नारी डेस्क: साल 2026 का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगने जा रहा है। यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) होगा, जिसमें कुछ खास इलाकों में कुछ समय के लिए दिन में ही अंधेरा छा जाएगा। हालांकि भारत में यह सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा। नासा के अनुसार, ग्रहण का पूर्ण चरण ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी रूस, स्पेन और पुर्तगाल के एक छोटे हिस्से से होकर गुजरेगा, जबकि यूरोप, उत्तरी अमेरिका और उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका के कई हिस्सों में आंशिक ग्रहण दिखाई देगा।
4 घंटे से ज्यादा चलेगा पूरा ग्रहण
भारतीय समय के अनुसार सूर्य ग्रहण रात 9 बजकर 4 मिनट पर शुरू होने और देर रात तक चलने की जानकारी दी गई है। अलग-अलग चरणों में इसकी स्थिति बदलती रहेगी। हालांकि किसी एक जगह पर पूर्ण सूर्य ग्रहण का समय कुछ ही मिनटों तक रहेगा। नासा के मुताबिक, पूर्ण ग्रहण की अधिकतम अवधि करीब 2 मिनट 18 सेकंड तक हो सकती है।

भारतीय समय के हिसाब से दिए गए प्रमुख समय इस तरह बताए जा रहे हैं
सूर्य ग्रहण शुरू: रात 9:04 बजे
पूर्ण ग्रहण का पहला चरण: रात 10:28 बजे
ग्रहण का चरम: रात 11:16 बजे
पूर्ण ग्रहण समाप्त: रात 12:04 बजे
सूर्य ग्रहण पूरी तरह समाप्त: देर रात 1:28 बजे
भारत में दिखाई नहीं देगा सूर्य ग्रहण
इस बार भारत के लोगों को सूर्य ग्रहण का नजारा देखने का मौका नहीं मिलेगा। ग्रहण की छाया भारत के ऊपर से नहीं गुजरेगी। इसलिए देश में दिन के समय अंधेरा छाने जैसी स्थिति भी नहीं बनेगी। नासा के मुताबिक, पूर्ण सूर्य ग्रहण की पट्टी उत्तरी रूस से शुरू होकर ग्रीनलैंड, आइसलैंड और स्पेन तक जाएगी। पुर्तगाल के एक छोटे हिस्से में भी पूर्ण ग्रहण दिखाई देगा।
इन देशों में दिखेगा आंशिक ग्रहण
पूर्ण ग्रहण के अलावा दुनिया के कई हिस्सों में सूर्य का कुछ भाग चंद्रमा की छाया से ढका हुआ नजर आएगा। कनाडा, अमेरिका के कुछ हिस्सों, यूरोप और उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका में आंशिक सूर्य ग्रहण देखा जा सकेगा। लंदन, पेरिस, बर्लिन, मैड्रिड, मिलान और कई अन्य यूरोपीय शहरों में भी आंशिक ग्रहण दिखाई देगा। कुछ इलाकों में सूर्यास्त के आसपास ग्रहण देखने को मिलेगा।

सूर्य ग्रहण आखिर लगता कैसे है?
सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है। इस दौरान चंद्रमा की छाया पृथ्वी के कुछ हिस्सों पर पड़ती है। जहां चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है, वहां पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देता है, जबकि जहां सूर्य का केवल कुछ हिस्सा ढकता है, वहां आंशिक ग्रहण नजर आता है।
सावन अमावस्या पर पड़ रहा ग्रहण
यह सूर्य ग्रहण अमावस्या के दिन पड़ रहा है। धार्मिक मान्यताओं में अमावस्या को स्नान, दान और पितरों के तर्पण के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देने के कारण धार्मिक नियमों और सूतक काल को लेकर अलग-अलग पंचांगों में अलग मत मिल सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सूर्य ग्रहण से करीब 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू माना जाता है। लेकिन जो ग्रहण किसी स्थान पर दिखाई ही नहीं देता, वहां सूतक मानने को लेकर परंपराओं में अंतर है। इसलिए इस संबंध में अपने स्थानीय पंचांग या परंपरा को प्राथमिकता देना बेहतर रहेगा।
ग्रहण के दौरान रखें आंखों का खास ख्याल
सूर्य ग्रहण को देखने के दौरान सबसे जरूरी बात आंखों की सुरक्षा है। नासा के अनुसार, आंशिक ग्रहण के दौरान बिना उचित solar viewing glasses या सुरक्षित solar filter के सीधे सूर्य की ओर देखना आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। साधारण धूप के चश्मे सूर्य को देखने के लिए सुरक्षित नहीं होते।
पूर्ण ग्रहण के दौरान भी सुरक्षा नियमों का ध्यान रखना जरूरी है। पूर्णता के बेहद छोटे चरण में ही बिना सुरक्षा के सूर्य को देखा जा सकता है; पूर्णता से पहले और बाद के चरणों में सुरक्षित solar viewer का इस्तेमाल करना चाहिए।

वैज्ञानिकों के लिए भी खास मौका
12 अगस्त का यह पूर्ण सूर्य ग्रहण वैज्ञानिकों के लिए भी खास है। पूर्ण ग्रहण के दौरान सूर्य का चमकीला हिस्सा चंद्रमा के पीछे छिप जाता है और उसकी बाहरी परत यानी corona को बेहतर तरीके से देखा जा सकता है। नासा की टीमें इस दौरान सूर्य और पृथ्वी के वातावरण में होने वाले बदलावों का अध्ययन करने की तैयारी कर रही हैं। कुल मिलाकर, 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण खगोलीय दृष्टि से एक बेहद खास घटना है। भारत में यह दिखाई नहीं देगा, लेकिन उत्तरी रूस, ग्रीनलैंड, आइसलैंड और स्पेन समेत कई देशों में लोग इसे प्रत्यक्ष देख सकेंगे।