
नारी डेस्क: हर साल, जब ओडिशा की भव्य रथ यात्रा के लिए लाखों लोगों की नज़रें पुरी पर टिकी होती हैं, तो अगले ही दिन बारीपदा में सदियों पुरानी एक और यात्रा चुपचाप निकलती है। शहर की 450 साल पुरानी इस रथ यात्रा को अक्सर 'द्वितीय श्रीक्षेत्र' यानी भगवान जगन्नाथ का दूसरा धाम कहा जाता है। लेकिन जो बात इसे सचमुच खास बनाती है, वह सिर्फ़ इसकी उम्र या शाही विरासत नहीं, बल्कि एक ऐसी परंपरा है जो दुनिया में कहीं और नहीं मिलती: देवी सुभद्रा का रथ सिर्फ़ महिलाएं ही खींचती हैं।

अब दिल्ली में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिलेगा। त्यागराज नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में महोत्सव का आयोजन होगा, जहां महिला सशक्तीकरण और लैंगिक समानता का संदेश देने का प्रयास किया जाएगा। यहां जगन्नाथ यात्रा में पहली बारकेवल महिला श्रद्धालुओं की ओर से देवी सुभद्रा के देवदलन रथ को खींचा जाएगा। यहां 11 दिवसीय रथ यात्रा महोत्सव होगा। इसमें तीन रथ, नंदीघोष, तलध्वज और देवदलन शामिल होंगे। यह तीनों महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के लिए समर्पित होंगे। बताया जा रहा है देवी सुभद्रा का रथ पहले मंदिर समिति की महिलाएं खींचेगी फिर अन्य महिला श्रद्धालु इसमें शामिल होंगी जो अपने आप में ही खास नजारा होगा।

बारीपदा में महिलाओं द्वारा रथ खींचने की शुरुआत 1975 से हुई है , जब दुनिया भर में पहला 'अंतर्राष्ट्रीय महिला वर्ष' मनाया गया था।। पिछले पांच दशकों से, देवी सुभद्रा का रथ सिर्फ़ महिलाएं ही खींचती आ रही हैं। सैकड़ों महिलाओं का मोटी रस्सियों को पकड़कर देवी को बारीपदा की सड़कों से ले जाना, ओडिशा में सामूहिक भक्ति का एक बहुत ही सशक्त नज़ारा बन गया है। यह हिंदू धर्म के सबसे मशहूर त्योहारों में से एक में महिलाओं को पूजा-पाठ से जुड़ी मुख्य भूमिका निभाने का मौका देती है; ऐसा सम्मान इतनी बड़ी सार्वजनिक यात्रा में शायद ही कभी देखने को मिलता है। दशकों पहले शुरू हुई यह परंपरा अब बारीपदा की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा बन गई है।