
नारी डेस्क : गणेश चतुर्थी का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है, लेकिन इसी तिथि से जुड़ी एक ऐसी अनोखी लोक-मान्यता भी है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। कहा जाता है कि गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन करने से व्यक्ति पर कलंक लग सकता है। यही वजह है कि इस दिन चांद देखने से बचने की सलाह दी जाती है। लेकिन अगर भूलवश चंद्रमा के दर्शन हो जाएं तो क्या करें? कुछ क्षेत्रों में ऐसी मान्यता है कि इसके दोष से बचने के लिए दूसरे की छत पर 5 पत्थर फेंकने चाहिए। आखिर इसके पीछे की कथा क्या है?
चंद्रदेव ने किया था भगवान गणेश का उपहास
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान गणेश अपने प्रिय मोदक का आनंद ले रहे थे। उसी दौरान वहां से चंद्रदेव गुजरे। भगवान गणेश के गजमुख और बड़े उदर को देखकर चंद्रदेव हंस पड़े और उनका उपहास करने लगे। उन्हें अपनी सुंदरता पर भी बहुत अभिमान था। भगवान गणेश को चंद्रदेव का यह व्यवहार पसंद नहीं आया। उन्होंने क्रोधित होकर चंद्रमा को श्राप दिया कि उनका रूप और तेज नष्ट हो जाएगा और जो व्यक्ति गणेश चतुर्थी के दिन उनके दर्शन करेगा, उस पर झूठे आरोप या कलंक लग सकता है।मान्यता के अनुसार, यह घटना भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन हुई थी। इसी कारण इस तिथि को चंद्र दर्शन से जोड़कर देखा जाता है।

चंद्रदेव ने की गणेश जी की आराधना
भगवान गणेश का श्राप मिलने के बाद चंद्रदेव को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने भगवान गणेश की आराधना और तपस्या की और अपने व्यवहार के लिए क्षमा मांगी। चंद्रदेव की तपस्या से प्रसन्न होकर गणपति ने उन्हें वरदान मांगने के लिए कहा। चंद्रदेव ने प्रार्थना की कि उनका श्राप पूरी तरह निष्फल हो जाए। तब भगवान गणेश ने कहा कि श्राप को पूरी तरह वापस नहीं लिया जा सकता, लेकिन उसका प्रभाव सीमित किया जा सकता है। मान्यता है कि इसी के बाद गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन को लेकर यह धार्मिक विश्वास प्रचलित हुआ।
भूल से चांद दिख जाए तो 5 पत्थर क्यों फेंकते हैं?
लोक-मान्यता के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति से भूलवश गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन हो जाए तो उस पर लगने वाले ‘कलंक’ के प्रभाव को दूर करने के लिए 5 पत्थर दूसरे के घर या छत की ओर फेंकने की परंपरा कुछ क्षेत्रों में बताई जाती है। हालांकि, यह एक लोक-परंपरा और मान्यता है। इसे धार्मिक ग्रंथों में सभी जगह समान रूप से मान्य उपाय नहीं माना जाता। इसलिए इसे किसी निश्चित धार्मिक नियम की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।

किन जगहों पर है पत्थर फेंकने की परंपरा?
कुछ लोक परंपराओं में गणेश चतुर्थी को ‘कलंक चौथ’ या ‘पत्थर चौथ’ के नाम से भी जाना जाता है। मध्य प्रदेश के कुछ ग्रामीण इलाकों और राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में चंद्र दर्शन से जुड़ी ऐसी लोक-परंपराओं का उल्लेख मिलता है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में इस परंपरा का स्वरूप और इससे जुड़ी मान्यताएं अलग हो सकती हैं।
क्यों नहीं करना चाहिए चंद्र दर्शन?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा देखने से व्यक्ति पर झूठे आरोप या कलंक लगने की आशंका मानी जाती है। इसी विश्वास के कारण इस दिन चंद्र दर्शन से बचने की परंपरा है। इस कथा का मुख्य संदेश भगवान गणेश के प्रति श्रद्धा और अहंकार से बचने से जुड़ा है। वहीं 5 पत्थर फेंकने की परंपरा कुछ विशेष क्षेत्रों की लोक मान्यता है, जिसे आज भी लोग अपनी धार्मिक आस्था और परंपरा के अनुसार निभाते हैं।