02 OCTFRIDAY2026 11:48:50 PM
Nari

रक्षाबंधन पर भाई को राखी बांधते समय बोलें ये मंत्र, शुभ मानी जाती है ये विधि

  • Edited By Monika,
  • Updated: 09 Aug, 2026 04:27 PM
रक्षाबंधन पर भाई को राखी बांधते समय बोलें ये मंत्र, शुभ मानी जाती है ये विधि

नारी डेस्क : रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाल जीवन की कामना करती हैं। वहीं भाई भी बहन की रक्षा और हर परिस्थिति में उसका साथ देने का संकल्प लेते हैं। इस बार रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह पर्व सावन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। राखी बांधने की इस परंपरा में पूजा, तिलक, मिठाई और रक्षा-सूत्र बांधने के साथ मंत्रोच्चारण का भी विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि भाई की कलाई पर राखी बांधते समय यदि बहन रक्षा-सूत्र के मंत्र का उच्चारण करे, तो यह शुभ संकल्प और मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है। आइए जानते हैं राखी बांधते समय कौन-सा मंत्र बोला जाता है और इसका अर्थ क्या है।

राखी बांधते समय कौन-सा मंत्र बोलें?

रक्षा-सूत्र बांधते समय परंपरागत रूप से इस मंत्र का उच्चारण किया जाता है
“ॐ येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥”

PunjabKesari

मंत्र का अर्थ: इस मंत्र का भावार्थ है, जिस रक्षा-सूत्र से महान शक्तिशाली दानवराज बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा-सूत्र से मैं तुम्हें बांधती हूं। हे रक्षा-सूत्र! तुम इसकी रक्षा करो और इसे अपने कर्तव्य तथा संकल्प से कभी विचलित न होने दो। इस मंत्र में भाई की रक्षा, उसके कल्याण और जीवन में स्थिरता की मंगलकामना निहित मानी जाती है।

राखी बांधते समय मंत्र बोलने का क्या महत्व है?

भारतीय परंपरा में किसी भी शुभ कार्य के दौरान मंत्रोच्चारण को सकारात्मक संकल्प से जोड़ा जाता है। रक्षाबंधन पर यह मंत्र बोलना भी भाई के लिए मंगलकामना और रक्षा के संकल्प को व्यक्त करने का एक पारंपरिक तरीका है। राखी केवल कलाई पर बांधा गया धागा नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी का प्रतीक मानी जाती है। मंत्र का उच्चारण इसी भावना को धार्मिक और आध्यात्मिक रूप देता है। हालांकि, यह कहना अधिक उचित है कि मंत्र का जाप परंपरा और श्रद्धा का हिस्सा है; मंत्र न बोल पाने से रक्षाबंधन का पर्व या राखी बांधने की रस्म अपने आप अमान्य नहीं हो जाती। श्रद्धा और भाई-बहन के बीच प्रेम इस पर्व की मूल भावना है।

यें भी पढ़ें : राखी सिर्फ धागा नहीं... है सदियों पुराना इतिहास, जानें सबसे पहले किसने बांधी थी ये डोर!

राखी बांधने की पारंपरिक विधि

रक्षाबंधन के दिन बहन सबसे पहले पूजा की थाली तैयार कर सकती हैं। इसमें रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, मिठाई और राखी रखी जाती है।
इसके बाद भाई को आसन पर बैठाकर
सबसे पहले भगवान का स्मरण करें।
भाई के माथे पर तिलक लगाएं।
तिलक के बाद अक्षत लगाएं।
भाई की आरती करें।
उसकी कलाई पर रक्षा-सूत्र यानी राखी बांधें।
राखी बांधते समय ऊपर दिए गए मंत्र का उच्चारण करें।
अंत में भाई को मिठाई खिलाएं।
भाई बहन को उपहार देकर उसके सुखी और सुरक्षित जीवन की कामना करे।

PunjabKesari

राखी किस हाथ में बांधी जाती है?

परंपरागत रूप से बहनें भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधती हैं। हालांकि अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रीय परंपराओं में पूजा-विधि में कुछ अंतर देखने को मिल सकता है। इसलिए अपने परिवार की प्रचलित परंपरा और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं का पालन करना भी उचित माना जाता है।

यें भी पढ़ें : इन Blood Group वालों को सबसे ज्यादा काटते हैं मच्छर! जानिए क्या कहती है रिसर्च

रक्षाबंधन सिर्फ भाई की रक्षा का पर्व नहीं

रक्षाबंधन को अक्सर केवल भाई द्वारा बहन की रक्षा के वचन से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसका भाव इससे कहीं व्यापक है। यह त्योहार दोनों के बीच प्रेम, सम्मान, विश्वास और एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहने का प्रतीक है। जब बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है, तो वह उसके अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की कामना करती है। वहीं भाई भी बहन के प्रति अपने प्रेम और जिम्मेदारी को स्वीकार करता है। यही वजह है कि समय के साथ रक्षाबंधन की भावना भी व्यापक हुई है। आज कई परिवारों में भाई-बहन एक-दूसरे की सुरक्षा, सम्मान और हर परिस्थिति में साथ देने का संकल्प लेते हैं।
इस रक्षाबंधन अगर आप भी अपने भाई की कलाई पर राखी बांध रही हैं, तो श्रद्धा के साथ “ॐ येन बद्धो बलि राजा...” मंत्र का उच्चारण कर सकती हैं और इस पावन रिश्ते में प्रेम व विश्वास की डोर को और मजबूत कर सकती हैं।

Related News