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40 के बाद अचानक बढ़ने लगता है कोलेस्ट्रॉल? वजह सिर्फ खानपान नहीं, ये बदलाव भी हैं जिम्मेदार

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 14 Aug, 2026 11:20 AM
40 के बाद अचानक बढ़ने लगता है कोलेस्ट्रॉल? वजह सिर्फ खानपान नहीं, ये बदलाव भी हैं जिम्मेदार

  नारी डेस्क:  40 की उम्र पार करने के बाद शरीर पहले की तरह काम नहीं करता। मेटाबॉलिज्म में बदलाव आने लगता है, रोजमर्रा की शारीरिक गतिविधि कम हो सकती है और वजन, खासकर पेट के आसपास की चर्बी बढ़ने लगती है। इन बदलावों का असर सिर्फ शरीर के आकार पर नहीं पड़ता, बल्कि ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसे कई स्वास्थ्य संकेतकों पर भी दिखाई दे सकता है। अक्सर माना जाता है कि कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की सबसे बड़ी वजह तला-भुना या ज्यादा फैट वाला खाना है। खानपान निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ शरीर में होने वाले बदलाव, आनुवंशिक कारण, कम शारीरिक गतिविधि और कुछ स्वास्थ्य समस्याएं भी कोलेस्ट्रॉल के स्तर को प्रभावित कर सकती हैं। 

40 के बाद कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की शुरुआत क्यों होती है

उम्र बढ़ने के साथ शरीर की ऊर्जा खर्च करने की क्षमता और शरीर की संरचना में बदलाव आ सकते हैं। अगर पहले जैसी ही कैलोरी ली जा रही हो, लेकिन शारीरिक गतिविधि कम हो जाए, तो वजन बढ़ने की संभावना रहती है। मोटापा और एक्सरसाइज की कमी हाई कोलेस्ट्रॉल के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। इसके अलावा, उम्र बढ़ने के साथ लिवर की रक्त से LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल हटाने की क्षमता कम हो सकती है। यही वजह है कि 40 की उम्र के बाद कुछ लोगों में LDL का स्तर बढ़ने लगता है, भले ही उनके खानपान में बहुत बड़ा बदलाव न आया हो। 

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हार्मोनल बदलाव भी डालते हैं असर

40 के बाद महिलाओं और पुरुषों में होने वाले हार्मोनल बदलाव भी शरीर के मेटाबॉलिज्म और फैट के वितरण को प्रभावित कर सकते हैं। खासकर महिलाओं में मेनोपॉज के आसपास होने वाले बदलावों के दौरान शरीर की संरचना और लिपिड प्रोफाइल में परिवर्तन देखा जा सकता है। पुरुषों में भी उम्र के साथ हार्मोन और शरीर में फैट के वितरण में बदलाव हो सकते हैं। हालांकि, कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की वजह हर व्यक्ति में एक जैसी नहीं होती। इसलिए केवल उम्र या हार्मोन को इसका एकमात्र कारण मानना सही नहीं होगा।

लिवर की भूमिका को समझना भी जरूरी है

कोलेस्ट्रॉल के मामले में लिवर की भूमिका काफी अहम होती है। शरीर में मौजूद LDL को रक्त से हटाने की प्रक्रिया में लिवर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उम्र बढ़ने के साथ यह प्रक्रिया कुछ लोगों में पहले की तुलना में कम प्रभावी हो सकती है, जिससे रक्त में LDL का स्तर बढ़ सकता है। यही कारण है कि 40 के बाद नियमित जांच को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सिर्फ यह सोचकर कि खानपान ठीक है, कोलेस्ट्रॉल की समस्या नहीं होगी, सही नहीं है।

एक्सरसाइज कम होना भी बड़ी वजह

उम्र बढ़ने के साथ काम का दबाव, परिवार की जिम्मेदारियां और व्यस्त दिनचर्या के कारण लोगों की शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है। लंबे समय तक बैठे रहना और नियमित व्यायाम न करना वजन बढ़ने के साथ-साथ कोलेस्ट्रॉल प्रोफाइल पर भी असर डाल सकता है। नियमित शारीरिक गतिविधि HDL यानी अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बेहतर बनाए रखने में मदद करती है।  

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पेट की चर्बी बढ़ने पर भी दें ध्यान

40 के बाद कई लोगों में वजन बढ़ने के साथ पेट के आसपास की चर्बी बढ़ने लगती है। ज्यादा वजन और मोटापा हाई कोलेस्ट्रॉल के साथ-साथ डायबिटीज और हृदय संबंधी समस्याओं के जोखिम को भी बढ़ा सकते हैं।  इसलिए इस उम्र में सिर्फ मशीन पर दिखने वाले वजन पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। कमर का बढ़ता घेरा भी इस बात का संकेत हो सकता है कि शरीर में मेटाबॉलिक बदलाव हो रहे हैं।

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सिर्फ खानपान को जिम्मेदार मानना सही नहीं

खाने में ज्यादा सैचुरेटेड और ट्रांस फैट लेना LDL को बढ़ा सकता है। इसके अलावा मोटापा, एक्सरसाइज की कमी, धूम्रपान और कुछ स्वास्थ्य समस्याएं भी कोलेस्ट्रॉल को प्रभावित कर सकती हैं। कुछ मामलों में आनुवंशिक कारण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।  इसलिए अगर किसी व्यक्ति का खानपान ठीक होने के बावजूद कोलेस्ट्रॉल बढ़ रहा है, तो डॉक्टर से पूरी स्थिति की जांच कराना बेहतर होता है।

किन लोगों को हार्ट डिजीज का जोखिम ज्यादा हो सकता है

हर व्यक्ति में हाई कोलेस्ट्रॉल का असर एक जैसा नहीं होता। परिवार में कम उम्र में हृदय रोग का इतिहास, डायबिटीज, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, धूम्रपान और अन्य मेटाबॉलिक समस्याएं हृदय संबंधी जोखिम को बढ़ा सकती हैं।  इसी वजह से सिर्फ कुल कोलेस्ट्रॉल की संख्या देखकर किसी व्यक्ति का हार्ट रिस्क तय नहीं किया जाता। डॉक्टर उम्र, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान, पारिवारिक इतिहास और दूसरे जोखिम कारकों को भी ध्यान में रखते हैं।

40 के बाद कौन सी जांच करानी चाहिए

40 की उम्र के बाद समय-समय पर लिपिड प्रोफाइल कराना उपयोगी हो सकता है। इसमें LDL, HDL और ट्राइग्लिसराइड्स जैसी चीजों की जानकारी मिलती है। इसके साथ ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और वजन पर भी नजर रखना जरूरी है। 2026 की ACC/AHA डिस्लिपिडेमिया गाइडलाइन के अनुसार, कुछ लोगों में सामान्य लिपिड प्रोफाइल के अलावा Lipoprotein(a) की जांच कम से कम एक बार जीवन में की जा सकती है। वहीं, खास परिस्थितियों में ApoB जैसी जांच जोखिम का आकलन करने में मदद कर सकती है।  जिन लोगों में हार्ट अटैक या स्ट्रोक का जोखिम स्पष्ट नहीं होता, उनके लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार अतिरिक्त जांचों पर भी विचार कर सकते हैं। कुछ मामलों में 40 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पुरुषों और 45 वर्ष या उससे अधिक उम्र की महिलाओं में कोरोनरी आर्टरी कैल्शियम यानी CAC स्कोरिंग भी जोखिम का आकलन करने में मदद कर सकती है। 

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40 के बाद किन बातों का रखें ध्यान

इस उम्र में कोलेस्ट्रॉल को लेकर सबसे जरूरी बात यह है कि इसे केवल उम्र का सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज न करें। संतुलित खानपान, नियमित शारीरिक गतिविधि, वजन को नियंत्रण में रखना और धूम्रपान से दूरी बनाना हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। अगर रिपोर्ट में LDL या ट्राइग्लिसराइड्स बढ़े हुए आते हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेकर पूरे हार्ट रिस्क का आकलन कराएं। कुछ लोगों को केवल जीवनशैली में बदलाव से फायदा हो सकता है, जबकि ज्यादा जोखिम वाले लोगों को दवाओं की जरूरत भी पड़ सकती है। उपचार का फैसला व्यक्ति की उम्र, रिपोर्ट और दूसरे जोखिम कारकों को देखकर किया जाता है।  

 
 

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