती है, तो दिमाग को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती। इससे सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। व्यक्ति को भ्रम, कमजोरी या चक्कर जैसा महसूस हो सकता है। गंभीर स्थिति में दिमाग को नुकसान भी पहुंच सकता है, बेहोशी आ सकती है या दौरे पड़ सकते हैं।

लो शुगर के शुरुआती लक्षण
लो शुगर होने पर शरीर पहले ही संकेत देने लगता है। व्यक्ति को अचानक पसीना आ सकता है, हाथ कांप सकते हैं, दिल की धड़कन तेज हो सकती है या घबराहट महसूस हो सकती है। तेज भूख लगना, कमजोरी महसूस होना और ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत भी आम लक्षण हैं। कई बार आंखों के सामने धुंधलापन भी आ जाता है। इन संकेतों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
यह स्थिति किन लोगों में ज्यादा होती है?
लो ब्लड शुगर की समस्या खासतौर पर डायबिटीज के मरीजों में ज्यादा देखी जाती है, खासकर जो इंसुलिन या शुगर कम करने वाली दवाएं लेते हैं। अगर दवा लेने के बाद समय पर खाना न खाया जाए, ज्यादा व्यायाम कर लिया जाए या भोजन छोड़ दिया जाए, तो शुगर अचानक गिर सकती है। लंबे समय तक उपवास करना, अनियमित खान-पान और मानसिक तनाव भी इसका कारण बन सकते हैं।
हाई शुगर से ज्यादा खतरनाक क्यों?
हाई शुगर शरीर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाती है, लेकिन लो शुगर अचानक गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है। यह कुछ ही मिनटों में व्यक्ति को बेहोश कर सकती है। अगर समय पर मदद न मिले तो जान का खतरा भी हो सकता है। इसलिए दोनों ही स्थितियों को गंभीरता से लेना जरूरी है।
लो शुगर होने पर क्या करें?
अगर किसी को लो शुगर के लक्षण महसूस हों, तो तुरंत मीठा देना चाहिए। एक-दो चम्मच चीनी पानी में घोलकर देना, ग्लूकोज पाउडर, मीठा जूस या टॉफी देना मददगार हो सकता है। लगभग 15 मिनट बाद दोबारा स्थिति जांचनी चाहिए। अगर व्यक्ति बेहोश हो जाए तो मुंह में कुछ भी न डालें और तुरंत अस्पताल ले जाएं।

शुगर संतुलित रखने के उपाय
शरीर में शुगर संतुलित रखने के लिए नियमित और संतुलित भोजन जरूरी है। लंबे समय तक खाली पेट न रहें और हर 2–3 घंटे में थोड़ा-थोड़ा खाएं। भोजन में कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन दोनों शामिल करें, जैसे दाल-रोटी, दूध-दलिया या मूंगफली के साथ थोड़ा गुड़। खजूर या किशमिश सीमित मात्रा में लेने से भी ऊर्जा बनी रहती है। हालांकि, डायबिटीज के मरीज किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
शुगर की समस्या सिर्फ हाई ब्लड शुगर तक सीमित नहीं है। लो ब्लड शुगर भी उतनी ही गंभीर और खतरनाक हो सकती है। छोटी सी लापरवाही, जैसे समय पर खाना न खाना या दवा की गलत मात्रा लेना, बड़ी समस्या खड़ी कर सकती है। इसलिए अपने शरीर के संकेतों को समझें, नियमित जांच कराएं और संतुलित जीवनशैली अपनाएं। यही स्वस्थ रहने की कुंजी है।