नारी डेस्क: आज के समय में ज्यादातर लोग ऑफिस में लगातार 8 से 10 घंटे तक कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं। कंप्यूटर और लैपटॉप के सामने लंबे समय तक बैठे रहना अब आम दिनचर्या बन चुकी है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यही आदत धीरे-धीरे कई गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकती है, जिनमें टाइप-2 डायबिटीज भी शामिल है। mहाल ही में किए गए शोध में यह सामने आया है कि काम के दौरान बीच-बीच में खड़े होकर काम करना ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मददगार साबित हो सकता है। यही वजह है कि अब “स्टैंडिंग डेस्क” का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।
लंबे समय तक बैठना क्यों है खतरनाक?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार बैठे रहने से शरीर की गतिविधियां कम हो जाती हैं। इसका सीधा असर मेटाबॉलिज्म और ब्लड शुगर पर पड़ता है। खासतौर पर उन लोगों के लिए यह ज्यादा जोखिम भरा माना जाता है, जो पहले से प्री-डायबिटिक हैं या डायबिटीज से जूझ रहे हैं। चेस्टर विश्वविद्यालय के शोध में बताया गया कि भोजन के बाद ब्लड शुगर तेजी से बढ़ना मधुमेह मरीजों के लिए बड़ी समस्या बनता है। ऐसे में अगर व्यक्ति खाने के बाद लगातार बैठा रहे तो स्थिति और खराब हो सकती है।

खड़े होकर काम करने से ब्लड शुगर में सुधार
विशेषज्ञों ने कई लोगों के स्वास्थ्य आंकड़ों का विश्लेषण किया। अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों ने दोपहर का भोजन करने के बाद करीब तीन घंटे तक खड़े होकर काम किया, उनके ब्लड शुगर लेवल में लगभग 43 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई। इसके मुकाबले जो लोग लंच के बाद लगातार कुर्सी पर बैठे रहे, उनमें ब्लड शुगर का स्तर अधिक पाया गया। इतना ही नहीं, जिन लोगों का शुगर लंबे समय से अनियंत्रित था, उन्होंने जब काम के दौरान बीच-बीच में खड़े रहना शुरू किया तो उनके स्वास्थ्य में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिले।
मूड और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है असर
विशेषज्ञों का कहना है कि दोपहर के समय महसूस होने वाली सुस्ती, थकान और चिड़चिड़ापन भी ब्लड शुगर से जुड़ा हो सकता है। जब शरीर लंबे समय तक निष्क्रिय रहता है तो ऊर्जा का स्तर प्रभावित होने लगता है। खड़े होकर काम करने से शरीर इंसुलिन का बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर पाता है, जिससे ब्लड शुगर स्थिर रहती है। इसके अलावा, कम बैठने वाले लोगों में तनाव और घबराहट की समस्या भी कम देखी गई। उनका मूड बेहतर रहता है और काम में फोकस भी बढ़ता है।
गर्दन और पीठ दर्द में भी मिल सकती है राहत
अध्ययन में यह भी सामने आया कि लंबे समय तक बैठने के बजाय खड़े होकर काम करने वाले लोगों में गर्दन और पीठ के ऊपरी हिस्से के दर्द में करीब 54 प्रतिशत तक कमी देखी गई। लगातार एक ही मुद्रा में बैठकर काम करने से रीढ़ और मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है, जबकि खड़े रहने से शरीर की हलचल बनी रहती है और मांसपेशियों पर कम असर पड़ता है।
क्या होती है स्टैंडिंग डेस्क?
स्टैंडिंग डेस्क एक विशेष प्रकार की टेबल होती है, जिसे इस तरह डिजाइन किया जाता है कि व्यक्ति उस पर खड़े होकर आराम से काम कर सके। यह सामान्य डेस्क से थोड़ी ऊंची होती है। आजकल बाजार में एडजस्टेबल स्टैंडिंग डेस्क भी उपलब्ध हैं, जिन्हें जरूरत के अनुसार ऊपर-नीचे किया जा सकता है। यानी व्यक्ति चाहें तो बैठकर और चाहें तो खड़े होकर काम कर सकता है।

अपनाएं 50/50 नियम
विशेषज्ञों का सुझाव है कि पूरे दिन लगातार खड़े रहना भी सही नहीं है। इसके लिए 50/50 नियम अपनाना बेहतर माना जाता है। यानि हर 30 से 40 मिनट तक बैठकर काम करने के बाद 10 से 20 मिनट तक खड़े होकर काम करने की आदत डालनी चाहिए। इससे शरीर एक्टिव बना रहता है और लंबे समय तक बैठने के नुकसान कम हो सकते हैं।
सही पोश्चर रखना भी है जरूरी
अगर आप स्टैंडिंग डेस्क का इस्तेमाल कर रहे हैं तो शरीर की सही स्थिति का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। कंप्यूटर स्क्रीन आंखों के बराबर ऊंचाई पर होनी चाहिए। कोहनियां लगभग 90 डिग्री के कोण पर रहें। पैरों पर ज्यादा दबाव न पड़े, इसके लिए आरामदायक जूते पहनना बेहतर होता है। विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि एंटी-फटीग मैट यानी कुशन वाली चटाई का इस्तेमाल करने से पैरों और जोड़ों पर दबाव कम पड़ता है।
छोटी आदतें बचा सकती हैं बड़ी बीमारियों से
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके डायबिटीज, मोटापा और शरीर दर्द जैसी समस्याओं से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है।