नारी डेस्क: सावन का महीना आते ही तीज की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। हरी चूड़ियां, मेहंदी, सोलह श्रृंगार और झूलों के बीच हरियाली तीज का उत्साह अलग ही नजर आता है। सुहागिन महिलाओं के लिए यह पर्व खास माना जाता है, वहीं कई अविवाहित लड़कियां भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से इस दिन व्रत रखती हैं।
हरियाली तीज का धार्मिक संबंध भगवान शिव और माता पार्वती से माना जाता है। इस दिन महिलाएं शिव-पार्वती की पूजा कर अपने वैवाहिक जीवन की सुख-शांति और पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। 2026 में हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त, शनिवार को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि 14 अगस्त शाम से शुरू होकर 15 अगस्त शाम तक रहेगी। लेकिन हरियाली तीज की सबसे खास परंपराओं में से एक नवविवाहित बेटियों की पहली तीज से जुड़ी है। शादी के बाद जब बेटी पहली बार तीज मनाती है, तो उसे मायके बुलाने की परंपरा कई परिवारों में आज भी निभाई जाती है। आखिर इसके पीछे क्या वजह है? आइए जानते हैं।

शादी के बाद पहली तीज मायके में क्यों मनाती हैं बेटियां
शादी के बाद बेटी के लिए पहला सावन भावनाओं से भरा होता है। बचपन से जिस घर में उसने सावन, त्योहार और परिवार के साथ खुशियां मनाई होती हैं, शादी के बाद उसी घर से उसका रिश्ता एक अलग रूप ले लेता है। ऐसे में पहली तीज पर उसे मायके बुलाने की परंपरा बेटी को अपने परिवार और बचपन की यादों से फिर जोड़ने का एक भावनात्मक अवसर देती है। कई परिवारों में बेटी को तीज के आसपास मायके लाया जाता है। वहां मां-बाप और परिवार के लोग उसके साथ त्योहार मनाते हैं। यही वजह है कि पहली तीज को नवविवाहित महिलाओं के लिए सिर्फ एक धार्मिक व्रत नहीं, बल्कि मायके और ससुराल के बीच भावनात्मक रिश्ते का खास पड़ाव भी माना जाता है।
सिंधारा या सिंजारा की है खास परंपरा
पहली तीज पर बेटी को मायके से उपहार भेजने या उसे सम्मान के साथ घर बुलाने की परंपरा को कई जगह सिंधारा, सिंजारा या सिंधारा तीज के नाम से जाना जाता है। इसमें बेटी के लिए नए कपड़े, चूड़ियां, श्रृंगार का सामान, मेहंदी, मिठाइयां और खास तौर पर घेवर जैसी चीजें भेजी जाती हैं। इन उपहारों का महत्व केवल सामान तक सीमित नहीं माना जाता। परिवार के लिए यह बेटी के प्रति प्यार, आशीर्वाद और अपनापन जताने का तरीका है। कई घरों में बेटी की सास-ससुर के लिए भी कपड़े या मिठाइयां भेजने की परंपरा होती है।
राधा रानी से भी जोड़ी जाती है यह परंपरा
हरियाली तीज और ब्रज क्षेत्र की परंपराओं का भी गहरा संबंध बताया जाता है। बरसाना और आसपास के इलाकों में इस अवसर पर राधा-कृष्ण से जुड़े झूलन उत्सव और अन्य धार्मिक आयोजन होते हैं। लोकमान्यताओं में कहा जाता है कि हरियाली तीज के अवसर पर राधा रानी अपने मायके बरसाना आती हैं। इसी भाव से कई लोग नवविवाहित बेटियों को भी पहली तीज पर मायके बुलाने की परंपरा को जोड़कर देखते हैं। यानी जिस तरह बेटी का मायका उसके लिए हमेशा खास रहता है, उसी तरह तीज पर मायके लौटने की यह परंपरा प्रेम और अपनत्व का प्रतीक मानी जाती है। हालांकि राधा रानी से जुड़ी यह बात धार्मिक और लोकपरंपराओं में प्रचलित मान्यता है, जिसे अलग-अलग क्षेत्रों में अलग रूपों में बताया जाता है।

हरियाली तीज का शिव-पार्वती से क्या संबंध है
हरियाली तीज को भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए लंबे समय तक कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया। इसी वजह से हरियाली तीज पर शिव-पार्वती की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और दांपत्य जीवन में सुख-शांति की कामना करती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं मनचाहे जीवनसाथी की इच्छा से व्रत और पूजा करती हैं।
पहली तीज बेटी के लिए क्यों होती है खास
शादी के बाद पहली तीज बेटी के जीवन में एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक भी मानी जाती है। पहली बार वह मायके और ससुराल दोनों परिवारों की परंपराओं के साथ इस त्योहार को मनाती है। ऐसे में मायके से मिलने वाला सिंधारा और परिवार का साथ उसके लिए भावनात्मक रूप से खास हो जाता है। मां-बेटी के बीच तीज के मौके पर होने वाली बातचीत, साथ में मेहंदी लगाना, श्रृंगार करना और त्योहार की तैयारियां करना इस पर्व को और यादगार बना देता है। यही वजह है कि आज भी कई परिवार पहली तीज को लेकर विशेष तैयारी करते हैं।
2026 में कब है हरियाली तीज
पंचांग के अनुसार हरियाली तीज 15 अगस्त 2026, शनिवार को मनाई जाएगी। तृतीया तिथि 14 अगस्त को शाम करीब 6:46 बजे शुरू होगी और 15 अगस्त को शाम करीब 5:28 बजे समाप्त होगी; स्थानीय पंचांग और स्थान के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।
इस दिन महिलाएं पारंपरिक रूप से हरे रंग के कपड़े और चूड़ियां पहनती हैं, मेहंदी लगाती हैं और झूला झूलने के साथ तीज के गीतों का आनंद लेती हैं। धार्मिक आस्था के साथ-साथ यह पर्व परिवार और रिश्तों को करीब लाने वाली भारतीय परंपराओं की खूबसूरत झलक भी दिखाता है।

पहली तीज पर बेटी का मायके आना इसी रिश्ते की एक भावुक तस्वीर है जहां त्योहार के बहाने बेटी फिर कुछ समय के लिए उसी घर में लौटती है, जिसे उसने अपने बचपन की सबसे खूबसूरत यादों के साथ जिया है।