
नारी डेस्क: सावन की शिवरात्रि 11 अगस्त 2026 (मंगलवार) को मनाई जा रही है। यह पवित्र दिन भगवान शिव को समर्पित है और इसी दिन कांवड़ यात्रा का समापन तथा शिवलिंग का जलाभिषेक किया जाता है। साल का दूसरा सूर्य ग्रहण सावन शिवरात्रि के अगले दिन यानी श्रावण अमावस्या पर लगने जा रहा है। ग्रहण होने के कारण पूजा-पाठ और जलाभिषेक के समय को लेकर लोग असमंजस में हैं। चलिए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।

ये है सूर्य ग्रहण का सही समय
12 अगस्त को साल 2026 का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण लगने वाला है। पंचांग के अनुसार सावन कृष्ण चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त की सुबह 4 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर 12 अगस्त की देर रात 1 बजकर 52 मिनट तक रहने की बात कही जा रही है। सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात 9 बजकर 4 मिनट से शुरू होकर देर रात 1 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण और सूतक काल के दौरान पूजा-पाठ तथा देवी-देवताओं की प्रतिमाओं के स्पर्श को लेकर कई तरह के नियम माने जाते हैं। हालांकि इन नियमों को लेकर अलग-अलग स्थानों और परंपराओं में मतभेद भी हो सकते हैं।
यहां दिखाई देगा सूर्य ग्रहण
12 अगस्त का सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा. इसलिए यहां इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। ऐसे में देश में रहने वाले श्रद्धालु सामान्य रूप से अपना पूजा- पाठ कर सकेंगे। साल 2026 का यह अंतिम सूर्य ग्रहण अटलांटिक महासागर, आर्कटिक क्षेत्र, ग्रीनलैंड, आइसलैंड और उत्तरी स्पेन में दिखाई देगा। इस बार शिवरात्रि और सूर्य ग्रहण के बीच कम अंतर होने के कारण भक्तों के बीच यह सवाल बना हुआ है कि पूजा और जल चढ़ाने का सही समय क्या रहेगा। धार्मिक दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शिवरात्रि की पूजा उसी तिथि में पूरी की जाए।

इन बाताें का रखें ख्याल
सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जिसमें चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है और सूर्य का प्रकाश कुछ समय के लिए प्रभावित होता है। वहीं धार्मिक परंपराओं में ग्रहण को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं। इसलिए वैज्ञानिक तथ्य और धार्मिक मान्यताओं को अलग-अलग समझना जरूरी है। ग्रहण को लेकर किसी भी तरह की अफवाह या अपुष्ट जानकारी पर भरोसा करने के बजाय प्रमाणित पंचांग और स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार ही निर्णय लेना बेहतर होगा।