
नारी डेस्क : महिलाओं में होने वाली गंभीर बीमारियों में से एक है Uterine Cancer, जिसे आम भाषा में बच्चेदानी का कैंसर भी कहा जाता है। इस बीमारी में गर्भाशय (Uterus) के अंदर असामान्य कोशिकाएं तेजी से बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर का रूप ले सकती हैं। कई बार महिलाएं इसके शुरुआती लक्षणों को सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे बीमारी आगे बढ़ सकती है। इसलिए जरूरी है कि समय रहते इसके संकेतों को पहचान लिया जाए और डॉक्टर से जांच करवाई जाए।
बच्चेदानी के कैंसर के लक्षण (Uterus Cancer Symptoms)
अगर किसी महिला को नीचे दिए गए लक्षण लगातार महसूस हों, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।
अत्यधिक या असामान्य ब्लीडिंग: पीरियड्स खत्म होने के बाद या दो पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग होना।
बार-बार पीरियड्स आना: एक पीरियड खत्म होने के तुरंत बाद दूसरा शुरू हो जाना।
असामान्य वाइट डिस्चार्ज: पानी जैसा डिस्चार्ज या उसमें बदबू आना।

बिना वजह वजन कम होन: बिना डाइट या एक्सरसाइज के वजन तेजी से कम होना।
पेट या पेल्विक एरिया में दर्द: पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द या भारीपन महसूस होना।
पेशाब और मल में बदलाव: पेशाब का रंग बदलना, बहुत ज्यादा या बहुत कम पेशाब आना।
इन लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
बच्चेदानी के कैंसर के कारण
कुछ ऐसी स्थितियां होती हैं जिनमें इस बीमारी का खतरा बढ़ सकता है।
मेनोपॉज के बाद उम्र बढ़ना और कभी गर्भधारण न करना।
परिवार में ओवेरियन या यूट्रस कैंसर का इतिहास होना
हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज होना।
Polycystic Ovary Syndrome (PCOS)
पहले किसी अन्य कैंसर के लिए रेडिएशन थेरेपी लेना।

बच्चेदानी के कैंसर का पता कैसे चलता है
डॉक्टर कई तरह की जांचों के जरिए इस बीमारी का पता लगाते हैं।
फिजिकल और पेल्विक जांच में।
पेल्विक अल्ट्रासाउंड और ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड जांच में।
एंडोमेट्रियल बायोप्सी और हिस्टेरोस्कोपी बायोप्सी टेस्ट
ब्लड और यूरिन टेस्ट।

अगर कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों तक फैलने की आशंका हो, तो डॉक्टर ये जांच भी करवाते हैं
एक्स-रे और सीटी स्कैन (CT Scan) कराएं।
एमआरआई (MRI) और पीईटी स्कैन (PET Scan)
बच्चेदानी का कैंसर एक गंभीर बीमारी है, लेकिन अगर इसके शुरुआती लक्षणों को समय पर पहचान लिया जाए तो इलाज की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसलिए महिलाओं को अपने शरीर में होने वाले किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय रहते डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।