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2 दिन के बच्चे की पीठ पर सूजन, डॉक्टर ने बताया Pregnancy में इस गलती की वजह से हुआ

  • Edited By Monika,
  • Updated: 22 May, 2026 01:28 PM
2 दिन के बच्चे की पीठ पर सूजन, डॉक्टर ने बताया Pregnancy में इस गलती की वजह से हुआ

नारी डेस्क : अक्सर नवजात शिशुओं में कुछ न कुछ सेहत संबंधी समस्याएं देखने को मिल जाती हैं, लेकिन जन्म से ही शरीर के किसी हिस्से में सूजन दिखना एक गंभीर और दुर्लभ स्थिति हो सकती है। ऐसा ही एक मामला हाल ही में सामने आया, जहां एक घबराई हुई मां अपने 2 दिन के नवजात बच्चे को लेकर अस्पताल पहुंची। बच्चे की पीठ पर जन्म से ही सूजन दिखाई दे रही थी, जिसे देखकर परिवार बेहद चिंतित हो गया। जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि यह मामला Meningomyelocele का है, जो एक गंभीर जन्मजात न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट माना जाता है।

कैसे बच्चे की पीठ पर सूजन हुई

डॉक्टर के अनुसार, बच्चे की पीठ पर मौजूद सूजन कोई सामान्य समस्या नहीं थी, बल्कि यह जन्म से जुड़ी गंभीर स्थिति थी। यह समस्या तब होती है जब गर्भावस्था के दौरान शिशु की रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क का विकास पूरी तरह सही तरीके से नहीं हो पाता।

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क्या है Meningomyelocele?

Meningomyelocele एक ऐसी जन्मजात स्थिति है, जिसमें बच्चे की रीढ़ की हड्डी पूरी तरह बंद नहीं हो पाती और नसें बाहर की ओर उभर सकती हैं। यह स्थिति न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट्स (Neural Tube Defects - NTDs) के अंतर्गत आती है और बच्चे के शारीरिक विकास पर गंभीर असर डाल सकती है। चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह की समस्या का एक बड़ा कारण गर्भावस्था के शुरुआती समय में फोलिक एसिड (Folic Acid) की कमी हो सकता है। फोलिक एसिड की पर्याप्त मात्रा न लेने से बच्चे में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट का खतरा बढ़ जाता है। आमतौर पर फोलिक एसिड को प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले और शुरुआती तीन महीनों तक लेना बेहद जरूरी माना जाता है।

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समय पर जांच न होना भी बड़ी वजह

डॉक्टरों ने यह भी बताया कि कई बार नियमित प्रेग्नेंसी जांच और अल्ट्रासाउंड स्कैन न कराने से ऐसी समस्याएं समय पर पकड़ में नहीं आतीं। यदि 5वें महीने के आसपास होने वाला एनोमली स्कैन (Anomaly scan) समय पर कराया जाए, तो कई जन्मजात समस्याओं का पता पहले ही चल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान सभी जरूरी जांचें जैसे एनोमली स्कैन, NT और NB स्कैन समय पर कराना बेहद जरूरी है। इससे न केवल बच्चे के विकास की जानकारी मिलती है, बल्कि किसी भी गंभीर स्थिति का समय रहते इलाज हो पाता है।
 

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