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बारिश में होने वाली है डिलीवरी? मां और बच्चे की सेफ्टी के लिए 4 बातों का रखें खास ध्यान

  • Edited By Monika,
  • Updated: 10 Aug, 2026 01:25 PM
बारिश में होने वाली है डिलीवरी? मां और बच्चे की सेफ्टी के लिए 4 बातों का रखें खास ध्यान

नारी डेस्क : मां बनना हर महिला के लिए जिंदगी का सबसे खूबसूरत और खास एहसास होता है, जिसके सामने डिलीवरी का दर्द भी फीका पड़ जाता है। लेकिन अगर डिलीवरी बारिश के मौसम में होने वाली है, तो मां और बच्चे की सेहत को लेकर थोड़ी अतिरिक्त सावधानी जरूरी हो जाती है। मानसून में नमी, मच्छरों और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला को खान-पान, साफ-सफाई, मच्छरों से बचाव और नियमित चेकअप का खास ध्यान रखना चाहिए।

बाहर के खाने से करें परहेज

बारिश के मौसम में बाहर का खाना और दूषित पानी संक्रमण का जोखिम बढ़ा सकते हैं। इसलिए गर्भावस्था के दौरान साफ-सफाई का खास ध्यान रखें और कोशिश करें कि ताजा, अच्छी तरह पका हुआ और पौष्टिक घर का खाना ही खाएं। बिना पाश्चुरीकृत दूध या असुरक्षित खाद्य पदार्थों से भी बचना बेहतर है।

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मच्छरों से करें बचाव

मानसून में डेंगू, मलेरिया और अन्य मच्छर जनित संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। गर्भावस्था के दौरान इनसे बचाव के लिए घर में मच्छरदानी, खिड़की की जाली और उपयुक्त मच्छर रिपेलेंट का इस्तेमाल किया जा सकता है। पानी जमा न होने दें और अगर बुखार, शरीर में दर्द या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं

गर्भावस्था में पर्याप्त हाइड्रेशन जरूरी है। बारिश में प्यास कम लगने के बावजूद पानी पीना न छोड़ें। हालांकि हर महिला की पानी की जरूरत अलग हो सकती है, इसलिए केवल एक तय संख्या में गिलास पानी पीने के बजाय अपने डॉक्टर की सलाह और शरीर की जरूरत के अनुसार पर्याप्त तरल लें।

हल्की एक्सरसाइज और नियमित चेकअप

अगर डॉक्टर ने किसी तरह की पाबंदी नहीं लगाई है, तो गर्भावस्था में हल्की वॉक जैसी सुरक्षित शारीरिक गतिविधि की जा सकती है। बारिश के कारण बाहर निकलना मुश्किल हो तो घर के अंदर भी हल्की गतिविधि की जा सकती है। साथ ही, डॉक्टर द्वारा बताए गए सभी प्रेग्नेंसी चेकअप समय पर करवाना बेहद जरूरी है।

डिलीवरी के बाद नवजात की देखभाल भी जरूरी

अगर बच्चे का जन्म मानसून में हो चुका है, तो नमी के कारण डायपर एरिया में रैशेज और त्वचा में जलन का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए बच्चे का डायपर गीला या गंदा होने पर तुरंत बदलें। केवल किसी तय समय के आधार पर डायपर बदलने के बजाय बच्चे की जरूरत के अनुसार उसे बदलना बेहतर है। डायपर बदलते समय बच्चे की त्वचा को हल्के हाथ से साफ करें और अच्छी तरह सुखाएं। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से डायपर रैश क्रीम का इस्तेमाल किया जा सकता है।

नोट: हर गर्भावस्था अलग होती है। डिलीवरी की तारीख नजदीक होने पर अपने गायनेकोलॉजिस्ट के संपर्क में रहें और तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, तेज पेट दर्द, पानी या खून आने, बच्चे की हरकतों में कमी या किसी अन्य चिंता की स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।
 

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