
नारी डेस्क: स्कूल की छुट्टियों होते ही पेरेंट्स बच्चों के साथ घुमने का प्लान बनाना शुरू कर देते हैं। भारी भीड़ होने के चलते होटल और प्लेन के किराये भी बढ़ जाते हैं। अब पेरेंट्स स्मार्ट ट्रिक अपना रहे हैं, वह छुट्टियों के दौरान घुमने की बजाय छुट्टियां खत्म होने का प्लान बना रहे हैं। हालांकि इसमें बच्चों का ही नुकसान हो सकता है क्योंकि वह स्कूल जाने की बजाय घुम रहे हैं।
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रेट में है बड़ा फर्क
हाल ही में इस संबंध में ब्रिटेन की कई पर्यटन से जुड़ी एजेंसियों ने बड़ा विश्लेषण किया, जिसमें देखा गया कि छुट्टियों के बजाय आगे-पीछे यात्रा करने से फ्लाइट और होटलों के दाम आधे हो जाते हैं। दावा किया जा रहा है कि ऑफ-सीजन में पर्यटन स्थलों पर भीड़-भाड़ बेहद कम होती है, जिससे बच्चे ज्यादा शांति और गहराई से नई चीजें सीख पाते हैं। खर्च की समस्या से निपटने के लिए जर्मनी ने एक स्मार्ट तरीका अपनाया है। वहां राज्यों या इलाकों में स्कूल की छुट्टियां अलग-अलग तारीखों पर होती हैं। इससे पर्यटन स्थलों पर एक साथ भीड़ नहीं उमड़ती और कंपनियां मनमाने दाम नहीं बढ़ा पातीं।
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भारतीय पेरेंट्स भी बन रहे स्मार्ट
पर्यटन से जुड़ी विभिन्न रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 85 से 87 फीसदी परिवार गर्मियों की छुट्टियों के दौरान बच्चों के साथ घूमने की योजना बनाते हैं। पीक सीजन में आसमान छूती कीमतों के कारण बच्चों वाले करीब 95 फीसदी माता-पिता के लिए समर वेकेशन को बजट में प्लान करना सबसे पहली प्राथमिकता बन गया है। पीक सीजन में फ्लाइट और होटल के दाम दोगुने हो जाते हैं, जिससे बचने के लिए माता-पिता ऑफ-सीजन में बजट-फ्रेंडली डील का फायदा उठाते हैं। यूरोपीय देशों की तरह भारत में स्कूल बंक करने पर माता-पिता पर आर्थिक जुर्माना नहीं लगता, जिससे उनके लिए यह फैसला लेना आसान हो जाता है।