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82 साल की उम्र, कांपते हाथ, नहीं मानी हार, मुंबई की सड़कों पर मेहनत कर मिसाल बने मनसुख काका

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 20 Jun, 2026 01:59 PM
82 साल की उम्र, कांपते हाथ, नहीं मानी हार, मुंबई की सड़कों पर मेहनत कर मिसाल बने मनसुख काका

नारी डसेक:  मुंबई की तेज रफ्तार जिंदगी में जहां लोग छोटी-छोटी मुश्किलों से टूट जाते हैं, वहीं 82 वर्षीय मनसुख काका अपनी मेहनत, आत्मसम्मान और जज्बे से लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गए हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी वह हर दिन अपनी छोटी सी दुकान लगाकर मेहनत करते हैं और यह साबित करते हैं कि संघर्ष करने की कोई उम्र नहीं होती। हाल ही में उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने लोगों को भावुक भी किया है और प्रेरित भी।

कोरोना के बाद बदल गई जिंदगी

मनसुख काका ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा एक साड़ी की दुकान में सेल्समैन के रूप में काम करते हुए बिताया। सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन कोरोना महामारी ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। बीमारी और इलाज में उनकी वर्षों की जमा-पूंजी खर्च हो गई। आर्थिक संकट इतना गहरा था कि जीवन दोबारा शुरू करना चुनौती बन गया। लेकिन उन्होंने हालात के आगे घुटने टेकने के बजाय खुद मेहनत करके आगे बढ़ने का फैसला किया।

बहन के बनाए स्नैक्स बेचकर चला रहे हैं गुजारा

आज मनसुख काका मुंबई के बोरिवली इलाके में एक छोटा सा स्टॉल लगाते हैं। उनकी बहन घर पर खाखरा, चकली और अन्य पारंपरिक स्नैक्स तैयार करती हैं, जिन्हें मनसुख काका लोगों तक पहुंचाते हैं। उनकी यह छोटी सी दुकान केवल कमाई का जरिया नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन जीने की उनकी इच्छा का प्रतीक बन चुकी है।

12 घंटे की मेहनत, फिर भी कमाई सिर्फ 300 रुपये

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि मनसुख काका रोज करीब 12 घंटे तक दुकान पर बैठते हैं। सुबह से लेकर देर रात तक ग्राहकों का इंतजार करते हैं, लेकिन दिनभर की मेहनत के बाद उनकी कमाई औसतन सिर्फ 300 रुपये के आसपास होती है। इसके बावजूद उनके चेहरे पर कभी निराशा नहीं दिखाई देती। वह पूरी लगन और ईमानदारी के साथ अपना काम करते हैं।

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हर बिक्री का हिसाब लिखते हैं डायरी में

मनसुख काका की सादगी और अनुशासन लोगों को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। उम्र के इस पड़ाव पर भी वह हर बिक्री का पूरा हिसाब अपनी डायरी में लिखते हैं। किस ग्राहक ने क्या खरीदा, कितनी बिक्री हुई और कितना पैसा आया वे हर छोटी-बड़ी जानकारी नोट करते हैं। यही आदत उनकी जिम्मेदारी और ईमानदारी को दर्शाती है। वीडियो बनाने वाली कंटेंट क्रिएटर आराधना चटर्जी ने जब मनसुख काका की कहानी लोगों तक पहुंचाई, तो हजारों लोग भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि मनसुख काका किसी से मदद या दान की उम्मीद नहीं रखते। वे चाहते हैं कि लोग उनके उत्पाद खरीदें और उनके काम का सम्मान करें। यही उनका स्वाभिमान है, जो उन्हें आज भी मजबूती से खड़ा रखे हुए है।

मदद का सबसे अच्छा तरीका

मनसुख काका की कहानी यह संदेश देती है कि किसी की मदद केवल पैसे देकर ही नहीं की जाती। अगर कोई व्यक्ति मेहनत करके अपना जीवन चला रहा है, तो उसके काम को समर्थन देना भी उतनी ही बड़ी मदद है। ऐसे लोगों का हौसला बढ़ाना और उनके उत्पाद खरीदना उनके आत्मसम्मान को बनाए रखने का सबसे अच्छा तरीका है।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बने मनसुख काका

82 साल की उम्र में भी मनसुख काका का संघर्ष और मेहनत यह साबित करती है कि जीवन में परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर इंसान के पास हिम्मत और आत्मविश्वास हो तो वह कभी हार नहीं मानता। आज सोशल मीडिया पर लोग उन्हें सलाम कर रहे हैं और उनकी कहानी को मेहनत, आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान की सच्ची मिसाल बता रहे हैं। मनसुख काका की यह यात्रा हमें सिखाती है कि सम्मान के साथ जीने की चाह और मेहनत करने का जज्बा इंसान को हर मुश्किल से लड़ने की ताकत देता है।
 

  

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