
नारी डेस्क: सावन शिवरात्रि हिंदुओं का एक पवित्र त्योहार है, जो पूरी तरह से भगवान शिव को समर्पित है। सावन के इस शुभ महीने में पूरे देश में भगवान शिव की पूजा की जाती है। इस माह की शिवरात्रि सबसे पवित्र दिनों में से एक होती है। इस दिन सही नियमों के साथ श्रद्धा पूर्वक पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों को उनकी कृपा प्राप्त होती है। चलिए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।

शिवलिंग पर जल चढ़ाने का शुभ मुहूर्त
हिन्दू पंचांग के अनुसार सावन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 11 अगस्त को सुबह 4 बजकर 54 मिनट पर होगी। वहीं, इसका समापन 12 अगस्त को रात 1 बजकर 52 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि को देखते हुए सावन शिवरात्रि 11 अगस्त को मनाई जाएगी। इस दिन देशभर के शिव मंदिरों में शिवलिंग पर जल चढ़ाया जाएगा। प्रथम प्रहर की पूजा: शाम 07:04 बजे से रात 09:45 बजे तक होगी, द्वितीय प्रहर की पूजा: रात 09:45 बजे से रात 12:26 बजे तक होगी, तृतीय प्रहर की पूजा: रात 12:26 बजे से सुबह 03:07 बजे तक होगी। चतुर्थ प्रहर की पूजा: सुबह 03:07 बजे से सुबह 05:49 बजे तक होगी।
इन तरीकों से करें भगवान शिव को प्रसन्न
इस दिन रुद्राभिषेक किया जाता है यह भगवान शिव की पूजा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें भगवान शिव का अभिषेक (स्नान) किया जाता है। माना जाता है कि जो व्यक्ति सावन की शिवरात्रि पर ये उपाय करता है तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। इस दिन महा मृत्युंजय मंत्र - "ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥" के जाप का भी महत्व है यह मंत्र विशेष रूप से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और स्वास्थ्य के लिए माना जाता है। भगवान शिव की महिमा का गान करने के लिए शिव चालीसा का पाठ भी अवश्य करें।

पाठ करने का नियम
पूजा स्थल और स्वयं की स्वच्छता का ध्यान रखें। मंत्रों का सही उच्चारण महत्वपूर्ण है नहीं तो लाभ की जगह नुकसान हो सकता है। पाठ करते समय श्रद्धा और भक्ति का भाव बनाए रखें। इस दिन व्रत रखना भगवान शिव को प्रसन्न करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है। भगवान शिव का अभिषेक जल, दूध और बेलपत्र से करें। शिवलिंग के सामने धूप और दीप जलाएं। इसके अलावा भोलेनाथ बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल से भी प्रसन्न होते हैं। इस दिन जीतना सभव हो सके ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। भगवान शिव की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
शिवरात्रि व्रत का उद्यापन करने का नियम
शिव पुराण के अनुसार यदि आप शिवरात्रि व्रत का उद्यापन करना चाहते हैं तो नियम और विधि को जान लें। व्यक्ति को 14 वर्षों तक लगातार शिवरात्रि का व्रत करना चाहिए फिर त्रयोदशी तिथि को दिन में एक बार भोजन करें। चतुर्दशी के दिन यानि शिवरात्रि को निराहार रहकर व्रत को पूरा करें। रात के समय किसी भी शिवालय में गौरीतिलक मंडप बनाए, उसके बीच में लिंग और भद्र मंडन बनाएं। वहां पर प्रजापत्य नामक कलशों की स्थापना करें।