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40 की उम्र के बाद शरीर देने लगता है ये संकेत, कहीं मेनोपॉज की शुरुआत तो नहीं?

  • Edited By Monika,
  • Updated: 07 Aug, 2026 01:53 PM
40 की उम्र के बाद शरीर देने लगता है ये संकेत, कहीं मेनोपॉज की शुरुआत तो नहीं?

नारी डेस्क : 40 पार करते ही महिलाओं की जिंदगी में बहुत कुछ बदलने लगता है लेकिन ज्यादातर बदलाव ऐसे होते हैं जो बाहर से दिखते नहीं। यही वजह है कि मैं इसे "अदृश्य चुनौती" कहती हूं। न कोई चोट है, न कोई साफ लक्षण जिसे उंगली उठाकर दिखाया जा सके, फिर भी शरीर के अंदर बहुत कुछ बदल रहा होता है। मेनोपॉज़ कोच और MENOVEDA की को-फाउंडर तमन्ना सिंह ने महिलाओं के मेनोपॉज और हार्मोन असंतुलन से जुड़ी बेहद महत्वपूर्ण जानकारी महिलाओं के साथ साझा की है चलिए इसके बारे में बताते हैं।

जब शरीर बदलता है, पर कोई समझा नहीं पाता

मेनोवेदा शुरु करने से पहले, जब मैं खुद अपने आसपास की महिलाओं से बात करती थी, तो एक पैटर्न बार-बार सामने आया। 40 की उम्र पार करते ही थकान बढने लगती है, वजन अचानक बढने लगता है, नींद पहले जैसी नहीं रहती, और ह‌ड्डियो में कमजोरी महसूस होने लगती है। लेकिन जब वो डॉक्टर के पास जाती, तो अक्सर उन्हें यही सुनने को मिलता "यह उम्र का असर है, चिंता मत करो। यही जवाब है जो सबसे ज्यादा तकलीफ देता है। क्योंकि यह सच है कि हार्मोनल बदलाव उम्र के साथ आते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि महिलाओं को बिना सही जानकारी और सपोर्ट के इससे अकेले जूझना चाहिए।

पेरिमेनोपॉज (Menopause) - वो दौर जो नजरअंदाज होता है

ज्यादातर लोग सोचते हैं कि मेनोपॉज अचानक आता है, लेकिन असल में इससे पहले पेरिमेनोपॉज का लंबा दौर होता है, जो कई बार सालों तक चलता है। इस दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन उतार-चढाव से गुजरते हैं, जिसका असर सीधा मूड, मेटाबॉलिज्म, नीद और ह‌ड्डियों की सेहत पर पडता है। पर चूंकि यह दौर धीरे-धीरे आता है, इसलिए इसे अक्सर तनाव, थकान या बस उम्र बढ़ रही है कहकर टाल दिया जाता है। यही टालमटोल आगे चलकर बडी समस्या बन सकती है जैसे ह‌ड्डियों का कमजोर होना, दिल की सेहत पर असर, या मानसिक स्वास्थ्य से जुडी दिक्कते।

जागरुकता की कमी असली समस्या है

भारत में महिलाओं की सेहत को लेकर बातचीत अक्सर प्रेगनेंसी और डिलीवरी तक सीमित रह जाती है। उसके बाद के दशको में महिला की सेहत पर उतना ध्यान नहीं दिया जाता, जितना देना चाहिए। यही सोचकर मैंने मेनोवेदा की शुरुआत की ताकि 40 के बाद की सेहत को नजरअंदाज न किया जाए, बल्कि उसे उतनी ही गंभीरता से लिया जाए जितनी जरुरत है।

अब क्या बदलना चाहिए

सबसे पहले महिलाओं को अपने शरीर के संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। थकान, नींद की कमी, वजन बढना इन्हें सिर्फ उम्र का असर मानकर टालने के बजाय, सही जांच और सही सलाह लेनी चाहिए। दूसरा, परिवार और समाज को भी इस विषय पर खुलकर बात करनी होगी। महिलाओं की सेहत सिर्फ उनकी निजी जिम्मेदारी नहीं, यह पूरे परिवार की समझ और सहयोग की मांग करती है और तीसरा, सही जानकारी और सही उत्पादों तक पहुंच बेहद जरुरी है, जो हार्मोनल बदलावों को समझे और उसी हिसाब से सपोर्ट करें।

40 के बाद की यह "अदृश्य चुनौती" तभी हल हो सकती है, जब हम इसे खुलकर स्वीकार करें, इस पर बात करें, और महिलाओं को वो सपोर्ट दें जिसकी उन्हें असल में जरूरत है।

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