नारी डेस्क : हरियाली तीज का त्योहार भगवान शिव और माता पार्वती के प्रेम और पुनर्मिलन से जुड़ा माना जाता है। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं। साथ ही कई घरों में खीर, मालपुआ और अन्य पारंपरिक मिठाइयों का भोग भी लगाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हरियाली तीज पर मालपुआ बनाने और भोग लगाने की परंपरा क्यों है? आइए जानते हैं इस त्योहार से जुड़ी मान्यताएं और घर पर मालपुआ बनाने की आसान विधि।
हरियाली तीज की परंपरा कैसे शुरू हुई?
हरियाली तीज की धार्मिक मान्यता भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन से जुड़ी हुई है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए कई जन्मों तक तपस्या की। उनके तप और अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हुए इस मिलन की स्मृति में हरियाली तीज मनाने की परंपरा मानी जाती है।

सखियों ने झूला झुलाकर मनाई थी खुशी
धार्मिक कथाओं में कहा जाता है कि माता पार्वती की सखियों ने उनके शिव से मिलन की खुशी में उन्हें हरे-भरे पेड़ों पर झूला झुलाया और उत्सव मनाया। इसी वजह से हरियाली तीज पर झूला झूलने, लोकगीत गाने और हरे रंग के कपड़े व चूड़ियां पहनने की परंपरा देखने को मिलती है। सुहागिन महिलाएं इस दिन व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती से सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।
हरियाली तीज पर क्यों लगाया जाता है मालपुए का भोग?
हरियाली तीज सावन महीने में आती है। इस दौरान बारिश के कारण मौसम सुहावना और चारों तरफ हरियाली होती है। इस पर्व पर कई जगहों पर भगवान शिव और माता पार्वती को मीठे पकवानों का भोग लगाने की परंपरा है। मालपुआ भारत की पारंपरिक मिठाइयों में से एक है, जिसे आटा या मैदा, दूध, चीनी और अन्य सामग्री से तैयार किया जाता है। कई परिवारों में इसे पूजा के भोग के रूप में बनाया जाता है। हालांकि मालपुआ का भोग लगाना क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

घर पर ऐसे बनाएं स्वादिष्ट मालपुआ
सामग्री
मैदा – 1 कप
दूध – 1 कप
चीनी – स्वादानुसार
सौंफ – 1/2 चम्मच
इलायची पाउडर – 1/4 चम्मच
घी या तेल – तलने के लिए
चाशनी के लिए चीनी और पानी
कटे हुए ड्राई फ्रूट्स – गार्निश के लिए
मालपुआ बनाने की विधि
1. सबसे पहले एक बड़े बर्तन में मैदा लें और उसमें दूध डालकर चिकना बैटर तैयार करें।
2. इसमें चीनी, सौंफ और इलायची पाउडर डालकर अच्छी तरह मिलाएं।
3. बैटर को कुछ देर के लिए ढककर रख दें, ताकि इसका टेक्सचर अच्छी तरह सेट हो जाए।
4. एक कड़ाही में घी या तेल गर्म करें।
5. अब एक चम्मच बैटर लेकर कड़ाही में गोल आकार में डालें और दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेंकें।
6. तैयार मालपुए को कुछ देर के लिए चीनी की चाशनी में डुबोएं।
7. ऊपर से कटे हुए ड्राई फ्रूट्स डालकर भगवान शिव और माता पार्वती को भोग लगाएं।

हरियाली तीज का धार्मिक महत्व
हरियाली तीज को मुख्य रूप से शिव-पार्वती के प्रेम और वैवाहिक सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है। महिलाएं इस दिन व्रत और पूजा करके अपने पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। हरे रंग को सावन की हरियाली, प्रकृति और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इसलिए इस दिन हरे वस्त्र और हरी चूड़ियां पहनने की परंपरा कई क्षेत्रों में प्रचलित है।
हरियाली तीज सिर्फ व्रत और पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, प्रेम, सुहाग और पारंपरिक संस्कृति से जुड़ा त्योहार भी है। इस दिन झूला झूलने, हरे रंग के कपड़े पहनने और पारंपरिक मिठाइयों का भोग लगाने की परंपरा इसे और खास बनाती है। अगर आपके परिवार में मालपुआ का भोग लगाने की परंपरा है, तो इस तीज पर घर पर इसे बनाकर भगवान शिव और माता पार्वती को श्रद्धापूर्वक अर्पित कर सकती हैं।