नारी डेस्क : हरियाली तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने के साथ कुछ पारंपरिक नियमों का पालन करने की भी मान्यता है। अगर आप पहली बार हरियाली तीज का व्रत रखने जा रही हैं, तो इन 5 जरूरी बातों के बारे में जरूर जान लें।
हरियाली तीज 2026 कब है?
हरियाली तीज का व्रत सावन महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं और सुखी वैवाहिक जीवन, पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। अगर आप पहली बार यह व्रत रखने वाली हैं, तो पूजा और व्रत से जुड़ी पारंपरिक मान्यताओं को पहले से जान लेना बेहतर है।

व्रत का संकल्प जरूर लें
हरियाली तीज का व्रत कई महिलाएं निर्जला रखती हैं। हालांकि, स्वास्थ्य या अन्य व्यक्तिगत कारणों से निर्जला व्रत रखना संभव न हो तो अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार या जल ग्रहण किया जा सकता है। व्रत के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें और हाथ में जल व अक्षत लेकर श्रद्धापूर्वक व्रत का संकल्प लें।
हरे रंग का है खास महत्व
हरियाली तीज के दिन हरे रंग को विशेष महत्व दिया जाता है। सावन में चारों ओर हरियाली होती है और हरा रंग प्रकृति, खुशहाली और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं हरे रंग के कपड़े, चूड़ियां और अन्य श्रृंगार की चीजें पहनती हैं। सोलह श्रृंगार करके माता पार्वती की पूजा करने की भी परंपरा है।
माता पार्वती को अर्पित करें सुहाग सामग्री
पूजा के दौरान माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसमें चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, कुमकुम, महावर और अन्य श्रृंगार सामग्री शामिल की जा सकती है। कई जगहों पर मिट्टी या बालू से भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमाएं बनाकर उनकी पूजा करने की परंपरा भी है। वहीं भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा और आक के फूल अर्पित किए जाते हैं।

साफ-सफाई और शुद्धता का रखें ध्यान
हरियाली तीज की पूजा के दौरान घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पूजा से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत के दौरान मांस-मदिरा जैसी चीजों से दूर रहना चाहिए और पूजा-पाठ में मन, वचन और कर्म की शुद्धता बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए।
ब्रह्मचर्य और सात्विकता का पालन करें
हरियाली तीज के व्रत में तन और मन की पवित्रता को महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्रत रखने वाली महिलाओं को संयमित और सात्विक जीवनशैली अपनानी चाहिए। इस दौरान नकारात्मक विचारों से दूर रहकर भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान, पूजा और भजन करना शुभ माना जाता है।
हरियाली तीज का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसी कारण हरियाली तीज को शिव-पार्वती के प्रेम और वैवाहिक सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है।

व्रत के नियम अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों की परंपराओं के अनुसार अलग हो सकते हैं। निर्जला व्रत हर किसी के लिए जरूरी या उपयुक्त नहीं होता। गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग, बीमार व्यक्ति या नियमित दवा लेने वाले लोग व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।