
नारी डेस्क: हृदय रोग विशेषज्ञ सर्जन डॉ. राहुल चंदोला ने कहा है कि सामान्य इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी) को इस बात के प्रमाण के रूप में नहीं समझना चाहिए कि हृदय पूरी तरह से रोगमुक्त है। डॉ. चंदोला ने हालांकि कहा कि ईसीजी एक महत्वपूर्ण नैदानिक उपाय है, लेकिन केवल इसके आधार पर हृदय के समग्र स्वास्थ्य का निर्धारण नहीं किया जा सकता और न ही इससे कोरोनरी धमनियों में किसी रुकावट की पहचान की जा सकती है। कोरोनरी धमनी वे रक्त वाहिकाएं हैं, जो हृदय की मांसपेशियों को ऑक्सीजन और पोषक तत्व से युक्त खून पहुंचाती हैं।
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ईसीजी को लेकर लोगों की गलत है धारणा
'इंस्टीट्यूट ऑफ हार्ट लंग्स डिजीज रिसर्च सेंटर' (आईएचएलडी) के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक डॉ. चंदोला ने कहा कि कई लोग गलती से यह मान लेते हैं कि सामान्य ईसीजी हृदय रोग की आशंका को समाप्त कर देता है। उन्होंने कहा कि इसके कारण लोग उन लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिनके लिए चिकित्सकीय देखभाल की आवश्यकता होती है । उन्होंने कहा कि ऐसे कई मरीजों का इलाज किया है, जो दिल का दौरा पड़ने से कुछ समय पहले तक पूरी तरह स्वस्थ और शारीरिक रूप से सक्रिय दिखाई देते थे। उन्होंने कहा- ''मैंने ऐसे मरीजों को देखा है, जिन्होंने दिल का दौरा पड़ने से पहले उसी सुबह कई किलोमीटर तक दौड़ लगाई थी। वे तंदुरुस्त, सक्रिय थे और उनकी जांच रिपोर्ट सामान्य थीं। फिर भी, कुछ ही मिनटों के भीतर उनकी स्थिति में नाटकीय रूप से बदलाव आ गया।
हृदय संबंधी अनदेखी खतरनाक
'' डॉ. चंदोला ने कहा कि चुनौती केवल यह नहीं है कि लोग हृदय संबंधी स्वास्थ्य की अनदेखी करते हैं, बल्कि यह भी है कि बहुत से लोग उन संकेतों से अनजान हैं, जिनके लिए चिकित्सकीय देखभाल की आवश्यकता होती है, या फिर वे नियमित जांच के महत्व को नहीं समझते। उन्होंने बताया कि ईसीजी हृदय में विद्युत संकेतों को रिकॉर्ड करता है और यह आकलन करने में मदद करता है कि हृदय किस प्रकार काम कर रहा है, लेकिन यह कोरोनरी धमनियों में मौजूद रुकावटों या इनकी गंभीरता का पता नहीं लगा सकता। उन्होंने कहा- ''सामान्य ईसीजी न तो भविष्य में होने वाली हृदय संबंधी समस्याओं से बचाव की गारंटी है और न ही यह इस बात की पुष्टि करता है कि हृदय पूरी तरह स्वस्थ है।''
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इन लक्षणों को ना करें नजरअंदाज
डॉ. चंदोला ने कहा- कई ऐसे मरीज इलाज के लिए देर से पहुंचते हैं और बाद में याद करते हैं कि उन्हें कुछ हल्के लक्षण महसूस हुए थे, जिन्हें उन्होंने मामूली समझकर नजरअंदाज कर दिया था। उन्होंने कहा कि इन लक्षणों में सीढ़ियां चढ़ते समय हल्की सांस फूलना शामिल हो सकता है, जिसे पर्याप्त रूप से तंदुरुस्त न होना मान लिया जाता है; भारी भोजन के बाद कंधे में असहजता होना, जिसे आमतौर पर गैस या अपच समझ लिया जाता है; तेज धड़कन महसूस होना, जिसे तनाव से जुड़ा हुआ मान लिया जाता है और लगातार थकान रहना, जिसे अक्सर बढ़ती उम्र का प्रभाव समझ लिया जाता है। डॉ. चंदोला ने कहा कि ऐसे लक्षणों को समय रहते पहचानना और चिकित्सकीय सलाह लेना अधिक गंभीर जटिलताओं को रोकने में मदद कर सकता है।