नारी डेस्क : पिछले कुछ सालों में मैंने सैकडों महिलाओं से बात की है, और एक बात हर बार दोहराई गई मेनोपॉज के दौरान सबसे मुश्किल हिस्सा हॉट फ्लैशेज या नींद न आना नहीं था, बल्कि यह एहसास था कि "कोई समझ नहीं रहा। मुझे आज भी वो दिन याद है जब मेरी एक करीबी दोस्त ने मुझसे कहा था, "मुझे लगता है जैसे मैं किसी अनजान कमरे में अकेली खडी हूं, और बाहर सब लोग अपनी जिंदगी में व्यस्त हैं।" यही वो पल था जिसने मुझे सोचने पर मजबूर किया क्यों एक ऐसा अनुभव, जो हर महिला के जीवन का हिस्सा है, इतना अकेला महसूस कराता है? मेनोपॉज़ कोच और MENOVEDA की को-फाउंडर तमन्ना सिंह ने महिलाओं के मेनोपॉज और हार्मोन असंतुलन से जुड़ी बेहद महत्वपूर्ण जानकारी महिलाओं के साथ साझा की है चलिए इसके बारे में बताते हैं।
अकेलापन कहां से आता है
मेनोपॉज सिर्फ शरीर में बदलाव नहीं है। यह भावनात्मक रूप से भी एक बडा बदलाव है। मूड स्विंग्स, चिडचिडापन, नींद की कमी, और शरीर में हो रहे बदलाव ये सब मिलकर महिला को यह महसूस कराते हैं कि वो "पहले जैसी नहीं रही।" और सबसे दुखद बात यह है कि हमारे समाज में इस विषय पर खुलकर बात ही नहीं होती। बेटियां मांओं से नहीं पूछतीं, दोस्तों के बीच भी यह टॉपिक टाला जाता है, और कई बार पति या परिवार वाले भी नहीं समझ पाते कि आखिर हो क्या रहा है। इस चुप्पी की वजह से महिलाएं अक्सर सोचती हैं कि उनके साथ ही कुछ "गलत" हो रहा है, जबकि यह एक बेहद सामान्य और प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिससे हर महिला गुजरती है।

सपोर्ट सर्कल क्यों जरूरी है
जब मैंने मेनोवेदा शुरू करने का सोचा, तो मेरा मकसद सिर्फ प्रोडक्ट्स बनाना नहीं था मैं चाहती थी कि महिलाओं को एक ऐसी जगह मिले जहां वो बिना झिझक के अपनी बात कह सकें। एक सपोर्ट सर्कल चाहे वो दोस्तों का ग्रुप हो, परिवार हो, या ऑनलाइन कम्युनिटी इस दौर को आसान बना देता है।जब महिलाएं एक-दूसरे से अपने अनुभव साझा करती हैं, तो उन्हें एहसास होता है कि वो अकेली नहीं हैं। यह छोटी सी बात बहुत बडा फर्क डालती है। सिर्फ यह जानना कि "मेरे जैसा किसी और के साथ भी हो रहा है," मानसिक बोझ को काफी हद तक हल्का कर देता है।
हम क्या कर सकते हैं
सबसे पहला कदम है बातचीत शुरू करना। घर में, दोस्तों के बीच, या ऑफिस में भी। बेटियों को अपनी मांओं से मेनोपॉज के बारे में पूछना चाहिए, पति और परिवार को इसे समझने की कोशिश करनी चाहिए, और महिलाओं को खुद भी यह मानना चाहिए कि मदद मांगना कमजोरी नहीं है।

दूसरा, सही जानकारी और सही सपोर्ट सिस्टम तक पहुंच बहुत जरूरी है। यही सोचकर मेनोवेदा ने महिलाओं के लिए ऐसे संसाधन और कम्युनिटी बनाई है, जहां वो बेझिझक अपने सवाल पूछ सकें और अनुभव साझा कर सकें। मेनोपॉज अकेलेपन की कहानी नहीं होनी चाहिए। यह वो दौर है जब महिलाओं को सबसे ज्यादा साथ और समझ की जरूरत होती है। और अगर हम मिलकर एक सपोर्टिव माहौल बना सकें, तो यह सफर मुश्किल नहीं, बल्कि सशक्त बनाने वाला बन सकता है।