
नारी डेस्क: उत्तर प्रदेश मे महोबा जनपद के ग्राम काशीपुर मे स्थित प्राचीन शिव मंदिर अपनी ऐतिहासिक, धार्मिक और आध्यात्मिक महत्ता के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। मध्य प्रदेश की सीमा से सटे महोबकंठ से लगभग 11 किलोमीटर और जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर धसान नदी के तट पर स्थित यह प्राचीन शिवालय श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। लोग इसे 'मिनी काशी' के नाम से पुकारते हैं। मान्यता है कि इस मंदिर में विराजमान भगवान भोलेनाथ का स्वरूप वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ के प्रतिरूप के समान है।
सावन माह में दूर- दूर से आते हैं भक्त
इस मंदिर की बनावट, शिवलिंग का स्वरूप और धार्मिक वातावरण श्रद्धालुओं को काशी विश्वनाथ की याद दिलाता है। सावन माह और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुँचते हैं। इन दिनों काशीपुर मे चहु और बम भोले की अनुगूंज है. सावन के पवित्र माह मे यहां हर रोज हजारों की संख्या मे भोले नाथ के भक्तो की भीड़ उमड़ रही है। मान्यताओ के अनुसार काशीपुर के शिव मंदिर का निर्माण 1700 इस्वी मे मराठा शासको के वंशज पेशवा बाजीराव के सैन्य प्रमुख गोविंद राव एवं पुरुषोत्तम राव द्वारा कराया गया था।
मां गंगा ने दिखाया था चमत्कार
धसान नदी के किनारे लगभग 100 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति का अछ्वुत संगम प्रस्तुत करता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से बाबा भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक करने वाले भक्तों की यहां सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। ग्रामीणों के अनुसार कुछ वर्ष पूर्व धसान नदी में आई बाढ़ के दौरान गंगा जल स्वयं मंदिर तक पहुंचा और भगवान शिव का जलाभिषेक हुआ, जिसे लोग दिव्य चमत्कार के रूप में देखते हैं। इसी धार्मिक मान्यता के कारण काशीपुर को भगवान शिव की राजधानी तथा 'मिनी काशी' कहा जाता है।