नारी डेस्क: संजय दत्त की बड़ी बेटी त्रिशाला दत्त ने आठ साल की उम्र में ब्रेन ट्यूमर के कारण अपनी मं को खोने के बारे में खुलकर बात की, और बताया कि उनकी माँ के इलाज के दौरान उनके पिता संजय दत्त अमेरिका में पूरे समय क्यों नहीं रह पाए थे। हाल ही में, त्रिशाला 'Inside Thoughts Out Loud' के लेटेस्ट पॉडकास्ट एपिसोड में शामिल हुईं, जहाँ उन्होंने एक्टर संजय दत्त की बेटी के तौर पर अपनी ज़िंदगी के बारे में बात की।
बचपन से ही अकेले झेला है दर्द
त्रिशाला ने अमेरिका में बचपन में झेली गई बुलीइंग के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि यह तब शुरू हुई जब वह सिर्फ़ पांच या छह साल की थीं और इसकी मुख्य वजह उनकी भारतीय पहचान थी। उन्होंने बताया कि जब वह हाई स्कूल गईं तो हालात काफ़ी बिगड़ गए, क्योंकि लोगों को पता चलने लगा था कि वह कौन हैं और किस परिवार से आती हैं। त्रिशाला ने माना कि उनके पास सहारा देने वाला कोई नहीं था और उन्हें इस बात की कसक है कि जब मैं छोटी थी, तो काश मेरे पास बात करने के लिए कोई होता।

भारत और अमेरिका के बीच फंस गए थे संजय दत्त
त्रिशाला ने आठ साल की उम्र में अपनी मां को खोने के बारे में भी बात की और याद किया कि कैसे उनके पिता, संजय दत्त उनकी जिंदगी के उस मुश्किल दौर में भारत और अमेरिका के बीच लगातार आते-जाते रहते थे। उन्होंने कहा- "मेरी मां का निधन 1996 में हुआ था, जब मैं 8 साल की थी। उनकी मौत ब्रेन ट्यूमर की वजह से हुई थी। 1989 में उन्हें इस बीमारी का पता चला था। जब डॉक्टरों को इस बारे में पता चला तब तक यह ग्रेड 4 तक पहुंच चुका था। पापा अपना समय भारत और अमेरिका के बीच बांट रहे थे। वह लगातार दोनों जगहों के बीच आते-जाते रहते थे, क्योंकि उन्हें काम करना होता था। उनके लिए मां के पूरे इलाज के दौरान यहां रुकना और साथ ही भारत में एक एक्टर के तौर पर काम करना, दोनों ही बहुत मुश्किल था,"।
अंदरूनी संघर्ष पर भी की बात
बातचीत के दौरान, त्रिशाला से उस सबसे बड़ी गलतफहमी के बारे में पूछा गया जो लोगों के मन में उनके बारे में है। इस पर उन्होंने बताया कि लोगों को लगता है कि उनका जन्म "चांदी की चम्मच" लेकर हुआ था। हालांकि वह इस बात को मानती हैं, लेकिन साथ ही यह भी कहती हैं कि उनके जीवन में भी कई "काले बादल" छाए रहे। उन्होंने कहा- "मैंने कई तूफानों और बहुत सारे काले बादलों का सामना किया है। आज मैं जिस मुकाम पर हूं, वहां तक पहुंचने के लिए मुझे बहुत मेहनत करनी पड़ी है। हर किसी की तरह, मेरे भी अपने अंदरूनी संघर्ष हैं। मैं कोई परफेक्ट इंसान नहीं हूं, और मैं थेरेपिस्ट इसलिए बनी ताकि लोगों को यह बता सकूं कि संघर्ष करना कोई बुरी बात नहीं है। आपको हमेशा हर चीज पर पूरी तरह से कंट्रोल रखने की ज़रूरत नहीं है, और इस सफ़र में आप अकेले नहीं हैं।"

बॉलीवुड से दूर रही संजय दत्त की बेटी
त्रिशाला का जन्म 1988 में संजय दत्त और उनकी पहली पत्नी, ऋचा शर्मा के यहां हुआ था। उनकी मां का निधन 1996 में ब्रेन ट्यूमर के कारण हो गया था। इस दुखद घटना के बाद, उनका पालन-पोषण संयुक्त राज्य अमेरिका में उनके नाना-नानी ने किया। आम तौर पर लोगों की नज़रों से दूर रहते हुए, उन्होंने जान-बूझकर खुद को बॉलीवुड की चकाचौंध से अलग रखा। इन वर्षों में, उन्होंने अपनी शर्तों पर अपना जीवन और करियर बनाया है, और अमेरिका में एक मनोचिकित्सक के रूप में अपनी पहचान बनाई है, जहां उनका मुख्य ज़ोर शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य की वकालत पर है।