नारी डेस्क: बच्चों के दूध के दांतों को लेकर अक्सर माता-पिता यह सोचकर लापरवाही कर देते हैं कि ये तो बाद में गिर ही जाएंगे। लेकिन ऐसा करना बच्चे के दांतों की सेहत पर भारी पड़ सकता है। छोटी उम्र में दांतों में कैविटी होने से दर्द, संवेदनशीलता और संक्रमण जैसी परेशानियां हो सकती हैं। समय रहते दांतों की सही देखभाल की जाए तो इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है। AIIMS दिल्ली के बाल दंत चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. विजय प्रकाश माथुर ने बच्चों में होने वाली Early Childhood Caries यानी कम उम्र में दांतों की सड़न को लेकर जरूरी जानकारी साझा की है। AIIMS के आधिकारिक वीडियो में उन्होंने इसके शुरुआती संकेत, कारण और दांतों को कैविटी से बचाने के तरीकों के बारे में बताया है।
बच्चों के दांतों में कैविटी के संकेत क्या हैं
बच्चे के दांतों पर सफेद, भूरे या काले धब्बे दिखाई देना कैविटी का शुरुआती संकेत हो सकता है। इसके अलावा अगर बच्चे को खाना चबाते समय दर्द हो, दांतों में बार-बार खाना फंसे या रात के समय दांत में तकलीफ बढ़े, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। छोटे बच्चों में दांतों की सड़न को Early Childhood Caries कहा जाता है। यह समस्या प्री-स्कूल उम्र में भी शुरू हो सकती है। शुरुआत में मामूली नजर आने वाली कैविटी अगर बढ़ती जाए तो दांत में दर्द और संक्रमण की समस्या पैदा कर सकती है।

आखिर बच्चों के दांत क्यों सड़ने लगते हैं
दांतों की सफाई ठीक से न होना बच्चों में कैविटी का एक बड़ा कारण हो सकता है। जब दांतों की सतह पर जमा गंदगी और भोजन के कण नियमित रूप से साफ नहीं होते, तो वहां बैक्टीरिया की परत बनने लगती है। इसे प्लाक कहा जाता है। प्लाक में मौजूद बैक्टीरिया एसिड बनाते हैं, जो धीरे-धीरे दांतों की बाहरी परत यानी इनेमल को नुकसान पहुंचा सकता है। समय पर सफाई न होने पर यही प्रक्रिया आगे बढ़कर दांतों में सड़न का कारण बन सकती है। बच्चों में ज्यादा मीठे खाद्य पदार्थ और खराब ब्रशिंग आदतें भी दांतों की सड़न का जोखिम बढ़ा सकती हैं।
इलाज में देरी करने पर बढ़ सकती है परेशानी
दांत में कैविटी होने के बाद अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो समस्या सिर्फ दांत तक सीमित नहीं रह सकती। सड़न बढ़ने पर बच्चे को तेज दर्द, दांत के आसपास सूजन और संक्रमण जैसी परेशानियां हो सकती हैं। इसीलिए दांतों पर असामान्य धब्बे दिखने, लगातार दर्द होने या बच्चे को खाना खाने में परेशानी होने पर डेंटिस्ट से जांच कराना बेहतर रहता है। खासकर छोटे बच्चों में दांतों की समस्या को केवल यह सोचकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए कि दूध के दांत कुछ साल बाद गिर जाएंगे।
दांत निकलने से पहले भी शुरू कर दें सफाई
बच्चे के दांत निकलने का इंतजार करके ही ओरल केयर शुरू करना जरूरी नहीं है। डॉक्टर की सलाह के मुताबिक, जब तक दांत नहीं निकले हों, तब भी बच्चे के मसूड़ों को साफ रखने की आदत डाली जा सकती है। इसके लिए साफ और मुलायम गीले कपड़े से मसूड़ों को धीरे-धीरे साफ किया जा सकता है। जैसे ही बच्चे के दांत निकलने शुरू हों, उनकी नियमित सफाई पर ध्यान देना चाहिए।
दिन में दो बार ब्रश करना जरूरी
बच्चे के दांत निकलने के बाद दिन में दो बार ब्रश कराने की आदत डालना जरूरी है। सुबह और रात को दांत साफ करने से दांतों पर जमा प्लाक और भोजन के अवशेष हटाने में मदद मिलती है। ब्रश करते समय बच्चे के दांतों की सिर्फ सामने वाली सतह पर ध्यान न दें। अंदरूनी, बाहरी और चबाने वाली सतहों को भी अच्छी तरह साफ करना चाहिए, ताकि किसी हिस्से में गंदगी जमा न रह जाए।
बच्चों के दांत कैसे ब्रश करें
बच्चे के दांत साफ करते समय ब्रश को बहुत जोर से रगड़ने की जरूरत नहीं होती। हल्के हाथ से ब्रश को दांतों पर चलाना चाहिए और हर दांत की अलग-अलग सतह को साफ करना चाहिए। ब्रश को लगभग 45 डिग्री के कोण पर रखकर हल्के हाथ से छोटे-छोटे गोलाकार मूवमेंट में सफाई की जा सकती है। ऊपरी और निचले दोनों दांतों की बाहरी और अंदरूनी सतह के साथ चबाने वाली सतह पर भी ब्रश करना चाहिए। पूरी सफाई में करीब दो मिनट का समय देना उपयोगी है। AIIMS के वीडियो में बच्चों के दांतों की सही ब्रशिंग तकनीक और कैविटी से बचाव पर भी जानकारी दी गई है।

मसूड़ों और जीभ की सफाई भी रखें ध्यान
बच्चे की ओरल हाइजीन सिर्फ दांतों तक सीमित नहीं है। मसूड़ों और जीभ की सफाई पर भी ध्यान देना चाहिए। नियमित सफाई से मुंह की स्वच्छता बनाए रखने में मदद मिलती है और बच्चे में शुरू से ही अच्छी ओरल केयर की आदत विकसित होती है। माता-पिता को खास तौर पर छोटे बच्चों की ब्रशिंग पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि शुरुआती उम्र में बच्चे खुद हर दांत को अच्छी तरह साफ नहीं कर पाते।
शुरुआत से आदत डालें, बाद में परेशानी से बचें
बच्चों में दांतों की सड़न को लेकर सबसे जरूरी बात यही है कि समस्या शुरू होने का इंतजार न किया जाए। दांत निकलने के साथ ही उनकी नियमित सफाई, सही ब्रशिंग और खानपान की आदतों पर ध्यान देना चाहिए। AIIMS के विशेषज्ञ भी बच्चों में Early Childhood Caries की रोकथाम पर जोर देते हैं। नियमित ओरल हाइजीन के साथ समय-समय पर दांतों की जांच कराना भी फायदेमंद रहता है। अगर बच्चे के दांत में दर्द, सूजन या धब्बे दिखाई दें, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय बाल दंत रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। बच्चे के दांतों में दर्द, या लगातार परेशानी होने पर जांच और व्यक्तिगत सलाह लें।