नारी डेस्क : हरियाली तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर सुखी वैवाहिक जीवन, पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत के दौरान सिर्फ पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि मन, वाणी और व्यवहार की शुद्धता का भी ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते हैं हरियाली तीज पर किन 5 बातों से बचना चाहिए।
पूजा सामग्री अधूरी न रखें
हरियाली तीज की पूजा शुरू करने से पहले सभी जरूरी सामग्री तैयार कर लेना शुभ माना जाता है। पूजा में माता पार्वती को सुहाग की सामग्री और भगवान शिव को बेलपत्र, फूल, अक्षत, धूप, दीप, फल और नैवेद्य आदि अर्पित किए जाते हैं। मान्यता है कि पूजा के बीच बार-बार उठकर सामग्री लाने के बजाय पहले से सभी चीजें व्यवस्थित कर लेना बेहतर होता है।

क्रोध और कटु वचन से बचें
व्रत का अर्थ केवल भोजन या पानी का त्याग करना नहीं माना जाता, बल्कि इस दौरान मन और वाणी पर संयम रखना भी महत्वपूर्ण बताया गया है। इसलिए हरियाली तीज के दिन किसी से विवाद करने, क्रोध करने या कटु शब्द बोलने से बचना चाहिए। शांत मन और सकारात्मक भाव से पूजा करना शुभ माना जाता है।
शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा करें
हरियाली तीज का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन से जुड़ा माना जाता है। इसलिए इस दिन केवल माता पार्वती ही नहीं, बल्कि भगवान शिव की भी विधि-विधान से पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिव-पार्वती की संयुक्त आराधना से वैवाहिक जीवन में प्रेम, विश्वास और आपसी सौहार्द बना रहता है।

संकल्प लेकर व्रत बीच में न छोड़ें
अगर आपने श्रद्धा से हरियाली तीज का व्रत रखने का संकल्प लिया है, तो अपनी क्षमता के अनुसार उसे पूरा करने का प्रयास करें। हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर जबरदस्ती निर्जला व्रत रखने से बचना चाहिए। अपनी स्वास्थ्य स्थिति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत का तरीका तय करना बेहतर होता है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता दें।
कथा और आरती करना न भूलें
हरियाली तीज की पूजा के बाद व्रत कथा का पाठ या श्रवण और भगवान शिव-माता पार्वती की आरती करना शुभ माना जाता है।पूजा के अंत में परिवार की सुख-समृद्धि, वैवाहिक जीवन में प्रेम और अखंड सौभाग्य की कामना की जाती है।

हरियाली तीज का क्या है धार्मिक महत्व?
हरियाली तीज सिर्फ व्रत का पर्व नहीं, बल्कि श्रद्धा, प्रेम और प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक भी माना जाता है। इस दिन महिलाएं हरे रंग के कपड़े और चूड़ियां पहनती हैं, मेहंदी लगाती हैं और झूला झूलकर सावन का उत्सव मनाती हैं। कई जगहों पर तीज के लोकगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सच्चे मन से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और मधुरता बनी रहती है।
ज्योतिष एवं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरियाली तीज शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का प्रतीक है। इस दिन सात्विकता, श्रद्धा और अच्छे आचरण के साथ पूजा करना महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, किसी भी धार्मिक अनुष्ठान में सबसे महत्वपूर्ण भाव सच्ची आस्था और अच्छे कर्मों को माना जाता है।