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Nari

209 किलो के मरीज की सफल सर्जरी, ऑपरेशन के लिए 32 दिन में घटाया 49 किलो वजन

  • Edited By Monika,
  • Updated: 08 Aug, 2026 04:42 PM
209 किलो के मरीज की सफल सर्जरी, ऑपरेशन के लिए 32 दिन में घटाया 49 किलो वजन

नारी डेस्क : AIIMS Delhi के डॉक्टरों ने 209 किलोग्राम वजन वाले 32 वर्षीय मरीज की बेहद चुनौतीपूर्ण बैरिएट्रिक सर्जरी सफलतापूर्वक की है। मरीज का वजन ही नहीं, बल्कि पेट की परिधि भी इतनी अधिक थी कि उसे सामान्य ऑपरेशन टेबल पर सुरक्षित तरीके से लिटाना मुश्किल था। करीब 32 दिनों की विशेष तैयारी के बाद डॉक्टरों ने लैप्रोस्कोपिक वन एनास्टोमोसिस गैस्ट्रिक बायपास (Laparoscopic One Anastomosis Gastric Bypass) सर्जरी की, जिसके बाद मरीज की हालत में तेजी से सुधार हुआ।

सांस लेने में भी हो रही थी परेशानी

अत्यधिक मोटापे के कारण मरीज का BMI करीब 74 kg/m² था। वह गंभीर ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया (Obstructive sleep apnea), सांस लेने में परेशानी, हाई ब्लड प्रेशर, प्रीडायबिटीज और डिस्लिपिडिमिया जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा था। मरीज की हालत इतनी गंभीर हो गई थी कि उसकी सांस की नली को खुला रखने के लिए उसे इमरजेंसी ट्रेकियोस्टॉमी की जरूरत पड़ी। इसके बाद भी वह एक महीने से ज्यादा समय तक CPAP सपोर्ट पर निर्भर रहा।

198 सेंटीमीटर थी पेट की परिधि

डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल मरीज का 209 किलो वजन नहीं था। उसके पेट की परिधि करीब 198 सेंटीमीटर थी। ऐसे में उसे सामान्य ऑपरेशन टेबल पर सुरक्षित तरीके से लिटाना भी आसान नहीं था। मरीज के इलाज के लिए बैरिएट्रिक सर्जन, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, इंटेंसिविस्ट, फिजिशियन, डाइटिशियन, फिजियोथेरेपिस्ट और अन्य विशेषज्ञों की टीम ने मिलकर रणनीति तैयार की।

32 दिनों तक चली सर्जरी से पहले की तैयारी

डॉक्टरों ने ऑपरेशन से पहले मरीज को करीब 32 दिनों तक बहुत कम कैलोरी वाला विशेष आहार दिया। इसके साथ श्वसन संबंधी फिजियोथेरेपी, पोषण संबंधी काउंसलिंग और संक्रमण से बचाव पर भी विशेष ध्यान दिया गया। इस तैयारी के बाद मरीज का वजन 209 किलो से घटकर 172 किलो हो गया। वहीं उसके पेट की परिधि भी करीब 20 सेंटीमीटर कम हो गई। इसके बाद डॉक्टरों ने विशेष रूप से संशोधित ऑपरेशन टेबल की मदद से मरीज को सर्जरी के लिए सुरक्षित स्थिति में रखा। इस टेबल में अतिरिक्त साइड एक्सटेंशन लगाए गए थे।

करीब 2 घंटे में पूरी हुई सर्जरी

जब मरीज की स्थिति ऑपरेशन के लिए उपयुक्त हो गई, तब डॉक्टरों ने लैप्रोस्कोपिक वन एनास्टोमोसिस गैस्ट्रिक बायपास सर्जरी की। पूरी प्रक्रिया करीब दो घंटे में सफलतापूर्वक पूरी हुई। इलाज करने वाली टीम के अनुसार, सर्जरी से पहले मरीज की सांस की स्थिति को स्थिर करना बेहद जरूरी था। ऑपरेशन के दौरान भी उसकी सांस और अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मानकों पर लगातार नजर रखी गई।

सर्जरी के बाद तेजी से हुआ सुधार

सर्जरी के बाद मरीज की हालत में लगातार सुधार देखने को मिला। धीरे-धीरे उसे CPAP मशीन से हटाया गया और सर्जरी के 13वें दिन वह बिना किसी सहारे के सामान्य रूप से सांस लेने लगा। इतना ही नहीं, मरीज अपने पैरों पर चलने लगा और रोजमर्रा के काम भी खुद करने लगा। अस्पताल से छुट्टी मिलने तक उसका वजन करीब 160 किलोग्राम रह गया था, जबकि पेट की परिधि घटकर लगभग 155 सेंटीमीटर हो गई।

डॉक्टरों ने बताया क्या रहा सबसे अहम?

डॉक्टरों के मुताबिक, इस मामले में चुनौती सिर्फ मरीज का वजन कम करना नहीं थी, बल्कि पेट की परिधि कम करना भी बेहद जरूरी था। इसी वजह से ऑपरेशन से पहले लंबी और विशेष तैयारी की गई। इलाज करने वाली टीम का कहना है कि अत्यधिक मोटापे से जूझ रहे मरीजों में जटिल सर्जरी भी संभव हो सकती है, लेकिन इसके लिए मरीज की स्थिति के अनुसार पहले से तैयारी, जोखिम का आकलन और कई विशेषज्ञों की संयुक्त देखरेख जरूरी होती है।

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