
नारी डेस्क: महिला रोग विशेषज्ञों का कहना है कि मासिक धर्म के दौरान साफ सफाई का ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण है लेकिन 'टैम्पोन' और 'मेंस्ट्रुअल कप' जैसे आधुनिक उत्पादों का इस्तेमाल जागरूकता के साथ करने की जरूरत है। नोएडा के भंगेल स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की वरिष्ठ महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. मीरा पाठक ने 'भाषा' को बताया कि माहवारी के दौरान टैम्पोन के गलत इस्तेमाल से टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम होने का खतरा रहता है। उन्होंने बताया कि यह एक दुर्लभ लेकिन अत्यंत गंभीर और जानलेवा स्थिति है जो कुछ विशेष बैक्टीरिया (स्टैफिलोकोकस और स्ट्रेप्टोकोकस) द्वारा शरीर में छोड़े गए जहरीले पदार्थों के कारण होती है।
टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम के यै हैं लक्षण
टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम में तेज बुखार, उल्टी, उच्च रक्तचाप जैसे लक्षण हो सकते हैं। इसी प्रकार मेंस्ट्रुअल कप के बारे में उनका कहना था कि जब यह भारी महसूस होने लगे, तो इसे निकालकर खून को शौचालय में बहा दें और कप को धोकर दोबारा इस्तेमाल करें। 'टैम्पोन' मासिक धर्म के दौरान इस्तेमाल किया जाने वाला एक छोटा, मुलायम और बेलनाकार अवशोषक उत्पाद है। इसे पैड की तरह बाहर पहनने के बजाय, अंदरूनी रूप से रक्त को सोखने के लिए योनि के अंदर डाला जाता है। 'मेंस्ट्रुअल कप' सिलिकॉन से बना एक छोटा, लचीला कप होता है जो पीरियड्स के दौरान पैड या टैम्पोन की जगह लेता है।
लापरवाही पैदा कर सकती है गंभीर संकट
माहवारी में स्वच्छता के महत्व को रेखांकित करते हुए डा.मीरा ने बताया कि स्वच्छता में कमी के कारण तुरंत होने वाली समस्याओं में जननांगों में खुजली और चकत्ते होना, जलन महसूस होना, असामान्य योनि स्राव, मूत्र मार्ग में संक्रमण (यूटीआई), प्रजनन मार्ग में संक्रमण (आरटीआई- रिप्रोडक्टिव ट्रैक्ट इन्फेक्शन) शामिल हैं। उनका कहना था कि लापरवाही से गंभीर स्वास्थ्य समस्या भी हो सकती हैं जिनमें बार-बार प्रजनन मार्ग में संक्रमण, फैलोपियन ट्यूब में सूजन, बांझपन- गर्भधारण करने में समस्या, पेडू में गंभीर सूजन और संक्रमण प्रमुख हैं। 28 मई को अंतरराष्ट्रीय मासिक धर्म स्वच्छता दिवस मनाया जाता है। महिलाओं का मासिक धर्म चक्र आमतौर पर 28 दिनों का होता है और इसकी अवधि प्राय: पांच दिन होती है। इसीलिए पांचवें महीने के 28वें दिन यह दिवस मनाया जाता है। माहवारी से ही जुड़ा हुआ एक और मुद्दा है 'मासिक धर्म गरीबी'।
"मासिक धर्म गरीबी" से पीड़ित हैं लाखों महिलाएं
भारत में "मासिक धर्म गरीबी" की वजह से महिलाओं के स्वास्थ्य पर होने वाले असर के संबंध में सुलभ इंटरनेशनल की राष्ट्रीय कार्यक्रम निदेशक नीरजा भटनागर ने 'भाषा' को बताया कि विश्व बैंक द्वारा 2018 में जारी आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया भर में लगभग पांच करोड़ महिलाएं और लड़कियां मासिक धर्म संबंधी गरीबी से पीड़ित हैं। भारत में 'मासिक धर्म गरीबी' एक गंभीर समस्या है, जिसका अर्थ केवल सैनिटरी उत्पादों की कमी तक सीमित नहीं है। एक अनुमान के अनुसार, भारत में 35 करोड़ से अधिक मासिक धर्म वाली महिलाएं और लड़कियां हैं जो कुल महिला आबादी का 54 फीसदी हैं।