नारी डेस्क: महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं में ओवेरियन कैंसर एक गंभीर बीमारी मानी जाती है। यह कैंसर अंडाशय (ओवरी) से शुरू होता है और यदि समय रहते इसकी पहचान न हो पाए तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। दुर्भाग्य से आज भी कई महिलाएं इस बीमारी के बारे में सही जानकारी नहीं रखतीं और कई तरह की गलत धारणाओं को ही सच मान लेती हैं। यही वजह है कि जागरूकता की कमी कई बार समय पर इलाज में बाधा बन जाती है। आइए जानते हैं ओवेरियन कैंसर से जुड़े कुछ आम मिथकों और उनकी वास्तविक सच्चाई के बारे में।
क्या सिर्फ ज्यादा उम्र की महिलाओं को होता है ओवेरियन कैंसर
अक्सर यह माना जाता है कि ओवेरियन कैंसर केवल अधिक उम्र की महिलाओं को ही होता है। हालांकि, बढ़ती उम्र इस बीमारी का एक जोखिम कारक जरूर है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि कम उम्र की महिलाएं इससे सुरक्षित हैं। विशेषज्ञों के अनुसार युवा महिलाओं में भी ओवेरियन कैंसर के मामले सामने आ सकते हैं। इसलिए उम्र चाहे कोई भी हो, शरीर में होने वाले असामान्य बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार पेट फूलना, पेल्विक दर्द, भूख कम लगना या बार-बार पेशाब आने जैसी समस्याएं दिखाई दें तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

क्या HPV या Pap Test से ओवेरियन कैंसर का पता चल जाता है
कई महिलाओं को लगता है कि HPV टेस्ट या Pap Smear टेस्ट कराने से ओवेरियन कैंसर की जांच भी हो जाती है। लेकिन यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। दरअसल, HPV और Pap Smear टेस्ट मुख्य रूप से सर्वाइकल कैंसर यानी गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की जांच के लिए किए जाते हैं। वर्तमान में ऐसा कोई नियमित स्क्रीनिंग टेस्ट उपलब्ध नहीं है जो शुरुआती चरण में ओवेरियन कैंसर का पूरी तरह भरोसेमंद तरीके से पता लगा सके। इसलिए केवल Pap Test की सामान्य रिपोर्ट आने का मतलब यह नहीं है कि ओवरी पूरी तरह स्वस्थ है।
क्या टैल्कम पाउडर से बढ़ता है ओवेरियन कैंसर का खतरा
टैल्कम पाउडर और ओवेरियन कैंसर के बीच संबंध को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। कुछ पुरानी स्टडीज में दोनों के बीच संभावित संबंध की बात कही गई थी, लेकिन हाल के शोधों में इस दावे को लेकर स्पष्ट और मजबूत प्रमाण नहीं मिले हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल केवल टैल्कम पाउडर के इस्तेमाल को ओवेरियन कैंसर का सीधा कारण मानना सही नहीं होगा। इस विषय पर अभी भी शोध जारी हैं और निष्कर्ष पूरी तरह निश्चित नहीं हैं।
क्या सिर्फ अल्ट्रासाउंड या CA-125 टेस्ट से कैंसर की पुष्टि हो जाती है
बहुत सी महिलाओं को लगता है कि अल्ट्रासाउंड या CA-125 ब्लड टेस्ट करवाने से ओवेरियन कैंसर की पुष्टि हो जाती है। जबकि वास्तविकता इससे अलग है। अल्ट्रासाउंड से ओवरी में मौजूद गांठ या सिस्ट की जानकारी मिल सकती है, लेकिन यह नहीं बताया जा सकता कि वह कैंसर है या नहीं। इसी तरह CA-125 का स्तर कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में भी बढ़ सकता है। कई बार कैंसर होने के बावजूद यह रिपोर्ट सामान्य भी आ सकती है। इसलिए डॉक्टर इन जांचों के साथ अन्य मेडिकल रिपोर्ट, मरीज के लक्षण और जरूरत पड़ने पर बायोप्सी जैसी जांचों के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालते हैं।

ओवेरियन सिस्ट कैंसर में बदल जाती है
यह महिलाओं के बीच सबसे आम और सबसे बड़ा भ्रम है। ओवरी में सिस्ट मिलते ही कई महिलाएं घबरा जाती हैं और सोचने लगती हैं कि यह कैंसर का संकेत है। सच्चाई यह है कि अधिकांश ओवेरियन सिस्ट सामान्य और गैर-कैंसरयुक्त होती हैं। कई मामलों में ये बिना किसी इलाज के अपने आप ठीक भी हो जाती हैं। डॉक्टर सिस्ट का आकार, उसकी बनावट, महिला की उम्र और लक्षणों को देखकर तय करते हैं कि इलाज या सर्जरी की जरूरत है या नहीं। इसलिए हर सिस्ट को कैंसर समझना गलत है।
ओवेरियन कैंसर को लेकर जागरूक रहना क्यों जरूरी है
ओवेरियन कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य समस्याओं जैसे गैस, पेट फूलना या अपच से मिलते-जुलते हो सकते हैं। यही वजह है कि कई बार महिलाएं इन्हें नजरअंदाज कर देती हैं और बीमारी देर से पकड़ में आती है। यदि पेट में लगातार सूजन, पेल्विक दर्द, भूख कम लगना, जल्दी पेट भर जाना या बार-बार पेशाब आने जैसी शिकायतें लंबे समय तक बनी रहें तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।
सही जानकारी ही सबसे बड़ा बचाव
ओवेरियन कैंसर से जुड़े मिथक महिलाओं को भ्रमित कर सकते हैं और समय पर इलाज से दूर कर सकते हैं। यह समझना जरूरी है कि युवा महिलाएं भी इस बीमारी की शिकार हो सकती हैं, HPV टेस्ट इससे जुड़ी जांच नहीं है, हर सिस्ट कैंसर नहीं होती और केवल एक-दो टेस्ट के आधार पर कैंसर की पुष्टि नहीं की जा सकती।
स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना, नियमित मेडिकल जांच करवाना और किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करना ही इस गंभीर बीमारी से बचाव और समय पर उपचार का सबसे प्रभावी तरीका है।