नारी डेस्क : मां बनने के बाद जिंदगी में कई नए बदलाव आते हैं। खासकर स्तनपान की शुरुआत नई मां के लिए एक बिल्कुल नया अनुभव होती है। बच्चे को सही तरीके से दूध पिलाने से लेकर उसके सही लैच (Latch) को समझने तक, शुरुआत में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। टीवी एक्ट्रेस दिव्यांका त्रिपाठी ने भी हाल ही में अपने जुड़वां बच्चों को जन्म देने के बाद अपने ब्रेस्टफीडिंग अनुभव के बारे में खुलकर बात की और बताया कि यह सफर हमेशा आसान नहीं होता।
Breastfeeding की शुरुआत में आ सकती हैं कई दिक्कतें
दिव्यांका ने बताया कि बच्चे के जन्म के बाद मां को कई नई चीजें सीखनी पड़ती हैं। इसमें बच्चे को सही तरीके से स्तनपान कराना, उसका सही लैच समझना और यह जानना शामिल है कि बच्चा पर्याप्त दूध पी रहा है या नहीं। इन चीजों को समझने में मां और बच्चे दोनों को समय लग सकता है। इसलिए शुरुआती दिनों में परेशानी होने पर घबराने या खुद को दोष देने के बजाय धीरे-धीरे चीजों को समझना जरूरी है।

बच्चे के साथ मां के शरीर में भी होते हैं बदलाव
दिव्यांका ने बताया कि जब बच्चे को फीड की जरूरत होती है या वह रोता है, तो कई बार मां के शरीर को भी इसका संकेत मिलने लगता है। ऐसे में अचानक ब्रेस्ट मिल्क लीक हो सकता है। घर पर यह स्थिति सामान्य लग सकती है, लेकिन बाहर या किसी दूसरे व्यक्ति के सामने ऐसा होने पर नई मां असहज महसूस कर सकती है। इसलिए बाहर जाते समय Breast Pads और जरूरत का अन्य सामान साथ रखना मददगार हो सकता है।
फीड मिस होने पर हो सकती है परेशानी
नई मां के लिए शुरुआत में बच्चे के फीडिंग शेड्यूल को समझना आसान नहीं होता। कभी-कभी किसी काम या घर आए मेहमानों की वजह से फीड में देरी या मिस हो सकती है। दिव्यांका ने अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि उनके साथ भी ऐसा हुआ। जब वह मेहमानों की देखभाल में व्यस्त हो जाती थीं और बच्चों की फीड में देरी होती थी, तो उन्हें काफी असहजता और दर्द महसूस होता था। इस अनुभव से उन्होंने सीखा कि बच्चे की देखभाल के साथ-साथ मां को अपनी जरूरतों और आराम का भी ध्यान रखना चाहिए।

Breastfeeding में परेशानी हो तो मदद लेने से न झिझकें
दिव्यांका के मुताबिक, मां और बच्चा दोनों धीरे-धीरे एक-दूसरे को समझते हैं। शुरुआत में बच्चे का सही लैच न कर पाना या मां को स्तनपान कराने में परेशानी होना संभव है। ऐसे में घबराने या खुद को दोष देने के बजाय सही मदद लेना बेहतर है। अगर स्तनपान में लगातार परेशानी हो रही है, दर्द या अन्य समस्या बनी हुई है, तो डॉक्टर या Lactation Consultant से सलाह ली जा सकती है।
दूसरी मांओं से खुद की तुलना न करें
बच्चे के जन्म के बाद कई नई मांएं खुद की तुलना दूसरी महिलाओं से करने लगती हैं। सोशल मीडिया या आसपास की दूसरी माताओं को देखकर उन्हें लग सकता है कि बाकी सभी को Breastfeeding और Parenting की पूरी जानकारी है, जबकि उन्हें कुछ नहीं आता। दिव्यांका ने बताया कि उन्हें भी शुरुआत में ऐसा महसूस हुआ था। लेकिन बाद में उन्हें समझ आया कि हर मां और हर बच्चे का अनुभव अलग होता है। कुछ बच्चों को Breastfeeding जल्दी समझ आ जाती है, जबकि कुछ बच्चों को थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है। इसी तरह किसी मां के लिए शुरुआत आसान हो सकती है, जबकि दूसरी मां को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए दूसरों से तुलना करने के बजाय अपनी और अपने बच्चे की जरूरतों पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।

मां की सेहत भी है उतनी ही जरूरी
Breastfeeding के दौरान मां का आराम, पर्याप्त पोषण और मानसिक स्वास्थ्य भी महत्वपूर्ण है। बच्चे की देखभाल करते हुए नई मां को अपनी जरूरतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। दिव्यांका का अनुभव नई माताओं को यही याद दिलाता है कि Breastfeeding एक सीखने की प्रक्रिया है। इसमें समय लगना सामान्य है और जरूरत पड़ने पर परिवार, डॉक्टर या Lactation Consultant से मदद लेना बिल्कुल सही है।
नोट: हर मां और बच्चे की स्थिति अलग होती है। स्तनपान, दूध की मात्रा, दर्द या बच्चे के पर्याप्त दूध पीने को लेकर किसी भी तरह की चिंता होने पर अपने डॉक्टर या योग्य Lactation Consultant से व्यक्तिगत सलाह लें।