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बच्चों के दिल और किडनी पर सीधा अटैक करती है ये बीमारी, सिर्फ मैडिकल टैस्ट से नहीं चलेगा काम

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 22 May, 2026 11:54 AM
बच्चों के दिल और किडनी पर सीधा अटैक करती है ये बीमारी, सिर्फ मैडिकल टैस्ट से नहीं चलेगा काम

नारी डेस्क: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) भोपाल के एक हालिया अध्ययन में सिकल सेल बीमारी (SCD) से पीड़ित बच्चों में शुरुआती और उन्नत स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की ज़रूरत पर जोर दिया गया है। शोधकर्ताओं ने बड़ी संख्या में मरीज़ों में दिल, किडनी और नींद से जुड़ी छिपी हुई समस्याओं के संकेत पाए हैं। यह अध्ययन गुरुवार को पीडियाट्रिक्स विभाग के पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी और हाइपरटेंशन डिवीज़न द्वारा किया गया था, और इसे 'इंटरनेशनल पीडियाट्रिक नेफ्रोलॉजी' जर्नल में प्रकाशित किया गया है।

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मेडिकल टेस्ट भी नहीं बताते इस बीमारी के बारे में 

शोधकर्ताओं ने सिकल सेल बीमारी वाले बच्चों का अध्ययन किया ताकि यह समझा जा सके कि इस बीमारी का ब्लड प्रेशर, नींद, दिल के स्वास्थ्य और किडनी के काम करने के तरीके पर क्या असर पड़ता है। अध्ययन के अनुसार, कई बच्चों में स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्याएं दिखीं, जिनका पता सामान्य मेडिकल टेस्ट से नहीं चल पाया था। डॉक्टरों ने 24 घंटे की एम्बुलेटरी ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग (ABPM) का इस्तेमाल किया, जिससे कई मरीज़ों में ब्लड प्रेशर से जुड़ी छिपी हुई असामान्यताएं सामने आईं, जिसमें नींद के दौरान बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर भी शामिल था। अध्ययन में यह भी पाया गया कि सिकल सेल बीमारी वाले बच्चों में ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) आम था।


माता- पिता से फैलती है ये बीमारी

सिकल सेल रोग की पहली आधुनिक रिपोर्ट लगभग 1846 में आई थी। 2006 में विश्व स्वास्थ्य संगठन और 2008 में संयुक्त राष्ट्र ने सिकल सेल रोग को मान्यता दी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का अनुमान है कि सिकल-सेल रोग दुनिया भर में लगभग 100 मिलियन लोगों को प्रभावित करता है और हर साल 300 000 से ज़्यादा बच्चे इस बीमारी के साथ पैदा होते हैं। यह  एक जेनेटिक बीमारी है जिसे जेनिटिक टेस्ट के जरिए पहचाना जा सकता है। यह कोई संक्रामक रोग (छुआछूत) नहीं है, बल्कि यह माता-पिता के जीन (Genes) के माध्यम से विरासत में मिलती है। 

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बच्चों की किडनी पर भी मंडरा रहा खतरा

शोधकर्ताओं ने कहा कि स्लीप एपनिया से पीड़ित बच्चों में खून की नसों और दिल को नुकसान पहुंचने का खतरा ज़्यादा होता है। एक और महत्वपूर्ण नतीजे में, लगभग 71 प्रतिशत बच्चों में दिल या नसों को शुरुआती नुकसान के संकेत दिखे, यहां तक कि उन मामलों में भी जहां अस्पताल के नियमित दौरे के दौरान ब्लड प्रेशर सामान्य दिख रहा था। इस रिसर्च में किडनी से जुड़ी शुरुआती समस्याओं पर भी रोशनी डाली गई। प्रोटीन्यूरिया, जिसे किडनी को नुकसान का शुरुआती चेतावनी संकेत माना जाता है, कई बच्चों में पाया गया। सिस्टैटिन C का इस्तेमाल करके किए गए ज़्यादा संवेदनशील किडनी टेस्ट से बड़ी संख्या में मरीज़ों में किडनी के काम करने की क्षमता में कमी का पता चला, जबकि पारंपरिक टेस्ट इनमें से कई मामलों की पहचान करने में नाकाम रहे।


बच्चों को स्क्रीनिंग की जरुरत

डॉक्टर कहते हैं- "ये नतीजे दिखाते हैं कि सिकल सेल बीमारी वाले बच्चों को सामान्य ब्लड टेस्ट से आगे बढ़कर नियमित स्क्रीनिंग की ज़रूरत होती है। दिल, किडनी और नींद से जुड़ी छिपी हुई समस्याओं का शुरुआती पता लगने से इलाज और लंबे समय के नतीजों को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।" शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि यह अध्ययन डॉक्टरों को सिकल सेल बीमारी से पीड़ित बच्चों के लिए बेहतर स्क्रीनिंग और इलाज की रणनीतियां बनाने में मदद करेगा, और इस बीमारी से जुड़ी लंबे समय तक चलने वाली जटिलताओं को कम करेगा।

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