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बच्चों में ऐसे नज़र आते हैं Diabetes के लक्षण! पेरेंट्स भूलकर भी न करें इग्नोर

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 18 May, 2026 10:36 AM
बच्चों में ऐसे नज़र आते हैं Diabetes के लक्षण! पेरेंट्स भूलकर भी न करें इग्नोर

नारी डेस्क: आजकल सिर्फ बड़े ही नहीं, बल्कि बच्चे भी डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में आने लगे हैं। खराब खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी और बढ़ता मोटापा बच्चों में टाइप 2 डायबिटीज के मामलों को तेजी से बढ़ा रहा है। वहीं, टाइप 1 डायबिटीज बच्चों में पहले से ही आम मानी जाती है। ऐसे में जरूरी है कि माता-पिता समय रहते इसके शुरुआती लक्षणों को पहचान लें, ताकि बच्चे का सही इलाज जल्द शुरू हो सके।

बार-बार प्यास लगना और ज्यादा पेशाब आना

अगर बच्चा सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा पानी पीने लगा है और बार-बार पेशाब के लिए जा रहा है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। डायबिटीज होने पर शरीर में शुगर का स्तर बढ़ जाता है, जिससे किडनी अतिरिक्त शुगर को बाहर निकालने के लिए ज्यादा काम करती है। इसी वजह से बार-बार पेशाब आता है और शरीर में पानी की कमी होने लगती है। कई बार बच्चे रात में भी बार-बार उठकर वॉशरूम जाने लगते हैं।

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हर समय भूख लगना

डायबिटीज से पीड़ित बच्चों में अक्सर जरूरत से ज्यादा भूख महसूस होती है। बच्चा खाना खाने के थोड़ी देर बाद ही फिर से कुछ खाने की मांग करने लगता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर ग्लूकोज को सही तरीके से ऊर्जा में नहीं बदल पाता। शरीर को पर्याप्त एनर्जी नहीं मिलती, जिसके कारण भूख लगातार बनी रहती है।

कमजोरी और थकान महसूस होना

अगर बच्चा बिना ज्यादा खेलकूद या मेहनत के भी हर समय थका-थका नजर आता है, तो यह भी डायबिटीज का संकेत हो सकता है। शरीर की कोशिकाओं तक जब पर्याप्त ग्लूकोज नहीं पहुंच पाता, तो शरीर को ऊर्जा की कमी महसूस होती है। इसका असर बच्चे की एक्टिविटी और पढ़ाई दोनों पर पड़ सकता है। बच्चा सुस्त रहने लगता है और जल्दी थक जाता है।

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बिना वजह वजन कम होना

बच्चों में अचानक वजन कम होना भी डायबिटीज का एक बड़ा संकेत माना जाता है। कई बार बच्चा ठीक से खाना खा रहा होता है, फिर भी उसका वजन तेजी से घटने लगता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर ऊर्जा पाने के लिए फैट और मांसपेशियों को तोड़ना शुरू कर देता है। खासतौर पर टाइप 1 डायबिटीज में यह लक्षण काफी आम है।

धुंधला दिखाई देना

टाइप 2 डायबिटीज होने पर बच्चों की आंखों पर भी असर पड़ सकता है। हाई ब्लड शुगर की वजह से आंखों की लेंस पर प्रभाव पड़ता है, जिससे चीजें धुंधली दिखाई देने लगती हैं। अगर बच्चा टीवी देखने या पढ़ने के दौरान बार-बार आंखें मिचमिचाने लगे या देखने में परेशानी की शिकायत करे, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए।

गर्दन और अंडरआर्म्स पर कालापन

कुछ बच्चों की गर्दन, अंडरआर्म्स या शरीर के अन्य हिस्सों पर अचानक काला और मोटा सा पैच नजर आने लगता है। इसे अक्सर लोग गंदगी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत हो सकता है। खासकर टाइप 2 डायबिटीज में यह लक्षण ज्यादा देखा जाता है। ऐसे संकेत दिखने पर बच्चे का ब्लड शुगर टेस्ट जरूर करवाना चाहिए।

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कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है?

अगर बच्चे में इनमें से एक या एक से ज्यादा लक्षण लगातार नजर आ रहे हैं, तो देर करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी है। समय पर जांच और इलाज शुरू होने से डायबिटीज को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है और बच्चे को स्वस्थ जीवन दिया जा सकता है।

बच्चों को डायबिटीज से कैसे बचाएं?

बच्चों को जंक फूड और ज्यादा मीठी चीजों से दूर रखें। उन्हें रोजाना शारीरिक गतिविधियों और आउटडोर खेलों के लिए प्रोत्साहित करें। संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और स्क्रीन टाइम कम रखना भी बेहद जरूरी है। परिवार में अगर पहले से डायबिटीज की हिस्ट्री है, तो बच्चों की नियमित हेल्थ चेकअप करवाते रहना चाहिए।
 


 

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