
नारी डेस्क: हिंदू धर्म में बिना मुहूर्त या लगन निकाले शादी नहीं करवाई जाती, लेकिन आज हम आपको ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां बिना किसी शुभ मुहूर्त के विवाह संपन्न कराए जाते हैं। यहां बंधी जोड़ी कभी नहीं टूटती है। मान्यता है कि जिन युवक-युवतियों के विवाह में देरी या बाधाएं आ रही होती हैं वह यहां शुभ मुहूर्त न होने पर विवाह कर सकते हैं। चलिए जानते हैं इस चमत्कारी मंदिर के बारे में विस्तार से।

हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में स्थित जालपा देवी मंदिर की जयपुर-भोपाल मार्ग पर एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। यह एक ऐसा मंदिर है जहां बिना किसी शुभ मुहूर्त के विवाह संपन्न कराए जाते हैं। बताया जाता है कि जिन लोगों को विवाह के लिए शुभ मुहूर्त नहीं मिलता, वे पोस्टकार्ड लेकर माता जालपा के दरबार में पहुंचते हैं। इसके बाद देवी के मंदिर में पंडितों द्वारा शादी का निमंत्रण कार्ड लिखा जाता है। इसके बाद 'पत्रिका' को देवी के मंदिर में वापस लाया जाता है। फिर देवी के आशीर्वाद से विवाह बिना किसी परेशानी के शुभ समय पर संपन्न हो जाता है।

मंदिर के पुजारी माता के चरणों में अर्पित ज्वार या गेहूं के दाने की गिनती कर अनोखे तरीके से विवाह का मुहूर्त निकालते हैं। मुहूर्त निकलने के बाद पुजारी एक विशेष पाती (लेटर) पर इस मुहूर्त की जानकारी लिखकर परिजनों को देते हैं। विवाह संपन्न होने के बाद नव विवाहित जोड़ा विवाह के लिए मिली पाती को मंदिर में वापस रखकर वहां से माता का आशीर्वाद लेता है। इस मंदिर में विवाह करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. मंदिर की इसी विशेषता के कारण दूर-दूर से लोग विवाह की आशा में यहां आते हैं।

इस मंदिर को भील राजाओं की कुलदेवी का मंदिर कहा जाता है। मंदिर को लेकर मान्यता है कि करीब 1100 साल पहले जालपा माता ने भक्त ज्वालानाथ की तपस्या से खुश होकर पीपल के पेड़ के नीचे दर्शन दिए थे। अभी से करीब 35 साल पहले तत्कालीन कलेक्टर अजीतसिंह ठाकुर की अगुवाई में मंदिर ट्रस्ट का गठन कर यहां विकास कार्यों की शुरूआत की। 8 अक्टूबर 1991 में मंदिर का भूमिपूजन किया गया। इसके बाद माता का भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ आज यहां मंदिर में 65 फीट ऊंचा शिखर है।