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एकलौता मंदिर जहां लेटे हुए हनुमान जी की होती है पूजा, यहां अकबर ने भी मननी थी अपनी हार

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 19 May, 2026 09:33 AM
एकलौता मंदिर जहां लेटे हुए हनुमान जी की होती है पूजा, यहां अकबर ने भी मननी थी अपनी हार

नारी डेस्क:  देशभर में हनुमान जी के प्राचीन और सिद्धपीठ हनुमान मंदिरों हैं। भक्त संकट से मुक्ति पाने के लिए मंगलवारको  हनुमानजी की विशेष पूजा-अर्चना व सिंदूर व चोला अर्पित करते हैं। आज हम ऐसे हनुमान मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जहां बजरंगबली के मात्र दर्शन करने से ही सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और ग्रह-नक्षत्र का अशुभ प्रभाव भी खत्म हो जाता है। यहां हनुमान जी के दर्शन के बिना संगम स्नान भी अधूरा माना जाता है। 

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20 फीट लंबी है हनुमान जी की प्रतिमा

 दुनिया में एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां बजरंगबली की प्रतिमा लेटी हुई (शयन) अवस्था में है। यह मंदिर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (इलाहाबाद) में त्रिवेणी संगम और ऐतिहासिक प्रयागराज किले के पास स्थित है। यहां हनुमान जी की विशाल प्रतिमा है जो लगभग 20 फीट लंबी है, जो थोड़ी ज़मीन के नीचे गर्भगृह में स्थित है। मान्यता है कि लंका विजय के बाद जब हनुमान जी अत्यधिक थक गए थे, तो माता सीता के कहने पर उन्होंने इसी स्थान पर विश्राम (लेटकर) किया था।


बेहद चमत्कारी है ये मंदिर

मंदिर के पास मकड़ी नाम का रहस्यमयी कुंड भी स्थित है। इस कुंड में स्नान करने से जीवन के सारे कष्ट मिट जाते हैं। भक्त हनुमान जी के दर्शन से पहले इस कुंड में स्नान करते हैं और पवित्र जल को अपने साथ घर भी लेकर आते हैं। माना जाता है कि पुरातत्व विभाग ने खुदाई के जरिए प्रतिमा का ओर-छोर पता लगाने की कोशिश की थी, लेकिन खुदाई के दौरान हनुमान जी के दाहिने पैर का अंत नहीं मिला। यही कारण है कि प्रतिमा को चमत्कारी माना जाता है। गर्भगृह में मौजूद प्रतिमा के दर्शन करने के बाद भक्त परिक्रमा लगाते हैं और परिसर में मौजूद पेड़ पर घंटियां भी बांधते हैं।

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व्यापारी ने बनाया ये मंदिर

वहीं एक दूसरी  कथा के अनुसार सैकड़ों वर्ष पूर्व एक धनी व्यापारी हनुमान जी की इस मूर्ति को लेकर जा रहा था, तभी उसकी नाव संगम के तट पर पहुंची और हनुमान जी की मूर्ति में यहां गिर गई। व्यापारी ने हनुमान जी की मूर्ति उठाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो सका। रात में उस व्यापारी को एक सपना आया, जिसमें हनुमान जी उसे दर्शन देते हुए कहा कि वह इस संगम पर ही रहना चाहते हैं। तब व्यापारी ने इस मूर्ति को यहीं रहने दिया।


अकबर के सपने में आए थे हनुमान जी

बताया जाता है कि जब भारत में अकबर का शासन चल रहा था, उस वक्‍त यहां मेला लगता था। यहां भक्‍तों का ऐसा सैलाब लगता था कि अकबर मूर्ति को किले में लेकर जाना चाहता था। अकबर ने मूर्ति को बाहर निकालने के लिए खुदाई भी कराई, लेकिन प्रतिमा और धंसने लग गई। उसी समय अकबर के सपने में हनुमान जी आए और उसके बाद उसे लगा कि उसे मूर्ति के साथ छेड़छाड़ नहीं करना चाहिए नहीं तो किला ढह सकता है। उसके बाद अकबर ने इस बात से तौबा कर ली।


गंगा आती है यहां हर साल 

हर साल गंगा मैया हनुमान जी को आकर स्नान कराती हैं। पुजारी बतते हैं अगर किसी साल गंगा मैया हनुमान जी को स्नान नहीं कराती हैं तो प्रयागराज ही नहीं, पूरे देश के लिए इसे अशुभ संकेत माना जाता है। यही वजह है कि हनुमान जी के गंगा जल में शयन करने के दौरान भी पूजा पाठ जारी रहता है और इसे शुभ माना जाता है। पिछले साल भी भारी बारिश के बाद गंगा और यमुना का जल गर्भ गृह में प्रवेश कर गया था, जिसे शुभ संकेत माना गया था।
 

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