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"साफ घर में नहीं आते मच्छर..."  मां- बाप की इन गलतफहमी के कारण ही बच्चों को होता है Dengue

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 26 Jun, 2026 10:32 AM

नारी डेस्क: हर साल मानसून के साथ-साथ एक अनचाहा मेहमान भी आता है जिसका नाम है डेंगू। पूरे भारत में बारिश के मौसम के दौरान और उसके बाद डेंगू के मामले तेज़ी से बढ़ते हैं, इसलिए जागरूकता उतनी ही जरूरी है जितनी कि बारिश के बचने के लिए छतरियां और रेनकोट। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, पिछले दो दशकों में दुनिया भर में डेंगू के मामलों में भारी बढ़ोतरी हुई है और भारत उन देशों में शामिल है जहां इसका सबसे ज़्यादा असर है। डेंगू के लिए अभी भी कोई खास एंटीवायरल इलाज नहीं है, इसलिए इससे बचाव और समय पर देखभाल ही सबसे मज़बूत उपाय हैं।

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बारिश के बीना भी पनपते हैं मच्छर

टाइम्स ऑफ इंडिया के एक आर्टिकल में डॉक्टर की तरफ से बताया गया कि  एक संक्रमण जिसके बारे में  हर माता- पिता को खास तौर पर सावधान रहने की जरूरत है, वह है डेंगू। डॉक्टर कहते हैं- "कम बारिश देखकर धोखा न खाएं, डेंगू का खतरा अब भी ज़्यादा हो सकता है। पहले हुए प्रकोपों ​​से पता चला है कि गर्म और उमस भरे दिनों में होने वाली मध्यम बारिश, कभी-कभी भारी बारिश की तुलना में डेंगू फैलाने वाले मच्छरों के पनपने के लिए ज़्यादा अनुकूल हालात बना सकती है।" ज़ोरदार बारिश से मच्छर के लार्वा बह सकते हैं, लेकिन पानी के छोटे-छोटे जमाव जो कई दिनों तक ऐसे ही पड़े रहते हैं, वे एडीज़ मच्छरों के पनपने के लिए आदर्श जगह बन जाते हैं। यहां तक कि किसी भूली-बिसरी बाल्टी या गमले की ट्रे में जमा पानी भी मच्छरों के पनपने की जगह बन सकता है।


साफ घरों में भी रहते हैं मच्छर

इस बात को समझों कि बारिश कम हो या ज़्यादा, पूरे मौसम में डेंगू से बचाव के उपाय करते रहना चाहिए। सबसे साफ़-सुथरे घरों में भी मच्छर पनपने की जगहें हो सकती हैं। डेंगू के बारे में एक बड़ी गलतफ़हमी यह है कि मच्छर सिर्फ़ गंदी जगहों पर ही पनपते हैं। असल में, एडीज़ मच्छर साफ और रुके हुए पानी में पनपना ज़्यादा पसंद करते हैं। माता-पिता को उन जगहों पर भी ध्यान देना चाहिए जिनकी सफ़ाई अक्सर छूट जाती है जैसे- गमलों की ट्रे, वाटर कूलर, पालतू जानवरों के पानी के बर्तन, पक्षियों के दाना-पानी के बर्तन, AC के आउटलेट पाइप, छत और बंद नालियां।  घर का पूरी तरह साफ़ होना सुरक्षा की गारंटी नहीं है। मच्छर गेट, अपार्टमेंट टावर या इलाके के रसूख की परवाह नहीं करते। बच्चों का सामना स्कूलों, पार्कों या डे-केयर सेंटरों में भी मच्छरों से हो सकता है। घर की सफ़ाई जितनी ज़रूरी है, उतनी ही ज़रूरी है आस-पड़ोस में भी सावधानी बरतना।

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इन लक्षणों पर रखें नजर

माता-पिता अक्सर बच्चो के बुखार को "सीज़नल वायरल इन्फेक्शन" समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन शुरुआती दौर में डेंगू और आम वायरल बीमारियों के लक्षण एक जैसे हो सकते हैं।  अगर बुखार लगातार बना रहे या तेज़ हो, तो डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए। इसके लक्षण हैं : तेज़ बुखार, शरीर में दर्द, जोरदार सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, रैश (त्वचा पर चकत्ते), कमज़ोरी और थकान, कुछ बच्चों में असामान्य चिड़चिड़ापन, उल्टी और पेट दर्द भी हो सकता है। जल्दी पता चलने से डॉक्टर बीमारी पर बारीकी से नज़र रख पाते हैं और गंभीर स्थिति बनने से पहले ही जटिलताओं की पहचान कर पाते हैं। 


 पर्याप्त आराम ही है सही देखभाल

डेंगू का सबसे बड़ा इलाज है  खूब सारे तरल पदार्थ (fluids) लेना, पर्याप्त आराम करना, नियमित मेडिकल निगरानी, हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स से समय पर सलाह लेना।  हाइड्रेशन ज़रूरी है क्योंकि डेंगू में शरीर से बहुत ज़्यादा तरल पदार्थ निकल सकता है। पानी, सूप, दूध, नारियल पानी और ताज़े जूस तरल पदार्थों का स्तर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। कभी-कभी ख़तरा तब शुरू होता है जब बुखार उतर जाता है। शायद डेंगू के बारे में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि गंभीर स्थिति अक्सर तब आती है जब माता-पिता को लगता है कि बच्चा ठीक हो रहा है। अगर बच्चे में ये लक्षण दिखें तो तुरंत मेडिकल मदद लें जैसे- लगातार उल्टी होना, पेट में तेज़ दर्द, मसूड़ों या नाक से खून आना, त्वचा पर लाल धब्बे, उल्टी या मल में खून आना, बहुत ज़्यादा कमज़ोरी या नींद आना, सांस लेने में तकलीफ, बहुत ज़्यादा प्यास लगना, त्वचा का पीला, ठंडा और चिपचिपा होना इन चेतावनी संकेतों की जल्दी पहचान से बड़ा खतरा टल सकता है।  
 

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