नारी डेस्क : शादी के बाद महिलाओं के पैरों में बिछिया पहनने की परंपरा सदियों पुरानी है। आमतौर पर इसे पैरों के अंगूठे के पास वाली दूसरी उंगली में पहना जाता है और ज्यादातर बिछिया चांदी की होती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बिछिया के लिए चांदी को ही क्यों चुना गया और इसे दूसरी उंगली में पहनने के पीछे क्या कारण है? दरअसल, इसके पीछे धार्मिक परंपराओं के साथ-साथ ज्योतिषीय मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं। कुछ ज्योतिषीय मतों में चांदी और बिछिया का संबंध राहु-केतु सहित चंद्रमा और शुक्र से जोड़ा जाता है। आइए जानते हैं बिछिया से जुड़ी इन मान्यताओं के बारे में।
चांदी से ग्रहों का क्या संबंध है?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार चांदी का संबंध मुख्य रूप से चंद्रमा से माना जाता है, जबकि कुछ परंपराओं में इसे शुक्र से भी जोड़ा जाता है। चंद्रमा को मन, भावनाओं और मानसिक शांति का कारक माना जाता है, वहीं शुक्र को प्रेम, सौंदर्य और वैवाहिक सुख से संबंधित ग्रह माना जाता है। इसी वजह से पारंपरिक ज्योतिष में चांदी के आभूषणों को शांत और सकारात्मक प्रभाव से जोड़कर देखा जाता है।

बिछिया का राहु-केतु से क्या कनेक्शन है?
ज्योतिष में राहु और केतु को छाया ग्रह कहा जाता है। पारंपरिक मान्यताओं में राहु को भ्रम, अस्थिरता और अचानक आने वाली परिस्थितियों से, जबकि केतु को वैराग्य और आध्यात्मिकता से जोड़ा जाता है। कुछ ज्योतिषीय मतों के अनुसार शरीर के निचले हिस्से और पैरों का संबंध केतु से माना जाता है। इसी आधार पर पैरों में चांदी धारण करने को राहु-केतु से जुड़े नकारात्मक प्रभावों को शांत करने वाला माना जाता है।
पैरों की दूसरी उंगली में ही क्यों पहनते हैं बिछिया?
परंपरागत रूप से बिछिया पैर के अंगूठे के ठीक बगल वाली दूसरी उंगली में पहनी जाती है। इसके पीछे अलग-अलग धार्मिक और लोक मान्यताएं बताई जाती हैं। कुछ मान्यताओं में इस उंगली का संबंध शरीर की कुछ नसों और प्रजनन तंत्र से जोड़ा गया है। वहीं, एक्यूप्रेशर से जुड़े कुछ विचारों में पैरों की उंगलियों पर दबाव को शरीर के विभिन्न हिस्सों से संबंधित बताया जाता है।
सोने की बिछिया क्यों नहीं पहनते?
हिंदू धार्मिक परंपराओं में पैरों में सोना पहनने से आमतौर पर परहेज किया जाता है। मान्यता है कि सोने का संबंध देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु से है, इसलिए इसे शरीर के निचले हिस्से में धारणकरना उचित नहीं माना जाता। इसी धार्मिक मान्यता के कारण पैरों के आभूषणों के लिए चांदी का इस्तेमाल अधिक किया जाता है।

बिछिया टूट जाए या खो जाए तो क्या करें?
कई परिवारों में बिछिया के टूटने या खोने को शुभ नहीं माना जाता। ऐसी स्थिति में इसे लेकर अलग-अलग लोक और ज्योतिषीय मान्यताएं प्रचलित हैं। कुछ लोग पुरानी बिछिया को बदलकर नई चांदी की बिछिया पहनने की सलाह देते हैं।
दोनों पैरों में बिछिया पहनने की परंपरा
परंपरा के अनुसार शादीशुदा महिलाएं दोनों पैरों में बिछिया पहनती हैं। अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों में इसे पहनने का तरीका, डिजाइन और उंगलियों की संख्या अलग हो सकती है। इसलिए हर जगह एक ही नियम लागू होता है, ऐसा कहना सही नहीं होगा।
नोट: बिछिया भारतीय संस्कृति और विवाहित महिलाओं के पारंपरिक श्रृंगार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके साथ राहु-केतु, चंद्रमा और शुक्र से जुड़ी कई ज्योतिषीय मान्यताएं प्रचलित हैं। लेकिन इन मान्यताओं को धार्मिक या ज्योतिषीय विश्वास के रूप में ही समझना चाहिए, वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं।