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ब्रेस्ट पंप या डायरेक्ट फीडिंग? जानिए बच्चे के लिए कौन सा तरीका है Best

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 11 Aug, 2026 05:33 PM
ब्रेस्ट पंप या डायरेक्ट फीडिंग? जानिए बच्चे के लिए कौन सा तरीका है Best

नारी डेस्क: नवजात बच्चे के जन्म के बाद मां के सामने सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि बच्चे को पर्याप्त और सही पोषण कैसे दिया जाए। मां का दूध शिशु के लिए सबसे महत्वपूर्ण पोषण स्रोतों में से एक माना जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, जन्म के बाद शुरुआती छह महीनों तक बच्चे को केवल मां का दूध देने की सलाह दी जाती है। इसके बाद बच्चे को जरूरी ठोस आहार शुरू कराने के साथ स्तनपान जारी रखा जा सकता है। आज के समय में कई माताएं सीधे स्तनपान कराने के साथ-साथ ब्रेस्ट पंप का भी इस्तेमाल करती हैं। खासकर कामकाजी महिलाओं के लिए पंप की मदद से दूध निकालकर बाद में बच्चे को देना सुविधाजनक हो सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि बच्चे के लिए डायरेक्ट ब्रेस्टफीडिंग बेहतर है या ब्रेस्ट पंप से निकाला गया दूध?

डायरेक्ट ब्रेस्टफीडिंग क्यों मानी जाती है बेहतर?

अगर मां और बच्चा स्वस्थ हैं और सीधे स्तनपान कराने में कोई परेशानी नहीं है, तो बच्चे को सीधे स्तन से दूध पिलाना एक अच्छा विकल्प है। इसमें बच्चे को मां का ताजा दूध सीधे मिलता है और मां-बच्चे के बीच त्वचा का संपर्क भी बना रहता है। WHO के अनुसार, शुरुआती छह महीनों में एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग बच्चे के विकास और स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मां के दूध में बच्चे की शुरुआती जरूरतों के लिए जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं और इसमें ऐसे तत्व भी होते हैं जो कई सामान्य संक्रमणों से बचाव में मदद करते हैं। सीधे स्तनपान कराने से बच्चे को उसकी जरूरत के मुताबिक दूध मिल सकता है। साथ ही, मां और बच्चे के बीच होने वाला शारीरिक संपर्क बच्चे को शांत करने और बॉन्डिंग मजबूत करने में भी मदद करता है।

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ब्रेस्ट पंप हमेशा गलत विकल्प नहीं

ऐसा नहीं है कि ब्रेस्ट पंप का इस्तेमाल करने से बच्चे को मां के दूध के फायदे नहीं मिलेंगे। पंपिंग उन माताओं के लिए काफी उपयोगी हो सकती है जो किसी वजह से बच्चे को सीधे स्तनपान नहीं करा पा रही हैं। काम पर जाने वाली मां, बच्चे से कुछ समय के लिए दूर रहने वाली महिला या ऐसी मां जिसे सीधे फीडिंग में असुविधा हो रही हो, वह दूध निकालकर सुरक्षित तरीके से बच्चे को दे सकती है। इस तरह बच्चा मां के दूध से मिलने वाले पोषण से वंचित नहीं होता। इसलिए असली फर्क मां के दूध और पंप किए गए दूध के बीच नहीं, बल्कि उसे निकालने, रखने और बच्चे तक सुरक्षित तरीके से पहुंचाने की प्रक्रिया में ज्यादा होता है।

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पंप का इस्तेमाल करते समय सफाई का रखें खास ध्यान

अगर ब्रेस्ट पंप का इस्तेमाल किया जा रहा है, तो साफ-सफाई को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पंप करने से पहले हाथ अच्छी तरह धोना और दूध के संपर्क में आने वाले पंप के हिस्सों को साफ रखना जरूरी है। CDC के मुताबिक, पंप के उन हिस्सों को हर इस्तेमाल के बाद साफ करना चाहिए जो मां के दूध के संपर्क में आते हैं, क्योंकि दूध के अवशेष में कीटाणु तेजी से बढ़ सकते हैं। निकाले गए दूध को भी साफ, फूड-ग्रेड कंटेनर में सुरक्षित तरीके से रखना चाहिए। कंटेनर पर दूध निकालने की तारीख और समय लिखना भी उपयोगी होता है, ताकि उसे सही समय सीमा के भीतर इस्तेमाल किया जा सके।

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बोतल से दूध पिलाने में क्यों बरतें सावधानी

पंप से निकाला हुआ दूध बच्चे को किस तरीके से दिया जाए, यह भी महत्वपूर्ण है। बोतल एक विकल्प हो सकती है, लेकिन हर बच्चे के लिए एक ही तरीका जरूरी नहीं होता। कुछ परिस्थितियों में डॉक्टर या लैक्टेशन कंसल्टेंट बच्चे की उम्र और स्थिति के हिसाब से कप या दूसरे फीडिंग तरीकों की सलाह दे सकते हैं। अगर मां चाहती है कि बच्चा सीधे स्तनपान भी करता रहे, तो फीडिंग के तरीके में बदलाव करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहता है, खासकर तब जब बच्चे को सीधे स्तन से दूध पीने में परेशानी हो रही हो।

बच्चे के लिए आखिर कौन सा तरीका बेहतर

अगर मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं और डायरेक्ट ब्रेस्टफीडिंग आसानी से हो रही है, तो सीधे स्तनपान कराना सबसे सरल और प्राकृतिक विकल्प है। WHO पहले छह महीनों तक एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग की सलाह देता है। लेकिन अगर किसी वजह से मां सीधे फीड नहीं करा पा रही है, तो ब्रेस्ट पंप के जरिए अपना दूध निकालकर बच्चे को देना भी एक उपयोगी विकल्प है। सबसे जरूरी बात यह है कि मां को सही जानकारी, पर्याप्त सहयोग और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या लैक्टेशन विशेषज्ञ की मदद मिले। हर मां की परिस्थिति अलग होती है। इसलिए केवल यह सोचकर तनाव लेने की जरूरत नहीं कि बच्चे को सीधे स्तनपान ही कराया जाए या पंप से दूध दिया जाए। बच्चे को सुरक्षित तरीके से मां का दूध मिल रहा है और मां-बच्चे दोनों स्वस्थ हैं, तो यही सबसे अहम बात है।
  
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