नारी डेस्क : अगर आपको अक्सर शरीर में भारीपन महसूस होता है, थोड़ी देर पैरों को नीचे लटकाकर बैठने पर टखनों या पैरों में सूजन आ जाती है, या सुबह उठते ही चेहरा फूला हुआ नजर आता है, तो यह वॉटर रिटेंशन (Water Retention) का संकेत हो सकता है। कई लोग इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन बार-बार होने वाली यह समस्या शरीर में तरल पदार्थों के असंतुलन या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या का इशारा भी हो सकती है। ऐसे में इसके कारणों को समझना और समय रहते सही कदम उठाना जरूरी है।
वॉटर रिटेंशन क्या है?
डॉक्टर के अनुसार, जब शरीर में मिनरल्स और तरल पदार्थों का संतुलन बिगड़ जाता है, तो अतिरिक्त पानी शरीर के ऊतकों (टिशूज़) में जमा होने लगता है। इस स्थिति को वॉटर रिटेंशन या फ्लूइड रिटेंशन कहा जाता है। इसके कारण हाथ, पैर, टखनों, चेहरे या पेट में सूजन दिखाई दे सकती है और कई बार दर्द या भारीपन भी महसूस होता है।

वॉटर रिटेंशन के प्रमुख कारण
शरीर में सोडियम (नमक) की अधिक मात्रा
कम पानी पीना
लंबे समय तक एक ही जगह बैठे या खड़े रहना
हार्मोनल बदलाव (पीरियड्स या प्रेग्नेंसी)
किडनी, लिवर या हृदय से जुड़ी बीमारियां
कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट
शरीर में पोटैशियम या मैग्नीशियम की कमी।
वॉटर रिटेंशन के लक्षण
अगर आपको इनमें से कोई लक्षण बार-बार दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
हाथ, पैर, टखनों या चेहरे पर सूजन
शरीर में भारीपन महसूस होना
जोड़ों में अकड़न
त्वचा दबाने पर कुछ देर तक गड्ढा बने रहना
अचानक वजन बढ़ना
पैरों में दर्द या असहजता

किन लोगों में ज्यादा होती है यह समस्या?
गर्भवती महिलाएं
पीरियड्स से पहले महिलाओं में
लंबे समय तक ऑफिस में बैठकर काम करने वाले लोग
अधिक नमक खाने वाले लोग
हृदय, किडनी या लिवर रोग से पीड़ित मरीज
वॉटर रिटेंशन से बचने के उपाय
नमक का सेवन सीमित करें।
रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
नियमित रूप से वॉक या हल्का व्यायाम करें।
लंबे समय तक लगातार बैठने या खड़े रहने से बचें।
पैरों को समय-समय पर ऊंचाई पर रखें।
संतुलित और पौष्टिक आहार लें।
सूजन कम करने के घरेलू उपाय
डॉक्टर के अनुसार, कुछ घरेलू उपाय भी वॉटर रिटेंशन की समस्या में राहत पहुंचा सकते हैं।
प्रोसेस्ड और जंक फूड कम खाएं, क्योंकि इनमें सोडियम अधिक होता है।
केला, एवोकाडो, हरी सब्जियां, दही और नट्स जैसे पोटैशियम व मैग्नीशियम से भरपूर खाद्य पदार्थ खाएं।
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं ताकि अतिरिक्त नमक और टॉक्सिन्स शरीर से बाहर निकल सकें।
रोजाना टहलें और हल्का व्यायाम करें।
कुल्थी का पानी और पार्सले का सीमित मात्रा में सेवन प्राकृतिक डाइयूरेटिक की तरह काम कर सकता है।
हल्की मालिश और ठंडे पानी से स्नान करने से भी कुछ लोगों को राहत मिल सकती है।

सूजन होने पर ठंडी सिंकाई क्यों फायदेमंद है?
यदि सूजन हाल ही में हुई है और दर्द भी है, तो कोल्ड थेरेपी (ठंडी सिंकाई) सूजन और दर्द कम करने में मदद कर सकती है। वहीं, ताजा सूजन पर गर्म सिकाई (Heat Therapy) करने से रक्त संचार बढ़ सकता है, जिससे कुछ मामलों में सूजन और बढ़ सकती है।
नोट: यदि सूजन कई दिनों तक बनी रहे, अचानक बहुत बढ़ जाए या इसके साथ सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, तेज वजन बढ़ना या पेशाब में कमी जैसी समस्याएं हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। यह किडनी, हृदय या लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है।