14 AUGFRIDAY2026 6:41:54 PM
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पित्त की थैली में कैसे बनती है पथरी? जानें कारण, लक्षण, जांच और इलाज

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 14 Aug, 2026 04:18 PM
पित्त की थैली में कैसे बनती है पथरी? जानें कारण, लक्षण, जांच और इलाज

नारी डेस्क:   पित्त की थैली यानी गॉलब्लैडर शरीर का एक छोटा सा अंग है, जो लिवर के ठीक नीचे मौजूद होता है। इसमें लिवर से बनने वाला पित्त जमा रहता है और खाना पचाने की प्रक्रिया में इसकी अहम भूमिका होती है। कई बार इसी पित्त में मौजूद कुछ पदार्थ असंतुलित हो जाते हैं और धीरे-धीरे छोटे-छोटे कठोर कण बनने लगते हैं। इन्हें ही गॉलस्टोन या पित्त की पथरी कहा जाता है।  दिलचस्प बात यह है कि हर पथरी परेशानी पैदा नहीं करती। कई लोगों में पथरी मौजूद होने के बावजूद लंबे समय तक कोई लक्षण दिखाई नहीं देता। समस्या तब शुरू होती है जब पथरी पित्त की नली में फंसकर उसके रास्ते को रोक देती है।

पित्त की थैली में पथरी आखिर बनती कैसे है

पित्त में मुख्य रूप से कोलेस्ट्रॉल, बिलीरुबिन और बाइल सॉल्ट जैसे पदार्थ होते हैं। इनका संतुलन बिगड़ने पर पथरी बनने की शुरुआत हो सकती है। अगर पित्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा जरूरत से ज्यादा हो जाए, तो यह छोटे क्रिस्टल के रूप में जमना शुरू कर सकता है और समय के साथ पथरी का रूप ले सकता है। इसी तरह बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ना भी पथरी बनने की एक वजह हो सकती है। एक और स्थिति में पित्त की थैली ठीक से या पर्याप्त बार खाली नहीं होती। ऐसे में पित्त ज्यादा गाढ़ा हो सकता है और उसमें पथरी बनने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि, हर व्यक्ति में पथरी बनने की एक ही वजह नहीं होती और कई बार इसके पीछे एक से ज्यादा कारण काम करते हैं।

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किन लोगों में गॉलस्टोन का खतरा ज्यादा रहता है

पित्त की पथरी किसी को भी हो सकती है, लेकिन कुछ लोगों में इसका जोखिम अपेक्षाकृत ज्यादा देखा जाता है। अधिक वजन या मोटापा, परिवार में गॉलस्टोन का इतिहास, बढ़ती उम्र और कुछ स्वास्थ्य समस्याएं इसके खतरे को बढ़ा सकती हैं। महिलाओं में भी गॉलस्टोन की संभावना पुरुषों की तुलना में अधिक होती है। बहुत तेजी से वजन कम करना भी जोखिम बढ़ा सकता है। खासकर क्रैश डाइट या बेहद कम कैलोरी वाली डाइट के कारण अचानक वजन घटने पर पित्त की पथरी बनने की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए वजन कम करने की कोशिश हमेशा धीरे-धीरे और संतुलित तरीके से करनी चाहिए। 

हर पथरी में लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं

गॉलस्टोन वाले कई लोगों को पता ही नहीं होता कि उनकी पित्त की थैली में पथरी है। ऐसी पथरी को आमतौर पर साइलेंट गॉलस्टोन कहा जाता है। जब तक पथरी पित्त की नली को ब्लॉक नहीं करती, तब तक किसी तरह की खास परेशानी न होना संभव है।  लेकिन जब पथरी नली में फंसती है, तो अचानक तेज दर्द शुरू हो सकता है। यह दर्द अक्सर पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में महसूस होता है और कभी-कभी पीठ या दाहिने कंधे तक भी पहुंच सकता है। कुछ लोगों में यह दर्द भारी या तला-भुना खाना खाने के बाद ज्यादा महसूस होता है। 

गॉलस्टोन के ये लक्षण दिखें तो रहें सावधान

पित्त की पथरी के कारण पेट में तेज दर्द के अलावा मतली और उल्टी जैसी परेशानी भी हो सकती है। कुछ मामलों में दर्द कई घंटों तक बना रह सकता है। अगर पित्त की नली में रुकावट ज्यादा समय तक बनी रहे, तो स्थिति गंभीर हो सकती है। इसके अलावा बुखार या ठंड लगना, आंखों और त्वचा का पीला पड़ना, पेशाब का रंग गहरा होना और मल का रंग हल्का होना भी चेतावनी के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षणों को सिर्फ गैस या अपच समझकर घर पर इंतजार करना ठीक नहीं है।

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पित्त की पथरी की जांच कैसे होती है?

डॉक्टर सबसे पहले मरीज के लक्षण और मेडिकल हिस्ट्री को समझते हैं। इसके बाद जरूरत के मुताबिक ब्लड टेस्ट और इमेजिंग जांच कराई जा सकती है। गॉलस्टोन का पता लगाने के लिए पेट का अल्ट्रासाउंड सबसे आम और उपयोगी जांचों में से एक है। इससे पित्त की थैली में मौजूद पथरी का पता लगाने में मदद मिलती है।  कुछ परिस्थितियों में डॉक्टर CT स्कैन, MRI/MRCP, HIDA स्कैन या ERCP जैसी अन्य जांचों की सलाह भी दे सकते हैं। खासकर अगर पथरी पित्त की नली में फंसी होने का संदेह हो, तो आगे की जांच जरूरी हो सकती है। 

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पित्त की पथरी का इलाज कैसे होता है?

अगर पित्त की थैली में पथरी है लेकिन किसी तरह के लक्षण नहीं हैं, तो हर मामले में तुरंत इलाज की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर स्थिति देखकर निगरानी की सलाह दे सकते हैं।  वहीं, बार-बार दर्द या गॉलस्टोन से जुड़ी दूसरी समस्याएं होने पर सबसे सामान्य इलाज गॉलब्लैडर निकालने की सर्जरी यानी कोलेसिस्टेक्टॉमी है। आजकल कई मामलों में यह सर्जरी लैप्रोस्कोपिक तरीके से की जाती है। गॉलब्लैडर शरीर के लिए जरूरी अंग नहीं है, इसलिए इसे हटाने के बाद भी व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है।  कुछ खास परिस्थितियों में दवाओं से कोलेस्ट्रॉल वाली पथरी को घोलने या ERCP के जरिए पित्त की नली में फंसी पथरी निकालने जैसे विकल्प भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं। कौन सा इलाज सही रहेगा, यह पथरी की जगह, लक्षण और मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है। 

खान-पान में इन बातों का रखें ध्यान

गॉलस्टोन से बचने के लिए किसी एक खास चीज को खाने या छोड़ने से ज्यादा जरूरी है कि पूरी डाइट संतुलित हो। फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज जैसी फाइबर वाली चीजों को डाइट में जगह देना मददगार हो सकता है। वहीं बहुत ज्यादा चीनी, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और तले-भुने या अस्वास्थ्यकर फैट वाले भोजन को सीमित करना बेहतर है। 

अगर वजन ज्यादा है तो उसे धीरे-धीरे कम करने की कोशिश करें। बहुत तेजी से वजन घटाने वाली डाइट या लंबे समय तक बेहद कम कैलोरी वाला खाना खाने से बचें। नियमित शारीरिक गतिविधि और संतुलित खान-पान के जरिए स्वस्थ वजन बनाए रखना गॉलस्टोन के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। 

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तेज दर्द और पीलिया को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

अगर पेट के ऊपरी हिस्से में तेज दर्द कई घंटों तक बना रहे, साथ में उल्टी, बुखार, ठंड लगना या आंखों-त्वचा का रंग पीला पड़ने लगे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ऐसे लक्षण पित्त की नली में रुकावट, संक्रमण या गॉलस्टोन की दूसरी गंभीर जटिलताओं का संकेत हो सकते हैं। 

नोट: पेट दर्द या अपच का कारण हमेशा गॉलस्टोन ही हो, यह जरूरी नहीं है। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर की जांच जरूरी है। खुद से दवा लेने या किसी घरेलू नुस्खे के भरोसे इलाज टालने से बचें।

  
 
 

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