नारी डेस्कः एड़ियों में दर्द होने की समस्या आप महिलाओं मे आम ही सुनते हैं लेकिन इसी के साथ एक और दिक्कत जो अब आप हर 5 में से 2 व्यक्तियों के मुंह से सुन ही लेते हैं कि उनकी एड़ियों से सेंक निकलता है या पैरों के तलवों में जलन होती है। एड़ियों या पैरों के तलवों में लगातार जलन को अक्सर लोग गर्मी, थकान या ज्यादा चलने का नतीजा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर यह समस्या बार-बार होती है या लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसके पीछे नसों से जुड़ी समस्या, डायबिटीज, विटामिन की कमी, थायरॉइड, किडनी की बीमारी या त्वचा का संक्रमण जैसी कई वजहें हो सकती हैं। पैरों में जलन का एक आम कारण पेरिफेरल न्यूरोपैथी (Peripheral Neuropathy) है, जिसमें पैरों की नसों को नुकसान पहुंचने के कारण जलन, झनझनाहट, सुन्नपन या चुभन महसूस हो सकती है।
डायबिटीक मरीजों को रह सकती दिक्कत
लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ा रहने से पैरों की नसों को नुकसान पहुंच सकता है। इसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है। इसमें एड़ियों और तलवों में जलन के साथ झनझनाहट, सुन्नपन या चुभने जैसा दर्द भी हो सकता है। अगर आप डायबिटीज के मरीज है और आपको एड़ियों या पैरों में जलन भी रहती है तो डॉक्टरी सलाह जरूर लें।
विटामिन B12 की कमी
विटामिन B12 और कुछ अन्य B विटामिन नसों के सही काम के लिए जरूरी होते हैं। इनकी कमी होने पर नसों से जुड़े लक्षणों में पैरों में जलन, झनझनाहट और सुन्नपन शामिल हो सकते हैं। अगर जलन लगातार बनी रहे तो डाक्टरी सलाह से विटामिन बी12 का टेस्ट करवाएं।

थायरॉइड की समस्या
हाइपोथायरॉइडिज्म यानी थायरॉइड हार्मोन की कमी भी कुछ लोगों में नसों से जुड़ी समस्या और पैरों में जलन का कारण बन सकती है।
किडनी या लिवर से जुड़ी समस्या
किडनी या लिवर की कुछ बीमारियां भी पेरिफेरल न्यूरोपैथी से जुड़ी हो सकती हैं, जिसके कारण पैरों में जलन या असामान्य संवेदनाएं महसूस हो सकती हैं। किडनी और लिवर की दिक्कत से जुड़े व्यक्ति को अक्सर पैरों में सूजन के साथ झनझनाहट और जलन की समस्या देखने को मिलती है।
फंगल इंफेक्शन
अगर जलन के साथ पैरों में खुजली, त्वचा का छिलना, लाल चकत्ते या उंगलियों के बीच सफेद/गीली त्वचा भी है, तो फंगल इंफेक्शन भी कारण हो सकता है।
नसों पर दबाव या चोट
किसी नस पर दबाव पड़ने, चोट लगने या कुछ विशेष नर्व-कंप्रेशन की समस्या के कारण भी पैर या एड़ी में जलन, दर्द या झनझनाहट हो सकती है।
एड़ियों की जलन से बचने के लिए क्या करें?
सबसे पहले इसके मूल कारण का पता लगाना जरूरी है। यदि जलन लगातार बनी हुई है, तो डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार, ब्लड शुगर/HbA1c, विटामिन B12, थायरॉइड और अन्य जरूरी जांच की सलाह दे सकते हैं। डायबिटीज होने पर ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना, संतुलित आहार लेना और धूम्रपान से बचना नसों को होने वाले नुकसान को कम करने में मदद कर सकता है। पैरों को साफ और सूखा रखें, सही फिटिंग वाले जूते पहनें और नंगे पैर चलने से बचें। खासकर यदि पैरों में सुन्नपन भी है, तो रोजाना पैरों को देखकर किसी कट, छाले या घाव की जांच करें, क्योंकि नसों की संवेदना कम होने पर चोट का पता देर से चल सकता है।
कब डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें?
अगर जलन लगातार कई हफ्तों से बनी हुई है, धीरे-धीरे बढ़ रही है, पैरों से ऊपर की ओर फैल रही है या इसके साथ सुन्नपन, कमजोरी, संतुलन बिगड़ना या घाव का ठीक न होना जैसी समस्या है, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
जरूरी बात: एड़ियों में जलन का केवल लक्षण देखकर किसी एक बीमारी का संकेत भी हो सकता है। सही कारण जानने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है। आपके टेस्ट और रूटीन चेकअप से ही आपको सही कारण की जानकारी मिल सकती है।